भारतीय शेयर बाजार ने सप्ताह की शुरुआत मजबूती के साथ की है। पिछले कारोबारी सत्र में बड़ी गिरावट झेलने के बाद सोमवार को बाजार में शानदार रिकवरी देखने को मिली। शुरुआती कारोबार में सेंसेक्स करीब 500 अंकों की तेजी के साथ 74,000 के स्तर पर पहुंच गया, जबकि निफ्टी भी लगभग 150 अंकों की बढ़त दर्ज करते हुए 23,250 के ऊपर कारोबार करता दिखाई दिया।
बाजार में आई इस तेजी का सबसे बड़ा फायदा ऑटो और रियल्टी सेक्टर के शेयरों को मिला। निवेशकों ने इन दोनों सेक्टरों में जमकर खरीदारी की, जिसके चलते संबंधित सूचकांकों में मजबूत उछाल दर्ज किया गया। विश्लेषकों का मानना है कि पिछले सत्र की भारी बिकवाली के बाद निवेशकों ने आकर्षक मूल्यांकन वाले शेयरों में दोबारा खरीदारी शुरू की है, जिससे बाजार को सहारा मिला।
कारोबार के दौरान निवेशकों का रुझान खास तौर पर उन कंपनियों की ओर रहा जो घरेलू मांग और आर्थिक गतिविधियों में सुधार से सीधे लाभान्वित हो सकती हैं। ऑटो सेक्टर में बढ़ती बिक्री की उम्मीद और रियल एस्टेट क्षेत्र में सकारात्मक माहौल ने इन शेयरों को मजबूती प्रदान की।
वैश्विक बाजारों से मिले-जुले संकेतों के बावजूद भारतीय बाजार में सकारात्मक रुख देखने को मिला। एशियाई बाजारों में दक्षिण कोरिया का कोस्पी सूचकांक सबसे बेहतर प्रदर्शन करने वालों में रहा और इसमें उल्लेखनीय तेजी दर्ज की गई। जापान का निक्केई भी मजबूती के साथ कारोबार करता दिखाई दिया। हालांकि हांगकांग का हैंगसेंग इंडेक्स दबाव में रहा और उसमें गिरावट देखने को मिली।
अमेरिकी बाजारों का प्रदर्शन भी मिश्रित रहा। डाउ जोन्स इंडस्ट्रियल एवरेज हल्की गिरावट के साथ बंद हुआ, जबकि तकनीकी शेयरों में खरीदारी के कारण नैस्डैक और एसएंडपी 500 सूचकांक बढ़त के साथ बंद हुए। अमेरिकी बाजारों के इस मिश्रित प्रदर्शन के बावजूद भारतीय निवेशकों का भरोसा मजबूत बना रहा।
विदेशी निवेशकों की गतिविधियां हालांकि बाजार के लिए चिंता का विषय बनी हुई हैं। हालिया आंकड़ों के अनुसार विदेशी संस्थागत निवेशकों (FII) ने 8 जून को भारतीय शेयर बाजार से लगभग 5,556 करोड़ रुपये की निकासी की। पिछले सात दिनों और पिछले एक महीने के आंकड़े भी लगातार विदेशी बिकवाली का संकेत दे रहे हैं।
इसके विपरीत घरेलू संस्थागत निवेशक (DII) लगातार बाजार को समर्थन दे रहे हैं। घरेलू निवेशकों ने 8 जून को 5,165 करोड़ रुपये से अधिक की खरीदारी की। पिछले एक महीने के दौरान घरेलू संस्थागत निवेशकों की मजबूत भागीदारी ने विदेशी बिकवाली के प्रभाव को काफी हद तक संतुलित किया है।
बाजार विशेषज्ञों का मानना है कि घरेलू निवेशकों का बढ़ता विश्वास भारतीय शेयर बाजार की सबसे बड़ी ताकत बनकर उभरा है। म्यूचुअल फंड में लगातार निवेश और खुदरा निवेशकों की सक्रिय भागीदारी ने बाजार को स्थिरता प्रदान की है।
गौरतलब है कि इससे पहले 8 जून को शेयर बाजार में बड़ी गिरावट देखने को मिली थी। सेंसेक्स 719 अंकों की कमजोरी के साथ 73,524 पर बंद हुआ था, जबकि निफ्टी भी 244 अंक टूटकर 23,123 के स्तर पर आ गया था। उस गिरावट के बाद सोमवार को आई तेजी ने निवेशकों को राहत दी है और बाजार में सकारात्मक माहौल लौटता दिखाई दे रहा है।
विशेषज्ञों का कहना है कि आने वाले दिनों में वैश्विक आर्थिक संकेतक, विदेशी निवेशकों की गतिविधियां और कंपनियों के तिमाही नतीजे बाजार की दिशा तय करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे। फिलहाल निवेशकों का ध्यान इस बात पर रहेगा कि क्या यह तेजी आगे भी कायम रहती है या बाजार एक बार फिर मुनाफावसूली का शिकार होता है।
फिलहाल बाजार के शुरुआती संकेत सकारात्मक हैं और निवेशकों के चेहरे पर एक बार फिर मुस्कान लौटती दिखाई दे रही है।