वैश्विक कूटनीति और अंतरराष्ट्रीय राजनीति के दृष्टिकोण से एक बहुत बड़ी और बेहद महत्वपूर्ण खबर है। भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के बीच करीब 16 महीनों के एक लंबे अंतराल के बाद आमने-सामने की शिखर मुलाकात होने जा रही है। दोनों वैश्विक नेताओं के बीच यह मुलाकात कनाडा के खूबसूरत प्रांत अलबर्टा में आयोजित हो रहे प्रतिष्ठित 52वें जी7 शिखर सम्मेलन के इतर संपन्न होगी।
भारत और अमेरिका के विदेश मंत्रालयों ने इस द्विपक्षीय बैठक के एजेंडे को लेकर अपनी तैयारियां पूरी तरह से अंतिम चरण में पहुंचा दी हैं, जिस पर इस समय पूरी दुनिया के राजनैतिक विश्लेषकों की पैनी नजरें टिकी हुई हैं।
कनाडा के अलबर्टा में सजेगा वैश्विक मंच और जस्टिन ट्रूडो ने दिया न्योता
कनाडा की मेजबानी में आयोजित हो रहे इस वर्ष के जी7 शिखर सम्मेलन का मुख्य केंद्र अलबर्टा को बनाया गया है, जहां दुनिया की सात सबसे बड़ी विकसित अर्थव्यवस्थाओं के राष्ट्राध्यक्ष वैश्विक चुनौतियों पर मंथन करने के लिए जुट रहे हैं। भारत यद्यपि जी7 का स्थायी सदस्य नहीं है, लेकिन वैश्विक पटल पर भारत की बढ़ती धमक को देखते हुए कनाडा के प्रधानमंत्री जस्टिन ट्रूडो ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस सम्मेलन में विशेष रूप से भाग लेने के लिए एक औपचारिक और सम्मानजनक निमंत्रण भेजा था।
विदेश मंत्रालय (MEA) के प्रवक्ता रणधीर जायसवाल द्वारा दी गई आधिकारिक जानकारी के मुताबिक, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी 13 से 15 जून के बीच कनाडा की यात्रा पर रहेंगे, जहां वे जी7 के आउटरीच देशों के विशेष सत्र को संबोधित करने के साथ-साथ कई वैश्विक नेताओं से मुलाकात करेंगे।
होर्मुज जलमार्ग संकट और अमेरिकी व्यापारिक टैरिफ पर होगी सीधी बातचीत
प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प के बीच होने जा रही यह द्विपक्षीय मुलाकात ऐसे समय में हो रही है जब अंतरराष्ट्रीय जलक्षेत्र और व्यापारिक गलियारों में भारी उथल-पुथल मची हुई है। हाल ही के दिनों में होर्मुज जलडमरूमध्य और ओमान की खाड़ी के पास भारतीय क्रू मेंबर्स वाले कमर्शियल जहाजों पर हुए सैन्य हमलों और तीन भारतीय नाविकों की मौत के बाद दोनों देशों के बीच कूटनीतिक गर्माहट बढ़ी हुई है।
इस बैठक के दौरान पीएम मोदी अमेरिकी राष्ट्रपति के सामने भारतीय नाविकों की सुरक्षा का मुद्दा बेहद प्रमुखता से उठा सकते हैं। इसके साथ ही, हाल के दिनों में अमेरिका की तरफ से भारतीय सामानों पर लगाए गए नए टैरिफ और आर्थिक प्रतिबंधों से जुड़े जटिल मुद्दों पर भी दोनों नेताओं के बीच आमने-सामने बेहद गंभीर और सीधी बातचीत होने की पूरी संभावना है।
16 महीनों का लंबा अंतराल और नई दिल्ली से लेकर वाशिंगटन तक नजरें
दोनों शीर्ष नेताओं के बीच इससे पहले आखिरी बार आमने-सामने की विस्तृत मुलाकात करीब 16 महीने पहले हुई थी, जिसके बाद वैश्विक और क्षेत्रीय समीकरणों में काफी बड़े बदलाव आ चुके हैं। पश्चिम एशिया में जारी युद्ध की स्थिति और अमेरिका-ईरान के बीच संभावित शांति समझौते की सुगबुगाहट के बीच भारत और अमेरिका का एक साथ बैठना दुनिया की नई रणनीतिक दिशा तय कर सकता है।