Meta Pixel

छत्तीसगढ़ में मोहर्रम-उर्स पर सख्ती, DJ-बैंड और आतिशबाजी पूरी तरह बैन; नियम तोड़ने पर 50 हजार जुर्माना

Spread the love

छत्तीसगढ़ में मोहर्रम और उर्स के आयोजनों को लेकर राज्य वक्फ बोर्ड ने बड़ा फैसला लिया है। बोर्ड ने स्पष्ट निर्देश जारी करते हुए कहा है कि प्रदेश में होने वाले सभी मोहर्रम, उर्स और अन्य धार्मिक कार्यक्रम केवल कुरान, हदीस और शरीयत के अनुसार ही आयोजित किए जाएंगे। इसके तहत DJ, धुमाल, बैंड-बाजा, नाच-गाना, आतिशबाजी और अन्य गैर-शरीयत गतिविधियों पर पूरी तरह प्रतिबंध लगा दिया गया है।

छत्तीसगढ़ राज्य वक्फ बोर्ड के अध्यक्ष डॉ. सलीम राज द्वारा जारी निर्देश में प्रदेश की सभी ताजिया कमेटियों, दरगाह कमेटियों, उर्स कमेटियों, मुतवल्लियान और इंतेजामिया कमेटियों को धार्मिक आयोजनों की पवित्रता और गरिमा बनाए रखने के लिए विशेष रूप से कहा गया है। बोर्ड का मानना है कि मोहर्रम और उर्स जैसे धार्मिक अवसर इबादत, त्याग, अनुशासन और आध्यात्मिक चिंतन के प्रतीक हैं, इसलिए इनमें किसी भी प्रकार के मनोरंजन या दिखावे की गतिविधियों को शामिल नहीं किया जाना चाहिए।

निर्देश में कहा गया है कि यदि किसी भी जुलूस, उर्स या धार्मिक कार्यक्रम में DJ, बैंड-बाजा, नाच-गाना या आतिशबाजी जैसी प्रतिबंधित गतिविधियां पाई जाती हैं, तो संबंधित समिति और उसके जिम्मेदार पदाधिकारियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। इतना ही नहीं, आवश्यकता पड़ने पर संबंधित समिति की मान्यता भी समाप्त की जा सकती है।

वक्फ बोर्ड ने नियमों के उल्लंघन पर आर्थिक दंड का भी प्रावधान रखा है। आदेश के अनुसार, नियम तोड़ने वाली समिति या आयोजन समिति पर 50 हजार रुपए तक का जुर्माना लगाया जा सकता है। बोर्ड ने सभी आयोजकों से अपील की है कि वे धार्मिक कार्यक्रमों को पूरे अदब, एहतराम, अनुशासन और धार्मिक मर्यादाओं के अनुरूप संपन्न कराएं तथा किसी भी विवादास्पद या अनुचित गतिविधि से दूर रहें।

मोहर्रम के अवसर पर मुस्लिम समाज को संबोधित करते हुए वक्फ बोर्ड ने हजरत इमाम हुसैन और शहीद-ए-कर्बला की कुर्बानियों को याद करने की अपील की है। बोर्ड ने कहा कि मोहर्रम का पर्व सादगी, सब्र, इबादत और अच्छे आचरण के साथ मनाया जाना चाहिए ताकि इसकी वास्तविक भावना और संदेश समाज तक पहुंच सके।

इसके साथ ही प्रदेश की सभी मस्जिदों के इमाम साहबान, मुतवल्लियान और इंतेजामिया कमेटियों को निर्देश दिया गया है कि इस आदेश को जुमे की नमाज से पहले लोगों को पढ़कर सुनाया जाए। साथ ही मस्जिदों के नोटिस बोर्ड पर भी इस निर्देश की प्रति चस्पा की जाए, ताकि अधिक से अधिक लोगों तक इसकी जानकारी पहुंच सके।

वक्फ बोर्ड के इस फैसले को धार्मिक आयोजनों में अनुशासन और धार्मिक मूल्यों को बनाए रखने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है। आने वाले मोहर्रम और उर्स आयोजनों में इन निर्देशों का पालन सुनिश्चित करने के लिए संबंधित समितियों और प्रशासन की भूमिका भी महत्वपूर्ण होगी।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *