प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने अमेरिका और ईरान के बीच हुए शांति समझौते का स्वागत करते हुए इसे पश्चिम एशिया में शांति और स्थिरता की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम बताया है। सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर साझा किए गए अपने संदेश में प्रधानमंत्री ने उम्मीद जताई कि यह समझौता न केवल क्षेत्रीय तनाव को कम करेगा, बल्कि वैश्विक अर्थव्यवस्था और अंतरराष्ट्रीय व्यापार को भी मजबूती प्रदान करेगा।
प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि पश्चिम एशिया में लंबे समय से जारी संघर्ष का असर पूरी दुनिया पर पड़ा है। इससे वैश्विक सप्लाई चेन बाधित हुई, ऊर्जा बाजार में अस्थिरता आई और कई देशों को आर्थिक नुकसान उठाना पड़ा। उन्होंने कहा कि ऐसे समय में यह समझौता क्षेत्र में शांति स्थापित करने के साथ-साथ नौवहन और वाणिज्य की स्वतंत्रता सुनिश्चित करने में भी अहम भूमिका निभा सकता है।
प्रधानमंत्री ने यह भी कहा कि भारत इस समझौते के सकारात्मक परिणामों की आशा करता है और उन शेष मुद्दों पर आगे की बातचीत का स्वागत करता है, जिनका समाधान एक दीर्घकालिक और टिकाऊ समझौते तक पहुंचने के लिए आवश्यक है।
बताया जा रहा है कि 28 फरवरी से शुरू हुए इस तनावपूर्ण दौर के बाद अब अमेरिका और ईरान के बीच शांति प्रस्ताव पर सहमति बनी है। रिपोर्ट्स के अनुसार, इस समझौते पर 19 जून को जिनेवा में औपचारिक हस्ताक्षर किए जा सकते हैं। हालांकि, इस समझौते से जुड़ी कई जानकारियां अभी आधिकारिक रूप से स्पष्ट होना बाकी हैं।
इस घटनाक्रम का असर वैश्विक बाजारों पर भी तुरंत दिखाई दिया। अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में गिरावट दर्ज की गई, जिससे तेल आयातक देशों को राहत मिलने की उम्मीद बढ़ी है। भारतीय शेयर बाजार में भी सकारात्मक माहौल देखने को मिला और निवेशकों ने उत्साह के साथ कारोबार किया। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि क्षेत्र में स्थिरता बनी रहती है, तो इसका लाभ भारत जैसी उभरती अर्थव्यवस्थाओं को मिल सकता है।
भारत लंबे समय से पश्चिम एशिया में शांति, स्थिरता और संवाद आधारित समाधान का समर्थन करता रहा है। ऐसे में अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ता कूटनीतिक सहयोग भारत के रणनीतिक और आर्थिक हितों के लिए भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।