देश के ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आजीविका को मजबूत करने के उद्देश्य से केंद्र सरकार ने ‘विकसित भारत–रोजगार और आजीविका मिशन (ग्रामीण) अधिनियम, 2025’ (VB-G RAM G Act) को 1 जुलाई से लागू कर दिया है। नए कानून के लागू होने के साथ ही ग्रामीण रोजगार व्यवस्था में बड़ा बदलाव किया गया है। अब पात्र ग्रामीण परिवारों को एक वित्तीय वर्ष में 100 दिनों की जगह 125 दिनों के वेतनयुक्त रोजगार की कानूनी गारंटी मिलेगी।
ग्रामीण विकास मंत्रालय के अनुसार, राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों ने इस कानून को लागू करने के लिए आवश्यक प्रशासनिक और तकनीकी तैयारियां पूरी कर ली हैं।
अब 125 दिनों तक मिलेगा रोजगार
नए कानून के तहत प्रत्येक पात्र ग्रामीण परिवार को साल में 125 दिनों तक रोजगार उपलब्ध कराया जाएगा। इससे पहले मनरेगा के तहत अधिकतम 100 दिनों के रोजगार की व्यवस्था थी। नई व्यवस्था के बाद ग्रामीण मजदूरों को 25 अतिरिक्त दिनों का रोजगार मिलने का रास्ता साफ हो गया है।
केंद्र ने जारी किया 95 हजार करोड़ रुपये से अधिक का बजट
योजना के प्रभावी संचालन और समय पर मजदूरी भुगतान सुनिश्चित करने के लिए केंद्र सरकार ने राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को 95,692.31 करोड़ रुपये का अंतरिम बजटीय आवंटन जारी किया है।
सरकारी जानकारी के अनुसार, अधिकांश राज्यों ने इस योजना के लिए वित्तीय प्रावधान कर लिए हैं और कई राज्यों ने इसकी आधिकारिक अधिसूचना भी जारी कर दी है।
“कोई भी मजदूर बिना काम के न रहे”
केंद्रीय ग्रामीण विकास मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि योजना का क्रियान्वयन पूरी पारदर्शिता और समयबद्ध तरीके से किया जाए। उन्होंने कहा कि प्राथमिकता यह होनी चाहिए कि कोई भी पात्र ग्रामीण श्रमिक रोजगार से वंचित न रहे।
2 जुलाई को होगा राष्ट्रीय शुभारंभ
इस योजना का राष्ट्रीय शुभारंभ 2 जुलाई को आंध्र प्रदेश के तिरुपति जिले के मुक्कावारिपल्ली गांव से किया जाएगा। इस दौरान पात्र लाभार्थियों को नए ग्रामीण रोजगार गारंटी कार्ड भी वितरित किए जाएंगे।
पुराने जॉब कार्ड फिलहाल रहेंगे मान्य
ग्रामीण विकास मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि जब तक सभी पात्र लाभार्थियों को नए रोजगार गारंटी कार्ड जारी नहीं हो जाते, तब तक e-KYC सत्यापित पुराने जॉब कार्ड पूरी तरह मान्य रहेंगे। इससे श्रमिकों के रोजगार पर किसी प्रकार का असर नहीं पड़ेगा।
ग्रामीण विकास पर रहेगा विशेष फोकस
नई योजना के तहत प्राकृतिक संसाधन संरक्षण, जल संरक्षण, जल संचयन, कृषि सुधार, ग्रामीण आधारभूत संरचना के विकास तथा महिला स्वयं सहायता समूहों को बढ़ावा देने जैसे कार्यों को प्राथमिकता दी जाएगी। ग्राम पंचायतों को इस योजना के प्रभावी क्रियान्वयन की मुख्य जिम्मेदारी सौंपी गई है।