देश में महंगाई का दबाव लगातार बढ़ता जा रहा है। मई 2026 में थोक मूल्य सूचकांक (WPI) आधारित महंगाई बढ़कर 9.68 फीसदी पर पहुंच गई, जो अप्रैल में 8.26 फीसदी थी। यह लगातार आठवां महीना है जब थोक महंगाई में वृद्धि दर्ज की गई है। सरकार ने ये आंकड़े नई सीरीज के तहत जारी किए हैं, जिसमें 2022-23 को बेस ईयर बनाया गया है।
थोक महंगाई में सबसे बड़ा योगदान ईंधन और बिजली क्षेत्र का रहा। इस श्रेणी में महंगाई दर अप्रैल के 24.89 फीसदी से बढ़कर मई में 30.33 फीसदी पर पहुंच गई। खासतौर पर खनिज तेल की महंगाई 49.82 फीसदी तक पहुंच गई, जबकि कच्चे तेल और प्राकृतिक गैस की महंगाई बढ़कर 61.51 फीसदी हो गई है। इससे उत्पादन और परिवहन लागत पर अतिरिक्त दबाव बना है।
विशेषज्ञों का मानना है कि पश्चिम एशिया में जारी भू-राजनीतिक तनाव और अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की ऊंची कीमतों का सीधा असर भारत की अर्थव्यवस्था पर पड़ रहा है। भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयात करता है, इसलिए वैश्विक तेल कीमतों में उछाल का असर घरेलू बाजार में भी दिखाई देता है।
मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर में भी लागत बढ़ने के संकेत मिले हैं। WPI में सबसे अधिक हिस्सेदारी रखने वाले मैन्युफैक्चर्ड उत्पादों की महंगाई अप्रैल के 6.68 फीसदी से बढ़कर मई में 7.48 फीसदी हो गई। रसायन और केमिकल उत्पादों में 13.40 फीसदी, बेसिक मेटल्स में 12.30 फीसदी, इलेक्ट्रिकल उपकरणों में 11.32 फीसदी और टेक्सटाइल सेक्टर में 10.22 फीसदी महंगाई दर्ज की गई। रबर और प्लास्टिक उत्पादों की कीमतों में भी तेज बढ़ोतरी देखने को मिली है।
खाद्य महंगाई भी बढ़ती नजर आई। WPI फूड इंडेक्स अप्रैल के 3.11 फीसदी से बढ़कर मई में 4.49 फीसदी हो गया। खाद्य पदार्थों की महंगाई 3.60 फीसदी और प्रोसेस्ड फूड की महंगाई 6.14 फीसदी तक पहुंच गई है। इसका असर आम लोगों की रसोई पर भी पड़ सकता है।
इस बीच सरकार ने पहली बार प्रोड्यूसर प्राइस इंडेक्स (PPI) के आंकड़े भी जारी किए हैं। फिलहाल इसे परीक्षण आधार पर जारी किया गया है। हालांकि मई में मैन्युफैक्चरिंग क्षेत्र का PPI अपेक्षाकृत स्थिर रहा।
राहत की बात यह है कि सेवा क्षेत्र में महंगाई अभी नियंत्रण में बनी हुई है। बैंकिंग, पेंशन फंड और एयर पैसेंजर सेवाओं की लागत में गिरावट देखी गई, जबकि रेलवे यात्री सेवाओं और सिक्योरिटी ट्रांजैक्शन सेवाओं में मामूली बढ़ोतरी दर्ज की गई।
अर्थशास्त्रियों का मानना है कि यदि ईंधन और कच्चे माल की कीमतें इसी तरह बढ़ती रहीं, तो आने वाले महीनों में इसका असर खुदरा महंगाई (CPI) पर भी पड़ सकता है। ऐसे में भारतीय रिजर्व बैंक की मौद्रिक नीति और ब्याज दरों पर भी नजर बनी रहेगी।