छत्तीसगढ़ हाईकोर्ट ने पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल की चुनाव याचिका को निरस्त करने की मांग खारिज कर दी है। अदालत ने मामले की सुनवाई मेरिट के आधार पर जारी रखने का फैसला सुनाया है। हाईकोर्ट के इस निर्णय के बाद भूपेश बघेल ने कहा कि वह इसके खिलाफ सुप्रीम कोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे।
बालोद में मीडिया से चर्चा के दौरान भूपेश बघेल ने कहा, “मैं हाईकोर्ट के इस फैसले के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में अपील करूंगा।”
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, विजय बघेल ने भूपेश बघेल की विधायकी को चुनौती देते हुए चुनाव याचिका दायर की है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि वर्ष 2023 के विधानसभा चुनाव के दौरान प्रचार समाप्त होने की अवधि में पाटन क्षेत्र में रोड शो और रैली आयोजित कर चुनाव नियमों का उल्लंघन किया गया।
याचिकाकर्ता ने दावा किया है कि कथित उल्लंघन से जुड़े वीडियो साक्ष्य भी मौजूद हैं। आरोप है कि यह कार्रवाई लोक प्रतिनिधित्व अधिनियम की धारा 126 और आचार संहिता के प्रावधानों के खिलाफ थी।
अब हाईकोर्ट में इस मामले की नियमित सुनवाई होगी।
भूपेश बघेल ने पेश किए 16 बिंदु
सुनवाई के दौरान भूपेश बघेल की ओर से 16 बिंदुओं पर अपना पक्ष रखा गया। उनके वकीलों ने दलील दी कि:
- याचिका सुनवाई योग्य नहीं है।
- लगाए गए आरोपों के समर्थन में प्रत्यक्ष प्रमाण उपलब्ध नहीं हैं।
- आचार संहिता उल्लंघन के पर्याप्त साक्ष्य प्रस्तुत नहीं किए गए हैं।
इन्हीं आधारों पर याचिका खारिज करने की मांग की गई थी। हालांकि हाईकोर्ट ने मामले में सुनवाई के लिए पर्याप्त आधार मानते हुए आवेदन खारिज कर दिया।
पहले भी पहुंच चुके हैं सुप्रीम कोर्ट
यह पहला मौका नहीं है जब इस मामले को लेकर भूपेश बघेल सुप्रीम कोर्ट पहुंचे हों। इससे पहले भी हाईकोर्ट से राहत नहीं मिलने के बाद उन्होंने सुप्रीम कोर्ट का रुख किया था।
उस समय सुप्रीम कोर्ट ने उन्हें हाईकोर्ट में याचिका की मेंटेनेबिलिटी को लेकर नए सिरे से आवेदन प्रस्तुत करने की अनुमति दी थी। इसी निर्देश के तहत दायर आवेदन को अब हाईकोर्ट ने खारिज कर दिया है।
अब आगे क्या?
हाईकोर्ट द्वारा आवेदन खारिज किए जाने के बाद मामला अब नए कानूनी चरण में प्रवेश कर सकता है। यदि भूपेश बघेल सुप्रीम कोर्ट में अपील दायर करते हैं, तो शीर्ष अदालत इस बात पर विचार करेगी कि हाईकोर्ट का आदेश बरकरार रखा जाए या नहीं।
फिलहाल, चुनाव याचिका पर हाईकोर्ट में नियमित सुनवाई जारी रहेगी और इस मामले पर राजनीतिक नजरें टिकी रहेंगी।