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निजी विवि खोलना अब आसान : करोड़ों रुपए जमा करने, 25 एकड़ जमीन की अनिवार्यता भी खत्म

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रायपुर। प्रदेश में निजी विवि के स्थापना संबंधित नियम जल्द ही बदलने वाले हैं। नवीन विवि की स्थापना के लिए अनिवार्य भूमि सहित निर्धारित राशि में भी छूट की तैयारी है। दो दिन पहले सीएम विष्णुदेव साय की अध्यक्षता में हुई कैबिनेट की बैठक में निजी विश्वविद्यालय (स्थापना एवं संचालन) (संशोधन) विधेयक, 2026 के प्रारूप का अनुमोदन किया गया है।

इस विधेयक में कई तरह के प्रावधान किए गए हैं। नए नियमों के हिसाब से अब नए विश्वविद्यालय के लिए विन्यास निधि के रूप में अनुसूचित क्षेत्र के लिए 3 करोड़ और सामान्य क्षेत्र के लिए 5 करोड़ की राशि का प्रावधान समाप्त होगा। इसके साथ ही नए विश्वविद्यालय के लिए 25 एकड़ जमीन की अनिवार्यता भी समाप्त हो जाएगी।

राज्य में गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा संस्थानों की स्थापना
भारत सरकार के मंत्रिमंडल सचिवालय के विनियमन प्रकोष्ठ की अनुशंसाओं के अनुरूप निजी विश्वविद्यालयों की स्थापना संबंधी प्रावधानों को अधिक व्यावहारिक, गुणवत्तापूर्ण और समकालीन बनाने के लिए ये बदलाव किए जा रहे हैं। अधिकारियों का मानना है कि इसके तहत निजी विश्वविद्यालय की स्थापना के लिए विन्यास निधि के स्थान पर रक्षित निधि का प्रावधान लागू करने से अध्ययनरत छात्र-छात्राओं के भविष्य को संवारने के लिए आवश्यक उपाय सुनिश्चित किए जा सकेंगे। इस संशोधन से राज्य में गुणवत्तापूर्ण उच्च शिक्षा संस्थानों की स्थापना को प्रोत्साहन मिलेगा।

प्रदेश में 15 शासकीय व 19 निजी विवि
छत्तीसगढ़ में शासकीय विश्वविद्यालयों से अधिक संख्या निजी विश्वविद्यालयों की है। प्रदेश में 15 शासकीय विवि हैं, जबकि निजी विवि 19 हैं। निजी विश्वविद्यालयों में डॉ. सी.व्ही. रमन विवि, मैट्स विवि, कलिंगा विवि, एमिटी विवि, ओपी जिंदल विवि, श्री रावतपुरा सरकार विवि, केके मोदी विवि, देव संस्कृति विवि, श्री शंकराचार्य प्रोफेशनल यूनिवर्सिटी, भारती विवि, आंजनेय विवि भारती विवि, आंजनेय विवि, दावड़ा विवि, रुंगटा विवि आदि शामिल हैं। शैक्षणिक सत्र 2026-27 के लिए निजी व शासकीय दोनों ही विश्वविद्यालयों में दाखिले प्रारंभ हो गए हैं। ऐसे में यह राहत अगले शैक्षणिक सत्र से ही निजी विश्वविद्यालयों को मिल सकेगी।

राज्य सरकार का नियम समाप्त
उच्च पदस्थ सूत्रों की मानें तो राज्य सरकार ने यह बड़ा बदलाव करने के लिए विश्वविद्यालय की स्थापना संबंधी राज्य सरकार के नियम को हटा दिया है। इसकी जगह अब केंद्र का नियम लागू होगा। यही नहीं अब निजी विश्वविद्यालयों को प्रति विद्यार्थी फीस की एक प्रतिशत राशि सरकार के पास जमा करनी होगी। इसमें आधारभूत अधोसंरचना, पुस्तकालय एवं अन्य सुविधाओं को यूजीसी एवं सक्षम नियामक संस्थाओं के मानकों के अनुरूप सुनिश्चित करने का प्रावधान किया गया है।

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