मध्य पूर्व के सबसे संवेदनशील और रणनीतिक समुद्री मार्ग ‘स्ट्रेट ऑफ होर्मुज’ में वैश्विक व्यापारिक जहाजों की सुरक्षा को लेकर अमेरिका और ईरान के बीच एक बार फिर सीधे युद्ध जैसी परिस्थितियां बन गई हैं। होर्मुज जलमार्ग से गुजर रहे एक कमर्शियल कार्गो शिप पर ईरानी सेना द्वारा किए गए हमले से बौखलाए अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप के प्रशासन ने शुक्रवार को एक अत्यंत आक्रामक और बड़ा सैन्य पलटवार किया है।
अमेरिकी वायुसेना के लड़ाकू विमानों ने ईरान की सीमाओं के भीतर घुसकर उसके कई संवेदनशील ठिकानों पर ताबड़तोड़ हवाई हमले किए। इस भीषण एयरस्ट्राइक में मुख्य रूप से ईरान की मिसाइल लॉन्चिंग साइट्स, आत्मघाती ड्रोन स्टोरेज डिपो और तटीय इलाकों में तैनात कोस्टल रडार सिस्टम को निशाना बनाकर पूरी तरह नेस्तनाबूद कर दिया गया है।
स्विट्जरलैंड में हुए नाजुक समझौते के बाद अमेरिका की पहली प्रत्यक्ष सैन्य कार्रवाई
यह सैन्य टकराव ऐसे समय में सामने आया है जब कुछ समय पहले ही स्विट्जरलैंड की मध्यस्थता में दोनों देशों के बीच एक नाजुक संघर्ष-विराम समझौता हुआ था। इस शांति समझौते के बाद से यह अमेरिका द्वारा ईरान के खिलाफ की गई पहली सीधी और प्रत्यक्ष सैन्य कार्रवाई मानी जा रही है।
इस हमले से ठीक पहले जब व्हाइट हाउस में पत्रकारों ने राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से पूछा था कि क्या अमेरिका कार्गो शिप पर हुए हमले का ईरानी एक्शन के जरिए जवाब देने की तैयारी कर रहा है, तो ट्रंप ने बेहद कड़े शब्दों में कहा था कि “आपको जल्द ही इसका पता चल जाएगा।” इसके तुरंत बाद अमेरिकी विमानों ने ईरान की धरती पर बमबारी शुरू कर दी, जिससे दोनों देशों के बीच हुई सीजफायर डील पूरी तरह टूटने की कगार पर पहुंच गई है।
ट्रंप ने किया बड़ा दावा, कहा—यह सीजफायर डील का मूर्खतापूर्ण उल्लंघन
सैन्य कार्रवाई के तुरंत बाद अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप ने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म ‘ट्रुथ सोशल’ पर एक के बाद एक कई पोस्ट कर इस हवाई हमले की पुष्टि की। ट्रंप ने दावा किया कि ईरान ने अंतरराष्ट्रीय नियमों को ताक पर रखकर रणनीतिक जलमार्ग से शांतिपूर्वक गुजर रहे जहाजों पर बेहद खतरनाक ‘वन-वे अटैक ड्रोन’ दागे थे।
ट्रंप ने ईरान के इस कदम को दोनों देशों के बीच हुए संघर्ष-विराम समझौते का बेहद मूर्खतापूर्ण और अक्षम्य उल्लंघन बताया। उन्होंने स्पष्ट किया कि अमेरिकी हितों और अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक मार्गों की सुरक्षा के लिए वे किसी भी हद तक जाने को तैयार हैं और ईरान को उसकी इस हिमाकत की भारी विधिक व सैन्य कीमत चुकानी होगी।
अमेरिकी सेंट्रल कमांड हाई अलर्ट पर, तेल आपूर्ति रूट पर बढ़ा संकट
इस बड़े हवाई हमले के बाद अमेरिकी सेंट्रल कमांड ने एक आधिकारिक प्रेस विज्ञप्ति जारी कर पूरे क्षेत्र की सुरक्षा स्थिति की जानकारी दी है। सेंटकॉम ने साफ कहा है कि अमेरिकी नौसेना और वायुसेना की टीमें पूरे खाड़ी क्षेत्र में मुस्तैदी के साथ तैनात हैं।
अमेरिकी सेना पूरी सतर्कता के साथ यह सुनिश्चित कर रही है कि ईरान के साथ हुए समझौते के सभी प्रावधानों का कड़ाई से पालन कराया जा सके और होर्मुज जलडमरूमध्य से गुजरने वाले सभी अंतरराष्ट्रीय व्यापारिक जहाजों की सुरक्षित आवाजाही में कोई बाधा न आए।
रक्षा विश्लेषकों का मानना है कि इस ताजा अमेरिकी हमले के बाद पूरे मिडिल ईस्ट में तनाव चरम पर पहुंच गया है, जिससे वैश्विक बाजार में कच्चे तेल की सप्लाई चेन बुरी तरह प्रभावित हो सकती है और आने वाले दिनों में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मंदी का खतरा और ज्यादा गहरा सकता है।