Meta Pixel

छत्तीसगढ़ में निवेश को मिलेगा बूस्ट! मंजूरियों में देरी खत्म करने के लिए बनी राज्य स्तरीय नोडल एजेंसी

Spread the love

छत्तीसगढ़ सरकार ने राज्य में निवेश और औद्योगिक विकास को नई गति देने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। उद्योगों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को विभिन्न विभागों से मिलने वाली मंजूरियों, अनापत्ति प्रमाणपत्रों (एनओसी) और अन्य अनुमोदनों की प्रक्रिया को सरल, पारदर्शी और समयबद्ध बनाने के लिए राज्य सरकार ने एक राज्य स्तरीय नोडल एजेंसी का गठन किया है। इस फैसले को निवेशकों के लिए बड़ी राहत और राज्य के औद्योगिक माहौल को बेहतर बनाने की दिशा में अहम पहल माना जा रहा है।

सरकार का मानना है कि उद्योग स्थापित करने की प्रक्रिया में सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक विभिन्न विभागों से समय पर अनुमति प्राप्त करना होता है। कई बार निवेशकों को अलग-अलग कार्यालयों के चक्कर लगाने पड़ते हैं और मंजूरियों में होने वाली देरी के कारण परियोजनाएं प्रभावित होती हैं। इसी समस्या को दूर करने के लिए छत्तीसगढ़ औद्योगिक निवेश प्रोत्साहन अधिनियम के तहत इस नई व्यवस्था को लागू किया गया है।

नई नोडल एजेंसी का प्रमुख उद्देश्य निवेशकों को अधिक प्रभावी और जवाबदेह प्रणाली उपलब्ध कराना है। इसके तहत सिंगल विंडो पोर्टल पर प्राप्त होने वाले सभी आवेदनों की नियमित निगरानी की जाएगी और यह सुनिश्चित किया जाएगा कि तय समय-सीमा के भीतर उनका निपटारा हो। इससे उद्योगों को प्रशासनिक प्रक्रियाओं में होने वाली देरी से राहत मिलने की उम्मीद है।

विशेष बात यह है कि इस एजेंसी को केवल निगरानी और समीक्षा तक सीमित नहीं रखा गया है। यदि कोई आवेदन निर्धारित समय-सीमा से अधिक अवधि तक लंबित रहता है, तो नोडल एजेंसी को उसे स्वीकृत करने का अधिकार भी दिया गया है। इस प्रावधान को उद्योग जगत के लिए बेहद महत्वपूर्ण माना जा रहा है, क्योंकि इससे विभागीय स्तर पर होने वाली अनावश्यक देरी पर अंकुश लग सकेगा और निवेशकों का भरोसा मजबूत होगा।

राज्य सरकार ने इस एजेंसी में विभिन्न प्रमुख विभागों के वरिष्ठ अधिकारियों को शामिल किया है ताकि निर्णय प्रक्रिया तेज और प्रभावी बन सके। वाणिज्य एवं उद्योग विभाग के सचिव इसकी अध्यक्षता करेंगे। इसके अलावा उद्योग संचालनालय, छत्तीसगढ़ स्टेट इंडस्ट्रियल डेवलपमेंट कॉरपोरेशन, वन विभाग, पर्यावरण संरक्षण मंडल, श्रम विभाग, नगरीय प्रशासन, राजस्व विभाग, पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग, स्वास्थ्य सेवाएं तथा अग्निशमन एवं आपातकालीन सेवाओं से जुड़े वरिष्ठ अधिकारी इसके सदस्य होंगे। इससे विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित होने की संभावना है।

नई एजेंसी उद्योगों से जुड़ी सेवाओं के लिए निर्धारित समय-सीमा और उद्योग स्थापना एवं संचालन के लिए तय टर्नअराउंड टाइम की भी समीक्षा करेगी। यदि आवश्यकता महसूस हुई तो इन समय-सीमाओं में संशोधन कर प्रक्रियाओं को और अधिक सरल बनाया जा सकेगा। इससे भविष्य में निवेशकों को कम समय में मंजूरियां मिलने का रास्ता साफ हो सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि वर्तमान समय में विभिन्न राज्य निवेश आकर्षित करने के लिए प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं। ऐसे में छत्तीसगढ़ सरकार का यह कदम राज्य को निवेश के लिए अधिक आकर्षक बनाने में मदद कर सकता है। मंजूरियों की प्रक्रिया में पारदर्शिता, जवाबदेही और समयबद्धता आने से उद्योग जगत का विश्वास बढ़ेगा और नए निवेशकों को राज्य की ओर आकर्षित किया जा सकेगा।

सरकार ने नोडल एजेंसी को केवल मंजूरी प्रक्रिया तक सीमित नहीं रखा है। उसे राज्य को एक अग्रणी निवेश गंतव्य के रूप में विकसित करने की व्यापक जिम्मेदारी भी सौंपी गई है। एजेंसी निवेश-अनुकूल वातावरण तैयार करने, वैश्विक निवेशकों के साथ साझेदारी को बढ़ावा देने और दीर्घकालिक औद्योगिक नीतियों के लिए सुझाव देने का कार्य भी करेगी।

इसके अलावा राज्य निवेश प्रोत्साहन बोर्ड और विभिन्न थर्ड पार्टी एजेंसियों के कामकाज की समीक्षा का दायित्व भी इसी एजेंसी को सौंपा गया है। इससे यह सुनिश्चित किया जा सकेगा कि निवेशकों को मिलने वाली सेवाएं गुणवत्ता और समय-सीमा के अनुरूप हों।

सरकार को उम्मीद है कि नई व्यवस्था लागू होने के बाद राज्य में उद्योग स्थापना की रफ्तार बढ़ेगी, रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी। साथ ही, छत्तीसगढ़ को देश के प्रमुख निवेश केंद्रों में शामिल करने के लक्ष्य को हासिल करने में भी यह पहल महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकती है।

कुल मिलाकर, राज्य स्तरीय नोडल एजेंसी का गठन केवल एक प्रशासनिक सुधार नहीं बल्कि छत्तीसगढ़ को निवेश और औद्योगिक विकास के नए दौर में ले जाने की दिशा में उठाया गया एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *