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संपत्ति का ब्योरा नहीं देने वाले कर्मचारियों को राहत, लेकिन प्रमोशन और एसीपी पर रहेगी रोक

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उत्तर प्रदेश सरकार ने अपनी चल-अचल संपत्तियों का ऑनलाइन विवरण निर्धारित समय सीमा में जमा नहीं करने वाले सरकारी अधिकारियों और कर्मचारियों को आंशिक राहत देते हुए उनका रुका हुआ वेतन जारी करने का निर्णय लिया है। हालांकि, राज्य सरकार ने स्पष्ट कर दिया है कि इस राहत का अर्थ अनुशासनात्मक कार्रवाई से छूट नहीं होगा। मुख्य सचिव एसपी गोयल द्वारा जारी शासनादेश के अनुसार ऐसे कार्मिकों के प्रमोशन, एश्योर्ड करियर प्रोग्रेशन (एसीपी) और विजिलेंस क्लियरेंस पर फिलहाल रोक बनी रहेगी।

राज्य सरकार प्रशासनिक व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के लिए लंबे समय से अधिकारियों और कर्मचारियों की संपत्ति का विवरण ऑनलाइन दर्ज कराने पर जोर दे रही है। इसी उद्देश्य से सभी श्रेणी के सरकारी कर्मियों के लिए मानव संपदा पोर्टल पर अपनी चल-अचल संपत्तियों की जानकारी अपलोड करना अनिवार्य किया गया था।

शुरुआत में संपत्ति विवरण जमा करने की अंतिम तिथि 31 जनवरी निर्धारित की गई थी, लेकिन बड़ी संख्या में कर्मचारियों द्वारा जानकारी उपलब्ध नहीं कराए जाने के कारण सरकार ने इसे बढ़ाकर 10 मार्च 2026 कर दिया। इसके बावजूद 47 हजार से अधिक अधिकारी और कर्मचारी निर्धारित समय सीमा तक अपना विवरण जमा नहीं कर सके। इसके बाद शासन ने उनके जनवरी और फरवरी माह के वेतन पर रोक लगा दी थी।

अब मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ की मंशा के अनुरूप जारी नए शासनादेश में इन कर्मचारियों का रुका हुआ वेतन जारी करने का निर्णय लिया गया है। हालांकि, शासन ने यह भी स्पष्ट किया है कि यह फैसला केवल वेतन भुगतान तक सीमित है और संबंधित कर्मचारियों के खिलाफ विभागीय कार्रवाई पूर्ववत जारी रहेगी।

मुख्य सचिव एसपी गोयल के निर्देशानुसार ऐसे सभी अधिकारियों और कर्मचारियों के विरुद्ध विभागीय जांच की प्रक्रिया शुरू की जाएगी। साथ ही चालू चयन वर्ष के दौरान उनकी पदोन्नति पर विचार नहीं किया जाएगा। इसके अलावा उन्हें मिलने वाले एसीपी लाभों पर भी रोक रहेगी।

शासनादेश में यह भी कहा गया है कि जिन कर्मचारियों ने संपत्ति का विवरण समय पर नहीं दिया है, उन्हें विदेश यात्रा, प्रतिनियुक्ति या अन्य प्रशासनिक प्रक्रियाओं के लिए आवश्यक विजिलेंस अथवा गृह विभाग की क्लियरेंस भी नहीं मिलेगी। सरकार का मानना है कि यह कदम सरकारी तंत्र में जवाबदेही बढ़ाने और संपत्ति संबंधी जानकारी को पारदर्शी बनाने की दिशा में महत्वपूर्ण साबित होगा।

राज्य सरकार का यह फैसला एक ओर कर्मचारियों को वेतन भुगतान के मामले में राहत देता है, वहीं दूसरी ओर प्रशासनिक अनुशासन और पारदर्शिता के प्रति उसकी सख्त प्रतिबद्धता को भी दर्शाता है।

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