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पांचवें महीने भी बढ़ी महंगाई, मई में 3.93% पर पहुंची; खाने-पीने की चीजों और ट्रांसपोर्ट का बढ़ा खर्च

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देश में महंगाई एक बार फिर लोगों की जेब पर दबाव बढ़ाने लगी है। मई 2026 में खुदरा महंगाई दर बढ़कर 3.93 प्रतिशत पर पहुंच गई, जो अप्रैल में 3.48 प्रतिशत थी। लगातार पांचवें महीने महंगाई में बढ़ोतरी दर्ज की गई है। हालांकि यह अभी भी भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के निर्धारित 2 से 6 प्रतिशत के दायरे के भीतर है, लेकिन 4 प्रतिशत के लक्ष्य के बेहद करीब पहुंचने से चिंता बढ़ गई है।

साल की शुरुआत में महंगाई काफी नियंत्रित थी। जनवरी 2026 में खुदरा महंगाई दर 2.74 प्रतिशत थी, लेकिन इसके बाद लगातार बढ़ते हुए मई में यह 3.93 प्रतिशत तक पहुंच गई। केवल एक महीने में ही महंगाई में 0.45 प्रतिशत की वृद्धि दर्ज की गई, जो पिछले 16 महीनों का सबसे तेज मासिक उछाल माना जा रहा है।

महंगाई बढ़ने की सबसे बड़ी वजह खाने-पीने की वस्तुओं के दामों में आई तेजी रही। मई में खाद्य महंगाई दर बढ़कर 4.78 प्रतिशत हो गई, जबकि अप्रैल में यह 4.20 प्रतिशत थी। ग्रामीण क्षेत्रों में इसका असर ज्यादा देखने को मिला, जहां खाद्य महंगाई 4.85 प्रतिशत रही। वहीं शहरी क्षेत्रों में यह आंकड़ा 4.66 प्रतिशत दर्ज किया गया। इसका सीधा असर आम परिवारों के मासिक बजट पर पड़ रहा है।

इस बार सोना और आभूषण भी महंगाई बढ़ाने वाले प्रमुख कारकों में शामिल रहे। ज्वेलरी और कीमती धातुओं से जुड़ी श्रेणी में कीमतों में 56.35 प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई। सोने की कीमतों में लगातार तेजी के चलते यह श्रेणी महंगाई के आंकड़ों में सबसे तेजी से बढ़ने वाला हिस्सा बन गई है।

ट्रांसपोर्टेशन और अन्य सेवाओं की लागत बढ़ने से भी लोगों का खर्च बढ़ा है। ईंधन की कीमतों में वैश्विक स्तर पर बनी अनिश्चितता और आपूर्ति श्रृंखला पर दबाव का असर घरेलू बाजारों पर भी दिखाई देने लगा है। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि कच्चे तेल की कीमतें इसी तरह ऊंची बनी रहीं तो आने वाले महीनों में महंगाई पर और दबाव बढ़ सकता है।

महंगाई के बढ़ते आंकड़ों ने भारतीय रिजर्व बैंक की चिंता भी बढ़ा दी है। कई अर्थशास्त्रियों का मानना है कि यदि यही रुझान जारी रहा तो आरबीआई को रेपो रेट में बढ़ोतरी पर विचार करना पड़ सकता है। कुछ विशेषज्ञों का अनुमान है कि महंगाई पर नियंत्रण के लिए ब्याज दरों में 0.50 प्रतिशत तक की वृद्धि की जा सकती है।

मौसम भी महंगाई के भविष्य को प्रभावित करने वाला बड़ा कारक बन सकता है। यदि मानसून सामान्य से कमजोर रहता है या अल नीनो का प्रभाव बढ़ता है, तो खाद्यान्न उत्पादन प्रभावित हो सकता है। ऐसी स्थिति में सब्जियों, अनाज और अन्य खाद्य पदार्थों की कीमतें और बढ़ सकती हैं। दूसरी ओर यदि अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल के दाम लगातार ऊंचे बने रहे और उसका बोझ घरेलू उपभोक्ताओं पर डाला गया, तो खुदरा महंगाई 5 प्रतिशत के स्तर को भी पार कर सकती है।

आम भाषा में समझें तो 3.93 प्रतिशत महंगाई का मतलब यह है कि यदि पिछले साल किसी वस्तु की कीमत 100 रुपये थी, तो आज वही वस्तु औसतन 103.93 रुपये में मिल रही है। यह आंकड़ा केवल एक वस्तु का नहीं बल्कि भोजन, कपड़े, परिवहन, शिक्षा और रोजमर्रा की सैकड़ों जरूरतों को मिलाकर निकाला जाता है।

फिलहाल महंगाई आरबीआई के निर्धारित दायरे में है, लेकिन लगातार बढ़ते आंकड़े संकेत दे रहे हैं कि आने वाले महीनों में कीमतों पर नजर बनाए रखना बेहद जरूरी होगा। खाद्य वस्तुओं, ईंधन और मौसम से जुड़े जोखिम यदि बढ़ते हैं तो आम आदमी की जेब पर और ज्यादा बोझ पड़ सकता है।

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