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छत्तीसगढ़ में ईंधन संकट के बीच बड़ा खुलासा, टैंकरों से पेट्रोल-डीजल चोरी करने वाला गिरोह पकड़ा गया

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छत्तीसगढ़ में पेट्रोल और डीजल की उपलब्धता को लेकर लोगों की चिंता बढ़ती जा रही है। एक ओर प्रदेश के कई पेट्रोल पंपों पर ईंधन की कमी की शिकायतें सामने आ रही हैं, वहीं दूसरी ओर राजधानी रायपुर में टैंकरों से पेट्रोल-डीजल चोरी करने वाले एक संगठित नेटवर्क का भंडाफोड़ होने से आपूर्ति व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं। इस कार्रवाई ने संकेत दिए हैं कि ईंधन की कमी के पीछे केवल सप्लाई संबंधी दिक्कतें ही नहीं, बल्कि चोरी और अवैध कारोबार जैसी गतिविधियां भी जिम्मेदार हो सकती हैं।

जानकारी के मुताबिक, ऑयल कंपनियों द्वारा टैंकरों के माध्यम से ईंधन वितरण की समय-सीमा में बदलाव किए जाने के बाद प्रदेश के कई हिस्सों में आपूर्ति प्रभावित हुई है। पहले जहां टैंकरों के संचालन और सप्लाई की प्रक्रिया 24 घंटे तक चलती थी, वहीं अब यह अवधि घटकर करीब 8 घंटे रह गई है। इसका असर सीधे पेट्रोल पंपों पर दिखाई दे रहा है। कई स्थानों पर समय पर टैंकर नहीं पहुंचने से पेट्रोल और डीजल का स्टॉक तेजी से कम हो रहा है और कुछ पंपों पर ड्राई आउट जैसी स्थिति बनने की खबरें भी सामने आई हैं।

हालांकि तेल कंपनियां यह दावा कर रही हैं कि प्रदेश में ईंधन का पर्याप्त भंडार उपलब्ध है और सप्लाई व्यवस्था सामान्य बनाए रखने के प्रयास किए जा रहे हैं, लेकिन उपभोक्ताओं का अनुभव कुछ अलग तस्वीर पेश कर रहा है। कई क्षेत्रों में वाहन चालकों को पेट्रोल और डीजल के लिए इंतजार करना पड़ रहा है, जबकि कुछ पंपों पर सीमित मात्रा में ईंधन उपलब्ध होने की सूचना भी मिल रही है।

इस बीच खरीफ सीजन की शुरुआत ने डीजल की मांग को और बढ़ा दिया है। खेती-किसानी के कार्यों में तेजी आने के कारण ट्रैक्टर, सिंचाई पंप और अन्य कृषि उपकरणों के लिए डीजल की खपत बढ़ गई है। ग्रामीण इलाकों में बढ़ी मांग का असर शहरी क्षेत्रों की आपूर्ति व्यवस्था पर भी पड़ रहा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि मांग और आपूर्ति के बीच संतुलन नहीं बनाया गया तो आने वाले दिनों में स्थिति और चुनौतीपूर्ण हो सकती है।

ईंधन संकट के इसी दौर में रायपुर के कबीर नगर क्षेत्र में पुलिस ने एक बड़ी कार्रवाई करते हुए पेट्रोल-डीजल चोरी के अवैध कारोबार का खुलासा किया है। पुलिस को सूचना मिली थी कि एक यार्ड में टैंकरों से ईंधन निकालकर अवैध रूप से संग्रहित किया जा रहा है। सूचना के आधार पर की गई छापेमारी में पुलिस ने भारी मात्रा में पेट्रोल और डीजल बरामद किया।

कार्रवाई के दौरान करीब 1600 लीटर पेट्रोल और 1700 लीटर डीजल जब्त किया गया। इसके अलावा मौके से टैंकर, ड्रम और ईंधन निकालने में इस्तेमाल किए जाने वाले उपकरण भी बरामद किए गए। पुलिस के अनुसार यह अवैध कारोबार काफी संगठित तरीके से संचालित किया जा रहा था और इसमें कई लोगों की भूमिका होने की आशंका है।

मामले में चार आरोपियों को गिरफ्तार किया गया है। शुरुआती जांच में यह बात सामने आई है कि टैंकरों से निर्धारित मात्रा में ईंधन निकालकर उसे अलग से संग्रहित किया जाता था और बाद में अवैध रूप से बेचा जाता था। पुलिस अब इस बात की जांच कर रही है कि यह नेटवर्क कितने समय से सक्रिय था और इसमें परिवहन, सप्लाई या अन्य क्षेत्रों से जुड़े और कौन-कौन लोग शामिल हो सकते हैं।

अधिकारियों का मानना है कि जांच आगे बढ़ने पर ईंधन चोरी और अवैध बिक्री से जुड़े एक बड़े रैकेट का खुलासा हो सकता है। जब्त किए गए वाहनों, दस्तावेजों और ईंधन के स्रोत की भी बारीकी से जांच की जा रही है। यदि नेटवर्क का दायरा बड़ा पाया जाता है तो इससे प्रदेश में ईंधन आपूर्ति पर पड़ रहे प्रभाव की भी तस्वीर साफ हो सकती है।

फिलहाल प्रदेश में पेट्रोल-डीजल की आपूर्ति और मांग के बीच संतुलन बनाए रखना प्रशासन और तेल कंपनियों के लिए बड़ी चुनौती बन गया है। वहीं रायपुर में सामने आए इस मामले ने यह सवाल भी खड़ा कर दिया है कि कहीं ईंधन संकट के पीछे संगठित चोरी और काला कारोबार तो नहीं बढ़ रहा। आने वाले दिनों में जांच के नतीजे इस पूरे मामले की वास्तविक तस्वीर सामने ला सकते हैं।

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