रायपुर। छत्तीसगढ़ में पहली कक्षा में प्रवेश को लेकर स्कूल शिक्षा विभाग ने बड़ा फैसला लिया है। विभाग ने स्पष्ट कर दिया है कि अब प्रदेश के सभी सरकारी, अशासकीय और मान्यता प्राप्त स्कूलों में पहली कक्षा में प्रवेश के लिए बच्चे की न्यूनतम आयु 6 वर्ष होना अनिवार्य होगी। यह नया नियम राज्य के सभी स्कूलों में समान रूप से लागू किया जाएगा।
स्कूल शिक्षा विभाग के अनुसार, इस निर्णय का उद्देश्य राष्ट्रीय शिक्षा नीति (NEP-2020) और शिक्षा के अधिकार (RTE) के प्रावधानों के अनुरूप बच्चों को उचित आयु में विद्यालयी शिक्षा उपलब्ध कराना है। विभाग का मानना है कि 6 वर्ष की आयु में बच्चे मानसिक, शारीरिक और सामाजिक रूप से पहली कक्षा की पढ़ाई के लिए अधिक तैयार होते हैं।
6 वर्ष की आयु पूरी करने वाले बच्चों को मिलेगा प्रवेश
नई व्यवस्था लागू होने के बाद अब ऐसे बच्चों को ही पहली कक्षा में प्रवेश मिलेगा, जिन्होंने निर्धारित तिथि तक 6 वर्ष की आयु पूरी कर ली होगी। इससे पहले कई स्कूलों में अलग-अलग आयु मानकों के आधार पर प्रवेश दिए जाने की स्थिति थी, लेकिन अब पूरे प्रदेश में एक समान नियम लागू रहेगा।
विभाग ने अभिभावकों से की अपील
स्कूल शिक्षा विभाग ने सभी जिला शिक्षा अधिकारियों, विकासखंड शिक्षा अधिकारियों तथा स्कूल प्रबंधन को निर्देश जारी करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है, ताकि आगामी शैक्षणिक सत्र से प्रवेश प्रक्रिया निर्धारित आयु सीमा के अनुसार ही संचालित की जा सके। विभाग ने अभिभावकों से भी अपील की है कि वे अपने बच्चों का प्रवेश कराते समय आयु संबंधी नियमों का पालन करें और आवश्यक दस्तावेज साथ रखें।
शिक्षा विशेषज्ञों ने दी अपनी राय
शिक्षा विशेषज्ञों का कहना है कि सही आयु में पहली कक्षा में प्रवेश मिलने से बच्चों की सीखने की क्षमता बेहतर होती है और आगे की पढ़ाई में उन्हें अनावश्यक दबाव का सामना नहीं करना पड़ता। इससे पूरे राज्य में प्रवेश प्रक्रिया अधिक पारदर्शी और एकरूप भी बनेगी। अब यह नया नियम प्रदेश के सभी सरकारी, अनुदान प्राप्त, निजी एवं अन्य मान्यता प्राप्त स्कूलों में लागू होगा और पहली कक्षा में प्रवेश के लिए 6 वर्ष की न्यूनतम आयु अनिवार्य मानी जाएगी।