नीट-यूजी 2026 की दोबारा परीक्षा को लेकर केंद्र सरकार इस बार किसी भी तरह की चूक के मूड में नहीं है। पिछले वर्षों में पेपर लीक और परीक्षा प्रक्रिया पर उठे सवालों के बाद सरकार ने 21 जून को आयोजित होने वाली परीक्षा के लिए ऐसी अभूतपूर्व सुरक्षा व्यवस्था तैयार की है, जिसे अब तक की सबसे कड़ी और हाईटेक परीक्षा सुरक्षा प्रणाली माना जा रहा है।
सरकार का दावा है कि इस बार परीक्षा प्रक्रिया को पूरी तरह पारदर्शी, सुरक्षित और लीक-प्रूफ बनाने के लिए सैन्य संसाधनों से लेकर अत्याधुनिक डिजिटल तकनीकों तक का उपयोग किया जा रहा है। पूरी व्यवस्था प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की निगरानी में तैयार की गई है और विशेष बात यह है कि परीक्षा संचालन से जुड़ी हर जिम्मेदारी सरकारी तंत्र के भीतर ही रखी गई है। किसी भी निजी एजेंसी या बाहरी संगठन को इस प्रक्रिया में शामिल नहीं किया गया है, ताकि गोपनीयता और सुरक्षा से कोई समझौता न हो।
इस बार प्रश्नपत्र तैयार करने की प्रक्रिया भी बेहद गोपनीय रखी गई है। अधिकारियों के अनुसार, जिस प्रकार केंद्रीय बजट तैयार करने के दौरान अत्यधिक गोपनीयता बरती जाती है, उसी स्तर की सुरक्षा और नियंत्रण परीक्षा प्रश्नपत्रों के निर्माण में भी लागू किया गया है। वरिष्ठ शिक्षकों, विषय विशेषज्ञों और सरकारी प्रोफेसरों की मदद से लाखों प्रश्नपत्र तैयार किए गए हैं, जिनकी निगरानी लगातार की गई।
देश के विभिन्न राज्यों और भाषाई क्षेत्रों के छात्रों को ध्यान में रखते हुए प्रश्नपत्रों का अनुवाद भी अत्याधुनिक तकनीक के माध्यम से किया गया है। अखिल भारतीय तकनीकी शिक्षा परिषद और इलेक्ट्रॉनिक्स एवं सूचना प्रौद्योगिकी मंत्रालय की भारतीय भाषा अनुवाद प्रणाली की सहायता से हिंदी, अंग्रेजी समेत 13 भाषाओं में प्रश्नपत्र तैयार किए गए हैं। अधिकारियों का कहना है कि तकनीक की मदद से अनुवाद में त्रुटियों की संभावना को न्यूनतम किया गया है।
प्रश्नपत्रों को परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाने की जिम्मेदारी इस बार भारतीय वायुसेना को सौंपी गई है। वायुसेना के एमआई-17 हेलीकॉप्टर देश के विभिन्न रणनीतिक स्थानों तक प्रश्नपत्र पहुंचाएंगे। इसके बाद सेना के लॉजिस्टिक नेटवर्क की मदद से इन्हें सुरक्षित स्थानों पर रखा जाएगा और फिर निर्धारित परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाया जाएगा।
पूरे परिवहन तंत्र में सेना और अर्धसैनिक बलों की भूमिका भी अहम रखी गई है। विशेष सुरक्षा वाहनों के माध्यम से प्रश्नपत्रों को देशभर के सैकड़ों परीक्षा केंद्रों तक पहुंचाया जाएगा। सुरक्षा एजेंसियों ने इसके लिए विस्तृत रूट प्लान तैयार किए हैं और किसी भी आपात स्थिति से निपटने के लिए क्विक रिस्पांस टीमें भी तैनात की गई हैं।
प्रश्नपत्रों को सुरक्षित रखने के लिए स्टील से बने विशेष सुरक्षा बॉक्स तैयार किए गए हैं। इन बॉक्सों को कई स्तरों की सुरक्षा के साथ सील किया गया है। एयरबेस से लेकर परीक्षा केंद्र तक हर चरण में सेना के जवान इनकी निगरानी करेंगे। जिन वाहनों से इन बॉक्सों को ले जाया जाएगा, उनमें लाइव कैमरा निगरानी और जीपीएस ट्रैकिंग सिस्टम लगाए गए हैं, ताकि हर गतिविधि पर वास्तविक समय में नजर रखी जा सके।
सुरक्षा व्यवस्था की सबसे महत्वपूर्ण कड़ी डिजिटल लॉकिंग सिस्टम को माना जा रहा है। प्रश्नपत्र वाले बॉक्स सामान्य तरीके से नहीं खोले जा सकेंगे। परीक्षा के निर्धारित दिन और समय पर दिल्ली स्थित नियंत्रण केंद्र से डिजिटल पासवर्ड जारी किया जाएगा। इसके बाद ही अधिकृत अधिकारियों की मौजूदगी में बॉक्स खोले जा सकेंगे। इससे परीक्षा से पहले प्रश्नपत्र तक किसी की पहुंच लगभग असंभव हो जाएगी।
सूत्रों के अनुसार, इस पूरे ऑपरेशन की निगरानी के लिए एक उच्चस्तरीय समिति बनाई गई है, जो लगातार स्थिति की समीक्षा कर रही है। यह समिति सीधे प्रधानमंत्री कार्यालय और कैबिनेट सचिवालय को रिपोर्ट भेज रही है। सुरक्षा एजेंसियों, शिक्षा मंत्रालय, सेना और अन्य विभागों के बीच समन्वय स्थापित करने के लिए विशेष कंट्रोल रूम भी बनाए गए हैं।
सरकार का मानना है कि इस नई व्यवस्था से छात्रों का विश्वास फिर से मजबूत होगा और परीक्षा की विश्वसनीयता बढ़ेगी। पिछले वर्षों में सामने आए विवादों के बाद यह परीक्षा केवल एक शैक्षणिक प्रक्रिया नहीं रह गई है, बल्कि देश की सबसे महत्वपूर्ण और संवेदनशील प्रतियोगी परीक्षाओं में से एक बन गई है।
21 जून को होने वाली परीक्षा को लेकर लाखों छात्र तैयारी में जुटे हुए हैं। ऐसे में सरकार की यह कोशिश है कि परीक्षा निष्पक्ष, पारदर्शी और पूरी तरह सुरक्षित वातावरण में संपन्न हो, ताकि मेहनत करने वाले विद्यार्थियों को किसी भी प्रकार की अनियमितता का सामना न करना पड़े।