नई दिल्ली। केंद्र सरकार ने टेलीकॉम सेक्टर में बड़ा सुधार करते हुए नए नियम लागू कर दिए हैं। अब मोबाइल, इंटरनेट और कॉलिंग सेवाओं से जुड़ा भारतीय यूजर्स का पूरा डेटा देश के भीतर ही सुरक्षित रखा जाएगा। टेलीकॉम कंपनियां अब किसी भी भारतीय ग्राहक का डेटा विदेश में स्टोर या साझा नहीं कर सकेंगी।
दूरसंचार विभाग (DoT) की ओर से जारी नई गाइडलाइन का उद्देश्य डिजिटल सुरक्षा बढ़ाना, टेलीकॉम सेवाओं को सरल बनाना और उपभोक्ताओं की निजता को मजबूत करना है।
लाइसेंस प्रक्रिया हुई आसान, शुरू हुआ नया ऑनलाइन सिस्टम
सरकार ने वर्षों से चली आ रही जटिल लाइसेंस व्यवस्था की जगह नया ऑथराइजेशन सिस्टम लागू किया है। इसके साथ ही टेलीकॉम ई-सर्विसेज पोर्टल लॉन्च किया गया है, जहां कंपनियां ऑनलाइन आवेदन कर सकेंगी।
क्या होगा फायदा?
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- मंजूरी की प्रक्रिया पहले से तेज होगी।
- नई कंपनियां जल्दी सेवाएं शुरू कर सकेंगी।
- 5G और हाई-स्पीड ब्रॉडबैंड जैसी सुविधाएं तेजी से लोगों तक पहुंचेंगी।
- पूरी प्रक्रिया अधिक पारदर्शी बनेगी।
पुरानी कंपनियों को भी मिलेगी राहत
जिन टेलीकॉम कंपनियों के पास पहले से पुराने लाइसेंस हैं, वे चाहें तो नए ऑथराइजेशन सिस्टम में शामिल हो सकती हैं। इससे उन्हें भी जटिल कागजी प्रक्रियाओं से राहत मिलेगी और कामकाज आसान होगा।
ग्राहकों को मिल सकते हैं सस्ते प्लान
नए नियमों के तहत कंपनियां एक ही डिजिटल प्लेटफॉर्म से नेटवर्क और इंटरनेट सेवाओं के लिए आवेदन कर सकेंगी।
इसका असर
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- कंपनियों की लागत घटेगी।
- प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी।
- ग्राहकों को बेहतर और किफायती मोबाइल व इंटरनेट प्लान मिलने की संभावना बढ़ेगी।
सैटेलाइट इंटरनेट कंपनियों के लिए सख्त नियम
सरकार ने स्टारलिंक और अन्य सैटेलाइट इंटरनेट कंपनियों के लिए भी स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए हैं। भारत में सेवा देने वाली ऐसी कंपनियों को अपना मुख्य गेटवे भारत में ही स्थापित करना होगा।
फायदा
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- भारतीय यूजर्स का डेटा अधिक सुरक्षित रहेगा।
- राष्ट्रीय सुरक्षा को मजबूती मिलेगी।
- विदेशी कंपनियों द्वारा डेटा के दुरुपयोग की आशंका कम होगी।
अब भारत में ही रहेगा यूजर्स का डेटा
नई व्यवस्था के तहत सभी टेलीकॉम कंपनियों के लिए भारतीय ग्राहकों का डेटा, कॉल रिकॉर्ड, इंटरनेट लॉग और अन्य डिजिटल रिकॉर्ड देश के भीतर ही स्टोर करना अनिवार्य होगा।
इससे क्या बदलेगा?
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- डेटा विदेश नहीं भेजा जा सकेगा।
- प्राइवेसी और साइबर सुरक्षा मजबूत होगी।
- डेटा लीक और दुरुपयोग की संभावना कम होगी।
संवेदनशील क्षेत्रों में सुरक्षा व्यवस्था और मजबूत
जम्मू-कश्मीर, उत्तर-पूर्व सहित संवेदनशील इलाकों में नेटवर्क स्थापित करने से पहले कंपनियों को विशेष सुरक्षा मंजूरी लेनी होगी। साथ ही संदिग्ध गतिविधियों और साइबर अपराधों पर नजर रखने के लिए भी आवश्यक तकनीकी व्यवस्था करनी होगी।
इस कदम से साइबर फ्रॉड, फर्जी कॉल और देश विरोधी गतिविधियों पर प्रभावी नियंत्रण लगाने में मदद मिलने की उम्मीद है।