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FIFA वर्ल्ड कप 2026 का महासंग्राम शुरू, पहली बार तीन देशों में होगा दुनिया के सबसे बड़े फुटबॉल टूर्नामेंट का आयोजन

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फुटबॉल प्रेमियों का इंतजार आखिरकार खत्म होने जा रहा है। दुनिया के सबसे प्रतिष्ठित खेल आयोजन FIFA मेंस वर्ल्ड कप 2026 का आगाज 11 जून से होने जा रहा है। इस बार का टूर्नामेंट कई मायनों में ऐतिहासिक साबित होगा, क्योंकि 96 साल के इतिहास में पहली बार तीन देश मिलकर इसकी मेजबानी कर रहे हैं। अमेरिका, कनाडा और मेक्सिको संयुक्त रूप से इस महाकुंभ का आयोजन करेंगे, जिसमें दुनिया की सर्वश्रेष्ठ 48 टीमें खिताब के लिए मुकाबला करेंगी।

टूर्नामेंट का उद्घाटन मुकाबला मेक्सिको सिटी में खेला जाएगा, जहां मेजबान मेक्सिको का सामना दक्षिण अफ्रीका से होगा। 11 जून से शुरू होने वाला यह टूर्नामेंट 20 जुलाई तक चलेगा और इस दौरान 16 शहरों में कुल 104 मुकाबले खेले जाएंगे। यह फीफा इतिहास का अब तक का सबसे बड़ा और सबसे लंबा विश्व कप होगा।

इस बार का वर्ल्ड कप कई रिकॉर्ड अपने नाम करने जा रहा है। पहली बार टूर्नामेंट में 48 टीमें हिस्सा लेंगी। इससे पहले 1998 से 2022 तक केवल 32 टीमें ही विश्व कप में खेलती थीं। टीमों की संख्या बढ़ने के साथ मुकाबलों की संख्या भी 64 से बढ़ाकर 104 कर दी गई है। इतना ही नहीं, पहली बार फाइनल मुकाबले के दौरान हाफ टाइम शो भी आयोजित किया जाएगा, जो इस आयोजन को और भव्य बनाएगा।

मेजबानी के लिहाज से भी यह टूर्नामेंट खास है। 2002 में पहली बार दो देशों जापान और दक्षिण कोरिया ने संयुक्त रूप से विश्व कप की मेजबानी की थी। अब पहली बार तीन देश एक साथ इस आयोजन की मेजबानी करेंगे। मेक्सिको इस उपलब्धि के साथ पहला ऐसा देश बन जाएगा जिसने तीन बार फीफा विश्व कप की मेजबानी की है। इससे पहले उसने 1970 और 1986 में भी टूर्नामेंट आयोजित किया था।

नए प्रारूप के तहत 48 टीमों को 12 समूहों में बांटा गया है और प्रत्येक समूह में चार-चार टीमें होंगी। हर टीम ग्रुप स्टेज में तीन मुकाबले खेलेगी। प्रत्येक समूह की शीर्ष दो टीमें सीधे अगले दौर में पहुंचेंगी। इसके अलावा तीसरे स्थान पर रहने वाली 12 टीमों में से सर्वश्रेष्ठ 8 टीमों को भी नॉकआउट चरण में जगह मिलेगी। इस तरह कुल 32 टीमें नॉकआउट मुकाबलों के लिए क्वालिफाई करेंगी।

फुटबॉल विशेषज्ञों की नजर इस बार कुछ बेहद कठिन समूहों पर भी रहेगी। डिफेंडिंग चैंपियन अर्जेंटीना को ग्रुप जे में रखा गया है। वहीं स्पेन, फ्रांस, पुर्तगाल और इंग्लैंड जैसे दिग्गज देशों के समूहों को ‘ग्रुप ऑफ डेथ’ माना जा रहा है। इन समूहों में कई मजबूत और उलटफेर करने वाली टीमें मौजूद हैं, जिससे मुकाबले बेहद रोमांचक होने की उम्मीद है।

इस विश्व कप में अनुभव और युवा प्रतिभा का अनोखा संगम भी देखने को मिलेगा। टूर्नामेंट के सबसे उम्रदराज खिलाड़ी स्कॉटलैंड के गोलकीपर क्रेग गॉर्डन होंगे, जिनकी उम्र 43 वर्ष से अधिक है। वहीं मेक्सिको के युवा खिलाड़ी गिल्बर्टो मोरा महज 17 वर्ष की उम्र में विश्व कप का हिस्सा बन रहे हैं। दोनों खिलाड़ियों के बीच 25 साल से अधिक का आयु अंतर है।

विश्व कप 2026 चार देशों के लिए भी ऐतिहासिक रहेगा। काबो वर्डी, क्यूरासाओ, जॉर्डन और उज्बेकिस्तान पहली बार फीफा विश्व कप में खेलेंगे। वहीं ऑस्ट्रिया, नॉर्वे और स्कॉटलैंड जैसी टीमें लंबे अंतराल के बाद वापसी कर रही हैं।

टूर्नामेंट की पुरस्कार राशि भी रिकॉर्ड स्तर पर पहुंच गई है। फीफा इस बार कुल 655 मिलियन अमेरिकी डॉलर यानी लगभग 5600 करोड़ रुपये से अधिक की राशि प्रतिभागी टीमों में वितरित करेगा। विजेता टीम को लगभग 429 करोड़ रुपये की पुरस्कार राशि मिलेगी, जबकि उपविजेता को करीब 283 करोड़ रुपये दिए जाएंगे।

फीफा विश्व कप के इतिहास में ब्राजील सबसे सफल टीम रही है। उसने रिकॉर्ड पांच बार विश्व कप जीता है। जर्मनी और इटली चार-चार बार चैंपियन बने हैं, जबकि अर्जेंटीना तीन बार खिताब अपने नाम कर चुका है। 2022 में अर्जेंटीना ने लियोनेल मेसी की कप्तानी में फ्रांस को हराकर विश्व कप जीता था और इस बार वह अपने खिताब का बचाव करने उतरेगा।

1930 में उरुग्वे से शुरू हुआ फीफा विश्व कप आज दुनिया का सबसे लोकप्रिय खेल आयोजन बन चुका है। करोड़ों दर्शकों की नजरें इस बार भी लियोनेल मेसी, क्रिस्टियानो रोनाल्डो और दुनिया भर के शीर्ष खिलाड़ियों पर टिकी रहेंगी। ऐसे में फुटबॉल प्रेमियों के लिए अगले कुछ सप्ताह रोमांच, जुनून और यादगार मुकाबलों से भरपूर रहने वाले हैं।

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