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डीजीपी कॉन्फ्रेंस में पीएम ने दिया था निर्देश:थाने गोद लेंगे आईपीएस अफसर मगर 6 माह में किसी ने नहीं लिया

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पिछले वर्ष नवा रायपुर में आयोजित 60वीं अखिल भारतीय डीजीपी-आईजीपी कॉन्फ्रेंस में प्रधानमंत्री ने सभी आईपीएस अधिकारियों को एक-एक थाना गोद लेने का निर्देश दिया था, ताकि थानों की कार्यप्रणाली में सुधार हो और उन्हें स्मार्ट व डिजिटल बनाया जा सके। इसका उद्देश्य था कि वरिष्ठ अधिकारी सीधे मॉनिटरिंग कर सिस्टम में बदलाव लाएं।

हालांकि इस पहल पर अब तक नया नहीं हो पाया है। कॉन्फ्रेंस के छह माह बाद भी एक भी थाना किसी आईपीएस अधिकारी ने गोद नहीं लिया है। इससे स्पष्ट है कि पुलिसिंग को हाईटेक और जवाबदेह बनाने की कवायद कागजों तक ही सीमित रह गई है, जबकि छत्तीसगढ़ में इसे प्राथमिकता के साथ लागू किया जाना था।

जानकारी के अनुसार पंजाब और राजस्थान जैसे राज्यों में यह व्यवस्था शुरू हो चुकी है। पुलिस अधिकारियों का कहना है कि इस दिशा में कवायद जारी है। राज्य में थानों की संख्या अधिक होने और आईपीएस अधिकारियों की कमी को देखते हुए राज्य पुलिस सेवा के अधिकारियों को भी इसमें शामिल किया जाएगा। एएसपी और डीएसपी रैंक के अधिकारियों को भी थाने गोद देकर उन्हें मॉडल थाना बनाने की जिम्मेदारी सौंपी जाएगी।

राजस्थान: 10 साल के अनुभवी अधिकारियों को दी जिम्मेदारी

राजस्थान के डीजीपी राजीव शर्मा ने बताया कि पुलिसिंग में कम से कम 10 वर्ष का अनुभव रखने वाले अधिकारियों को थानों की जिम्मेदारी सौंपी जा रही है। फिलहाल राज्य के 103 आईपीएस अधिकारियों को यह जिम्मेदारी दी गई है। जल्द ही एएसपी और डीएसपी स्तर के अधिकारियों को भी इसमें शामिल किया जाएगा।

जुलाई से ये अधिकारी अपने-अपने थानों में कार्यभार संभालेंगे। इस पहल में मुख्य रूप से बेसिक पुलिसिंग, थाने की व्यवस्थाओं में सुधार, बीट पुलिसिंग, कम्युनिटी पुलिसिंग, लंबित अपराधों के निपटारे और हाईटेक पुलिसिंग पर फोकस किया जाएगा।

बीट पुलिसिंग पर जोर, वर्किंग होगी स्मार्ट इस योजना का मुख्य उद्देश्य बीट पुलिसिंग को मजबूत करना है। इससे क्षेत्र में संदिग्ध गतिविधियों, नए लोगों की एंट्री और अपराधियों की निगरानी आसान होगी। साथ ही पुलिस-जन संवाद बेहतर होगा। सामुदायिक पुलिसिंग पर जोर दिया जाएगा।

थानों के रिकॉर्ड और मालखाने होंगे व्यवस्थित गोद लिए गए थानों में रिकॉर्ड का संधारण, मालखानों का आधुनिकीकरण और लंबित मामलों का निपटारा प्राथमिकता में रहेगा। शिकायतों के समाधान और स्टाफ की जिम्मेदारी तय करने पर भी फोकस किया जाएगा।

कार्रवाई से ज्यादा सजा पर जोर:

पुलिस आमतौर पर कार्रवाई पर ज्यादा जोर देती है, लेकिन अब कार्रवाई के साथ सजा सुनिश्चित करने पर भी ध्यान देना होगा। किसी भी मामले में लिखा-पढ़ी से लेकर गवाही और सुनवाई तक सतत निगरानी जरूरी है।

जल्द लागू होगा नया सिस्टम पुलिस अधिकारियों को थाना गोद देने की प्रक्रिया जारी है। शासन स्तर पर इसे जल्द लागू किया जाएगा। राज्य में आईपीएस के साथ राज्य पुलिस सेवा के अधिकारियों को भी जिम्मेदारी दी जाएगी। अरुणदेव गौतम, डीजीपी छत्तीसगढ़

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