नई शिक्षा नीति 2020 के तहत केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड (CBSE) ने भाषा शिक्षा में बड़ा बदलाव किया है। अब सीबीएसई से संबद्ध स्कूलों में 9वीं और 10वीं कक्षा के विद्यार्थियों के लिए तीन भाषाओं का अध्ययन अनिवार्य होगा। यह नई व्यवस्था 1 जुलाई से लागू की जाएगी। इससे पहले बोर्ड ने अप्रैल से कक्षा 6 में भी तीन-भाषा फार्मूला लागू किया था।
सीबीएसई द्वारा जारी सर्कुलर के अनुसार, विद्यार्थियों को पढ़ाई जाने वाली तीन भाषाओं में से कम से कम दो भारतीय मूल की भाषाएं होना अनिवार्य होंगी। यदि कोई छात्र विदेशी भाषा का चयन करना चाहता है, तो वह उसे तीसरी भाषा के रूप में तभी चुन सकेगा, जब उसकी बाकी दो भाषाएं भारतीय हों। अन्यथा विदेशी भाषा को चौथी अतिरिक्त भाषा के रूप में पढ़ना होगा।
बोर्ड ने स्पष्ट किया है कि भाषा शिक्षा पूरी तरह से एनसीईआरटी के नए पाठ्यक्रम के अनुरूप होगी। भाषाओं को आर-1, आर-2 और आर-3 श्रेणियों में विभाजित किया गया है। इनमें तीसरी भाषा यानी आर-3 को लेकर विशेष प्रावधान किए गए हैं।
सबसे महत्वपूर्ण बात यह है कि 10वीं बोर्ड परीक्षा में तीसरी भाषा (आर-3) की कोई बोर्ड परीक्षा नहीं होगी। इसका मूल्यांकन पूरी तरह स्कूल स्तर पर आंतरिक रूप से किया जाएगा। यानी विद्यार्थियों को तीसरी भाषा का अध्ययन तो करना होगा, लेकिन उसके लिए अलग से बोर्ड परीक्षा नहीं देनी पड़ेगी।
फिलहाल 9वीं कक्षा के लिए आर-3 की पाठ्यपुस्तकें उपलब्ध नहीं हैं। ऐसे में 9वीं के छात्र अस्थायी रूप से 6वीं कक्षा की आर-3 पाठ्यपुस्तकों (संस्करण 2026-27) से अध्ययन करेंगे। बोर्ड ने जानकारी दी है कि नई किताबें जुलाई माह में उपलब्ध करा दी जाएंगी।
सीबीएसई ने स्कूलों को निर्देश दिया है कि वे 30 जून तक ओएसिस पोर्टल पर छठवीं से नौवीं कक्षा तक की तीसरी भाषा संबंधी जानकारी अपलोड करें। स्कूलों को यह भी बताना होगा कि उन्होंने किन भाषाओं का चयन किया है और प्रत्येक भाषा को पढ़ने वाले विद्यार्थियों की संख्या कितनी है।
नई व्यवस्था का उद्देश्य विद्यार्थियों को भारतीय भाषाओं और संस्कृति से जोड़ना तथा बहुभाषी शिक्षा को बढ़ावा देना है। शिक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि इससे छात्रों में भाषाई कौशल और सांस्कृतिक समझ दोनों का विकास होगा।