भिलाई इस्पात संयंत्र का नाम देश में इस्पात उत्पादन और औद्योगिक उत्कृष्टता के लिए जाना जाता है, लेकिन अब यह चिकित्सा शिक्षा और स्वास्थ्य प्रबंधन के क्षेत्र में भी अपनी सशक्त उपस्थिति दर्ज करा रहा है। इसका ताज़ा उदाहरण जवाहरलाल नेहरू चिकित्सालय एवं अनुसंधान केंद्र (जेएलएन चिकित्सालय) के ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विशेषज्ञ डॉ. दीपक कुमार दासमहापात्र की पुस्तक “क्वालिटी मैनेजेमेंट इन ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन एंड एसओपी ऑफ ब्लड सेंटर” है, जिसने प्रकाशन के तुरंत बाद अमेज़न पर ‘हेमेटोलॉजी’ एवं ‘ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन’ श्रेणी में ‘#1 बेस्ट सेलर’ का स्थान प्राप्त किया है।
इनोवेटिव पब्लिकेशन द्वारा 4 मई 2026 को प्रकाशित इस पुस्तक को चिकित्सा क्षेत्र में गुणवत्ता प्रबंधन और रक्त सेवा संचालन से जुड़ी एक महत्वपूर्ण संदर्भ पुस्तक माना जा रहा है। पुस्तक में ब्लड सेंटर के संचालन, गुणवत्ता मानकों, लाइसेंसिंग प्रक्रिया, सुरक्षा प्रोटोकॉल तथा विभिन्न स्टैंडर्ड ऑपरेटिंग प्रोसीजर (एसओपी) को व्यावहारिक और व्यवस्थित रूप में प्रस्तुत किया गया है। यही कारण है कि चिकित्सा शिक्षकों, पोस्ट ग्रेजुएट विद्यार्थियों, मेडिकल टेक्नोलॉजिस्ट और ब्लड सेंटर प्रबंधकों के बीच इसे व्यापक सराहना मिल रही है।
डॉ. दीपक कुमार दासमहापात्र वर्तमान में जवाहरलाल नेहरू चिकित्सालय में ट्रांसफ्यूजन मेडिसिन विभाग में कंसलटेंट के रूप में अपनी सेवाएँ दे रहे हैं। एमबीबीएस और एमडी के साथ वे अस्पताल एवं स्वास्थ्य प्रबंधन, कॉर्पोरेट लॉ, क्लिनिकल ऑन्कोलॉजी तथा रिस्क मैनेजमेंट जैसे विविध क्षेत्रों में भी विशेषज्ञता रखते हैं। इस पुस्तक के सह-लेखकों में श्री संदीप कुमार पांडे, डॉ. अनुराधा पांडा और डॉ. बबीता एक्का शामिल हैं।
यह उपलब्धि इसलिए भी विशेष महत्व रखती है क्योंकि जवाहरलाल नेहरू चिकित्सालय का ब्लड सेंटर एनएबीएच मान्यता प्राप्त है, जो छत्तीसगढ़ तथा सेल अस्पतालों की पूरी श्रृंखला में अपनी तरह का पहला ब्लड सेंटर है। पुस्तक को एनएबीएच और जेसीआई जैसे अंतरराष्ट्रीय गुणवत्ता मानकों के अनुरूप तैयार किया गया है, जिससे यह केवल एक शैक्षणिक पुस्तक नहीं, बल्कि गुणवत्ता आधारित स्वास्थ्य सेवाओं का व्यावहारिक मार्गदर्शक भी बन गई है।
पुस्तक की प्रमुख विशेषताओं में ब्लड सेंटर लाइसेंसिंग, ओएनडीएलएस पोर्टल पंजीकरण, गुणवत्ता नीति, ऑडिट प्रणाली तथा प्रयोगशाला स्तर पर आने वाली जटिल चुनौतियों के समाधान को शामिल किया गया है। एबीओ विसंगतियों, पॉजिटिव डीएटी परिणामों तथा रक्त अनुकूलता से जुड़े मामलों के लिए त्वरित संदर्भ तालिकाएँ और विस्तृत प्रोटोकॉल इसे चिकित्सा पेशेवरों के लिए और अधिक उपयोगी बनाते हैं।
डॉ. दासमहापात्र का मानना है कि सुरक्षित रक्त सेवा केवल तकनीकी प्रक्रियाओं तक सीमित नहीं है, बल्कि इसके पीछे चिकित्सकों, तकनीशियनों, नर्सिंग स्टाफ और स्वैच्छिक रक्तदाताओं की एक समर्पित श्रृंखला कार्य करती है। पुस्तक के माध्यम से उन्होंने उन सभी लोगों के योगदान को रेखांकित करने का प्रयास किया है, जो प्रतिदिन अनगिनत मरीजों के जीवन की रक्षा में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
भिलाई से प्रकाशित इस पुस्तक की राष्ट्रीय स्तर पर मिली सफलता न केवल लेखक की व्यक्तिगत उपलब्धि है, बल्कि यह भिलाई इस्पात संयंत्र और जेएलएन अस्पताल की उस ज्ञान-परंपरा का भी प्रमाण है, जो औद्योगिक उत्कृष्टता के साथ-साथ चिकित्सा शिक्षा, अनुसंधान और स्वास्थ्य सेवा के क्षेत्र में भी नए मानक स्थापित कर रही है। यह उपलब्धि दर्शाती है कि भिलाई अब केवल इस्पात निर्माण का केंद्र नहीं, बल्कि ज्ञान, नवाचार और चिकित्सा उत्कृष्टता का भी एक महत्वपूर्ण केंद्र बनकर उभर रहा है।