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वेदांता एल्युमीनियम की नई उड़ान: डीमर्जर के बाद स्वतंत्र कंपनी बनी, 60 लाख टन उत्पादन क्षमता का लक्ष्य

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रायपुर: वेदांता समूह के ऐतिहासिक डीमर्जर के बाद Vedanta Aluminium Metal Limited ने एक स्वतंत्र सूचीबद्ध कंपनी के रूप में अपनी नई शुरुआत की है। कंपनी अब NSE और BSE पर अलग इकाई के रूप में कारोबार कर रही है।

कंपनी का मानना है कि इस बदलाव से उसे रणनीतिक फैसले लेने में अधिक स्वतंत्रता मिलेगी और निवेशकों के लिए दीर्घकालिक मूल्य सृजन के नए अवसर खुलेंगे।

1 मई 2026 से लागू हुआ डीमर्जर

वेदांता समूह का डीमर्जर 1 मई 2026 से प्रभावी हुआ। इसके बाद वेदांता एल्युमीनियम मेटल लिमिटेड अब पूरी तरह एल्युमीनियम व्यवसाय पर केंद्रित स्वतंत्र कंपनी के रूप में काम कर रही है।

कंपनी का लक्ष्य वैश्विक एल्युमीनियम बाजार में अपनी स्थिति और मजबूत करना तथा उच्च विकास दर हासिल करना है।

60 लाख टन उत्पादन क्षमता का लक्ष्य

कंपनी ने आने वाले वर्षों में अपनी उत्पादन क्षमता बढ़ाकर 60 लाख टन प्रतिवर्ष (LTPA) तक पहुंचाने का लक्ष्य निर्धारित किया है।

मजबूत बैकवर्ड इंटीग्रेशन, स्वयं के कच्चे माल के स्रोत और लागत-कुशल संचालन के बल पर कंपनी दुनिया के सबसे कम लागत वाले एल्युमीनियम उत्पादकों में शामिल होने की दिशा में आगे बढ़ रही है।

बढ़ती वैश्विक मांग पर नजर

इन्फ्रास्ट्रक्चर, इलेक्ट्रिक वाहन, एयरोस्पेस, नवीकरणीय ऊर्जा और उन्नत विनिर्माण जैसे क्षेत्रों में एल्युमीनियम की मांग तेजी से बढ़ रही है।

वेदांता एल्युमीनियम का मानना है कि उसकी उत्पादन क्षमता और तकनीकी दक्षता इन उभरते क्षेत्रों की आवश्यकताओं को पूरा करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएगी।

सीईओ ने बताया विकास का नया अध्याय

कंपनी के सीईओ Rajesh Kumar ने कहा कि स्वतंत्र सूचीबद्ध कंपनी बनना संगठन की विकास यात्रा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है।

उन्होंने कहा कि एल्युमीनियम को भविष्य की धातु माना जाता है और कंपनी तकनीक, लागत दक्षता और टिकाऊ विकास के माध्यम से वैश्विक नेतृत्व हासिल करने के लिए प्रतिबद्ध है।

भारत के एल्युमीनियम उत्पादन में 50% योगदान

वेदांता एल्युमीनियम वर्तमान में भारत के कुल एल्युमीनियम उत्पादन में लगभग 50 प्रतिशत योगदान देती है।

कंपनी के प्रमुख परिचालन केंद्रों में शामिल हैं—

  • Lanjigarh Refinery में विश्व की सबसे बड़ी एल्यूमिना रिफाइनरियों में से एक।
  • Jharsuguda Smelter में दुनिया के सबसे बड़े एल्युमीनियम स्मेल्टर्स में से एक।
  • Bharat Aluminium Company Limited, कोरबा (छत्तीसगढ़)।

इसके अलावा कंपनी के पास अपने बॉक्साइट और कोयला संसाधन हैं तथा लगभग 4.5 गीगावाट की कैप्टिव बिजली उत्पादन क्षमता भी मौजूद है।

वैल्यू-एडेड उत्पादों पर बढ़ेगा फोकस

कंपनी अपने कुल उत्पाद पोर्टफोलियो में वैल्यू-एडेड प्रोडक्ट्स की हिस्सेदारी लगभग 90 प्रतिशत तक बढ़ाने की योजना पर काम कर रही है।

इससे न केवल लाभप्रदता बढ़ने की उम्मीद है बल्कि वैश्विक प्रतिस्पर्धा में भी मजबूती मिलेगी।

ESG और ग्रीन एल्युमीनियम पर जोर

वेदांता एल्युमीनियम पर्यावरण, सामाजिक और प्रशासनिक (ESG) मानकों को मजबूत करने पर भी फोकस कर रही है।

कंपनी भारत की पहली लो-कार्बन एल्युमीनियम श्रृंखला ‘Restora’ का विस्तार कर रही है। इसके साथ ही नवीकरणीय ऊर्जा, जल संरक्षण, जैव विविधता और रीसाइक्लिंग से जुड़े कई कार्यक्रम भी संचालित किए जा रहे हैं।

रोजगार और उद्योग को मिलेगा बढ़ावा

ओडिशा में विकसित किए जा रहे वेदांता एल्युमीनियम पार्क के जरिए MSME और डाउनस्ट्रीम उद्योगों को नई संभावनाएं मिलेंगी। इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार सृजन, लागत में कमी और औद्योगिक विकास को बढ़ावा मिलने की उम्मीद है।

कंपनी शिक्षा, स्वास्थ्य, महिला सशक्तिकरण और आजीविका संवर्धन से जुड़े सामाजिक कार्यक्रमों में भी लगातार निवेश कर रही है।

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