सेल-भिलाई इस्पात संयंत्र के कोक ओवन एवं कोल केमिकल्स विभाग के सीसीडी-3, यूनिट-500 में दिनांक 08 जुलाई 2026 को राष्ट्रीय आपदा मोचन बल (एनडीआरएफ), राज्य आपदा मोचन बल (एसडीआरएफ), केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (सीआईएसएफ), अग्निशमन सेवाएं तथा भिलाई इस्पात संयंत्र के विभिन्न विभागों की सहभागिता से संयुक्त आपदा प्रबंधन मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया। इस अभ्यास का उद्देश्य कोक ओवन गैस रिसाव जैसी आपातकालीन परिस्थितियों में विभिन्न एजेंसियों की तत्परता, समन्वय एवं बचाव क्षमता का परीक्षण करना था।
मॉक ड्रिल के दौरान यूनिट-500 के स्क्रबर क्षेत्र में अमोनिया स्क्रबर गैस बायपास वाल्व से कोक ओवन गैस रिसाव की काल्पनिक स्थिति तैयार की गई। परिदृश्य के अनुसार हाइड्रोजन सल्फाईड स्क्रबर आउटलेट गैस लाइन में रिसाव की मरम्मत के लिए ब्लैंकिंग कार्य किया जा रहा था। इसी दौरान बायपास वाल्व के पूर्णतः आइसोलेट नहीं होने के कारण कार्बन मोनोऑक्साइड गैस कार्यस्थल पर फैल गई। निर्धारित परिदृश्य के अनुसार कार्य में लगे आठ श्रमिकों में से सात श्रमिक गैस के संपर्क में आने से प्रभावित होकर विभिन्न स्थानों पर अचेत हो गए।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए उप महाप्रबंधक (सीसीडी) श्री जी. पी. पटेल ने तत्काल आपातकाल की घोषणा करते हुए प्रभावित क्षेत्र को खाली कराया तथा बचाव कार्य प्रारंभ करने के निर्देश दिए। इसके पश्चात महाप्रबंधक (सीसीडी) एवं इंसिडेंट कंट्रोलर श्री आनंद शुक्ला ने घटनास्थल पर पहुंचकर बचाव कार्यों का नेतृत्व संभाला। वहीं मुख्य महाप्रबंधक (कोक ओवन एवं कोल केमिकल्स) एवं चीफ इंसिडेंट कंट्रोलर श्री तुलाराम बेहरा ने संपूर्ण राहत एवं बचाव अभियान की निगरानी करते हुए सभी सहभागी एजेंसियों के बीच प्रभावी समन्वय सुनिश्चित किया।
मॉक ड्रिल के दौरान प्रभावित क्षेत्र को तत्काल सील कर अनावश्यक कर्मियों को सुरक्षित स्थान पर भेजा गया। एनडीआरएफ, एसडीआरएफ तथा भिलाई इस्पात संयंत्र के अग्निशमन दल ने सेल्फ कंटेन्ड ब्रीदिंग अपरेटस (एससीबीए) से लैस होकर प्रभावित क्षेत्र में प्रवेश किया तथा सभी अचेत श्रमिकों को सुरक्षित बाहर निकालकर प्राथमिक उपचार केंद्र पहुंचाया। इसके साथ ही प्लांट कंट्रोल, मुख्य चिकित्सा पोस्ट, गैस सुरक्षा विभाग, सीआईएसएफ, पर्यावरण प्रबंधन, सिविल डिफेंस तथा मानव संसाधन विकास विभाग सहित अन्य सहयोगी इकाइयों ने भी संयंत्र की आपदा प्रबंधन योजना के अनुरूप अपने दायित्वों का प्रभावी निर्वहन किया।
बचाव अभियान पूर्ण होने के उपरांत पोर्टेबल गैस डिटेक्टर एवं गैस एनालाइजर की सहायता से ऑक्सीजन एवं कार्बन मोनोऑक्साइड की मात्रा का परीक्षण किया गया। गैस स्तर सुरक्षित सीमा में पाए जाने के बाद क्षेत्र को सामान्य परिचालन के लिए सुरक्षित घोषित किया गया।
मॉक ड्रिल का अवलोकन कार्यपालक निदेशक (सामग्री प्रबंधन) श्री ए. के. चक्रवर्ती, डीआईजी (सीआईएसएफ) श्री एन. एन. त्रिपाठी, मुख्य महाप्रबंधक (पीपीसी) श्री पी. आर. भल्ला, मुख्य महाप्रबंधक (कोक ओवन एवं कोल केमिकल्स) श्री तुलाराम बेहरा, मुख्य महाप्रबंधक (सुरक्षा एवं अग्निशमन सेवाएं) श्री देबदत्त सतपथी, मुख्य महाप्रबंधक (ईएमडी) श्री पी वी वी एस मूर्थी, महाप्रबंधक प्रभारी (सुरक्षा अभियांत्रिकी विभाग) श्री एस. के. अग्रवाल, मुख्य अग्निशमन अधिकारी श्री बी. के. महापात्र, एनडीआरएफ के निरीक्षक श्री एन. के. प्रधान तथा एसडीआरएफ के टीम लीडर श्री ईश्वर खरे सहित भिलाई इस्पात संयंत्र के अनेक वरिष्ठ अधिकारियों ने किया। सभी अतिथियों ने संयुक्त बचाव अभियान की सराहना करते हुए आपदा प्रबंधन व्यवस्था को और अधिक सुदृढ़ बनाने के लिए महत्वपूर्ण सुझाव दिए।
मॉक ड्रिल के सफल समापन के पश्चात मानव संसाधन विकास विभाग (एचआरडीडी) में कार्यपालक निदेशक (संकार्य) श्री राकेश कुमार की अध्यक्षता में पोस्ट मॉक ड्रिल समीक्षा बैठक आयोजित की गई। बैठक में मुख्य महाप्रबंधक (पीपीसी) श्री पी. आर. भल्ला तथा मुख्य महाप्रबंधक (कोक ओवन एवं कोल केमिकल्स) श्री तुलाराम बेहरा सहित सभी सहभागी एजेंसियों एवं पर्यवेक्षकों ने अभ्यास के दौरान प्राप्त अनुभव, श्रेष्ठ कार्यप्रणालियों तथा भविष्य में सुधार की संभावनाओं पर अपने सुझाव प्रस्तुत किए। बैठक के समापन अवसर पर श्री राकेश कुमार ने सभी सहभागी एजेंसियों के समन्वय, व्यावसायिक दक्षता एवं प्रतिबद्धता की सराहना की। अंत में मुख्य महाप्रबंधक (सुरक्षा एवं अग्निशमन सेवाएं) श्री देबदत्त सतपथी ने आभार ज्ञापित किया।
इस संयुक्त मॉक ड्रिल के सफल आयोजन एवं समन्वय में डीएसओ एवं महाप्रबंधक (कोक ओवन एवं कोल केमिकल्स) श्री बी. सी. मंडल, महाप्रबंधक (सुरक्षा अभियांत्रिकी विभाग) श्री पी. एम. राजेंद्र कुमार तथा सहायक प्रबंधक (सुरक्षा अभियांत्रिकी विभाग) श्री अखिल मिश्रा की महत्वपूर्ण भूमिका रही। विभागीय सुरक्षा अधिकारियों एवं सेफ्टी वॉरियर्स के सक्रिय सहयोग से यह अभ्यास सफलतापूर्वक संपन्न हुआ।