दांतों की सफाई यानी डेंटल स्केलिंग को लेकर लोगों के मन में कई तरह की धारणाएं हैं। कुछ लोग मानते हैं कि दांतों की सफाई करवाने से दांत कमजोर हो जाते हैं, जबकि कुछ का कहना है कि इससे दांतों के बीच गैप बढ़ जाता है। इन धारणाओं के कारण कई लोग जरूरत होने के बावजूद डेंटिस्ट के पास जाने से बचते हैं। हालांकि डेंटिस्ट्स के अनुसार, दांतों की सफाई एक सामान्य और सुरक्षित प्रक्रिया है, जिसका उद्देश्य दांतों पर जमा प्लाक और टार्टर को हटाना होता है। अगर आपके मन में भी यह सवाल है कि स्केलिंग के बाद दांत कमजोर हो जाते हैं या नहीं, तो इसके पीछे की सच्चाई जानना जरूरी है।
क्या होती है दांतों की सफाई (स्केलिंग)?
स्केलिंग एक डेंटल प्रक्रिया है, जिसमें दांतों और मसूड़ों के आसपास जमा प्लाक, टार्टर और बैक्टीरिया को विशेष उपकरणों की मदद से साफ किया जाता है। यह सफाई सामान्य ब्रशिंग से नहीं हो पाती, इसलिए समय-समय पर इसकी जरूरत पड़ सकती है।
क्या स्केलिंग से दांत कमजोर हो जाते हैं?
विशेषज्ञों के मुताबिक, दांतों की सफाई से दांत कमजोर नहीं होते। दरअसल, दांतों पर जमा टार्टर एक कठोर परत बन जाता है। जब इसे हटाया जाता है तो कई लोगों को ऐसा महसूस होता है कि दांत पहले की तुलना में पतले या कमजोर हो गए हैं। लेकिन हकीकत में यह केवल जमा हुई गंदगी हटने का असर होता है।
सफाई के बाद संवेदनशीलता क्यों महसूस होती है?
स्केलिंग के बाद कुछ लोगों को ठंडा या गर्म खाने-पीने पर हल्की संवेदनशीलता महसूस हो सकती है। ऐसा इसलिए होता है क्योंकि लंबे समय से जमा टार्टर हटने के बाद दांतों की वास्तविक सतह सामने आती है। यह समस्या आमतौर पर कुछ दिनों में अपने आप कम हो जाती है।
क्या दांतों के बीच गैप बढ़ जाता है?
यह भी एक आम मिथक है। वास्तव में टार्टर कई बार दांतों के बीच की जगह को भर देता है। जब यह हटता है तो दांतों के बीच का प्राकृतिक गैप दिखाई देने लगता है। ऐसा नहीं है कि स्केलिंग से नया गैप बनता है।
दांतों की सफाई क्यों है जरूरी?
- मसूड़ों की बीमारियों का खतरा कम होता है।
- मुंह की बदबू दूर करने में मदद मिलती है।
- दांतों पर जमा पीलेपन और गंदगी को हटाया जा सकता है।
- दांत और मसूड़े लंबे समय तक स्वस्थ बने रहते हैं।
- ओरल हेल्थ बेहतर होती है।