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Iran Nuclear Secrets: हमले के डर से ईरान ने छिपाया 500 किलो बम ग्रेड यूरेनियम, अब निकालना लगभग नामुमकिन

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पश्चिम एशिया में जारी भारी सैन्य गतिरोध और अमेरिका-ईरान के बीच प्रस्तावित शांति वार्ताओं के बीच एक बेहद सनसनीखेज और चौंकाने वाला अंतरराष्ट्रीय खुलासा सामने आया है। अमेरिकी खुफिया एजेंसियों और अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी के सूत्रों के हवाले से दावा किया गया है कि ईरान ने अपने सबसे मूल्यवान और खतरनाक परमाणु जखीरे को पूरी तरह से सुरक्षित ठिकानों पर स्थानांतरित कर दिया है। इजरायल या अमेरिकी वायुसेना द्वारा उसके परमाणु प्रतिष्ठानों को नष्ट किए जाने के खौफ से तेहरान ने करीब 500 किलोग्राम अत्यधिक संवर्धित यानी बम ग्रेड यूरेनियम को पहाड़ों को काटकर बनाए गए अत्यंत गहरे भूमिगत बंकरों की गहराइयों में छिपा दिया है, जहां से इसे अब किसी भी सैन्य कार्रवाई या बाहरी दबाव के जरिए निकालना लगभग नामुमकिन माना जा रहा है।

​पांच परमाणु बम बनाने के काबिल 90% यूरेनियम को किया गया लॉक 
अंतरराष्ट्रीय परमाणु विशेषज्ञों और द वॉल स्ट्रीट जर्नल की हालिया रणनीतिक रिपोर्टों के अनुसार, ईरान द्वारा छिपाया गया यह 500 किलोग्राम यूरेनियम साधारण स्तर का नहीं बल्कि 90 प्रतिशत तक शुद्ध रूप से संवर्धित है। परमाणु विज्ञान के मानकों के मुताबिक, इस स्तर के यूरेनियम का इस्तेमाल केवल और केवल घातक परमाणु हथियार या एटम बम बनाने के लिए ही किया जाता है।

रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि 500 किलोग्राम की यह भारी-भरकम मात्रा कम से कम पांच विनाशकारी परमाणु बमों को बेहद कम समय में असेंबल करने के लिए पूरी तरह से पर्याप्त है। इस सामग्री को पूरी तरह सुरक्षित करके ईरान ने अपनी उस रणनीतिक क्षमता को हासिल कर लिया है, जिसके दम पर वह किसी भी समय खुद को एक घोषित परमाणु संपन्न देश के रूप में दुनिया के सामने पेश कर सकता है।

​फोर्डो और नतांज के अभेद्य बंकरों में कैद, बंकर बस्टर मिसाइलें भी बेअसर 
खुफिया इनपुट के मुताबिक, इस बेहद संवेदनशील सामग्री को नतांज और फोर्डो में स्थित ईरान के सबसे सुरक्षित और अभेद्य भूमिगत परमाणु केंद्रों के भीतर स्थानांतरित किया गया है। ये केंद्र सतह से सैकड़ों फीट नीचे पहाड़ों के भीतर ग्रेनाइट की मजबूत चट्टानों को काटकर बनाए गए हैं, जिन्हें कई परतों वाली कंक्रीट और स्टील की ढाल से सुरक्षित किया गया है।

रक्षा विशेषज्ञों का स्पष्ट कहना है कि इन बंकरों की गहराई और बनावट इतनी मजबूत है कि अमेरिका के सबसे शक्तिशाली “बंकर बस्टर” बम या इजरायल की आधुनिकतम मिसाइलें भी इन तक पहुंचकर इन्हें नष्ट करने में पूरी तरह असमर्थ हैं। यही वजह है कि पश्चिमी देश अब इस यूरेनियम को बलपूर्वक नष्ट करने या बाहर निकालने की उम्मीद लगभग छोड़ चुके हैं।

​आईएईए निरीक्षकों की पहुंच से बाहर और ट्रम्प-अरागची समझौते पर संकट 
यूरेनियम को इन गोपनीय और अभेद्य ठिकानों में बंद किए जाने के बाद अंतरराष्ट्रीय परमाणु ऊर्जा एजेंसी (IAEA) के निरीक्षकों की निगरानी और भौतिक पहुंच इस जखीरे तक पूरी तरह से खत्म हो गई है। यह घटनाक्रम ऐसे समय में सामने आया है जब अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रम्प और ईरान के विदेश मंत्री अब्बास अरागची के बीच पश्चिम एशिया संकट को सुलझाने के लिए एक दो-चरणीय कूटनीतिक शांति समझौते पर बातचीत चल रही है। ईरान ने अपनी शर्तों में साफ किया है कि वह अपने संवर्धित यूरेनियम को अपनी भौगोलिक सीमाओं से बाहर नहीं भेजेगा।

अब इस 500 किलो बम ग्रेड यूरेनियम के पूरी तरह से छिप जाने और सुरक्षित हो जाने के बाद, वाशिंगटन और इजरायल के लिए तेहरान पर दबाव बनाने के कूटनीतिक विकल्प बेहद सीमित हो गए हैं, जिससे इस पूरी शांति डील के भविष्य पर भी एक बड़ा प्रश्नचिह्न खड़ा हो गया है।

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