नवापारा। छत्तीसगढ़ के नवापारा में महानदी में शनिवार दोपहर घटी एक दर्दनाक घटना ने पूरे शहर को गहरे सदमे में डाल दिया। मानवता की मिसाल पेश करते हुए 32 वर्षीय प्रदीप कश्यप ने डूब रहे दो मासूम बच्चों की जान तो बचा ली, लेकिन स्वयं नदी की तेज धारा में समा गया। देर रात तक चले तलाश अभियान के बाद रविवार सुबह गोताखोरों ने उसका शव बरामद कर लिया। शव मिलने की खबर फैलते ही पूरे शहर में शोक की लहर दौड़ गई।
महानदी में नहाने गया था मृतक
मिली जानकारी के अनुसार, शनिवार दोपहर लगभग दो बजे प्रदीप कश्यप अपनी पत्नी के साथ महानदी में नहाने गया था। उसकी पत्नी नदी किनारे कपड़े धो रही थी। इसी दौरान उनकी नजर दो छोटे बच्चों पर पड़ी, जो नहाते-नहाते गहरे पानी में चले गए और डूबने लगे। बच्चों की जान पर बन आई थी। यह दृश्य देखते ही प्रदीप बिना एक पल गंवाए नदी में कूद पड़ा।
नदी में डूब रहे बच्चों के लिए फरिश्ता बनकर पहुंचा प्रदीप
प्रदीप ने अपनी जान की परवाह किए बिना दोनों बच्चों तक पहुंचकर उन्हें सुरक्षित बाहर निकाल दिया। बच्चों की जान तो बच गई, लेकिन इस दौरान वह स्वयं गहरे पानी और तेज बहाव की चपेट में आ गया। देखते ही देखते वह नदी में लापता हो गया। कुछ ही क्षणों में खुशियां मातम में बदल गईं।
देर रात तक चला प्रदीप की तलाश का अभियान
घटना की जानकारी मिलते ही पारा मोहल्ला सहित आसपास के क्षेत्रों के बड़ी संख्या में लोग महानदी तट पर पहुंच गए। देखते ही देखते नदी किनारे लोगों की भारी भीड़ जमा हो गई। सूचना मिलने पर पुलिस भी तत्काल मौके पर पहुंची। एसआई अरुण साहू के नेतृत्व में पुलिस टीम ने राहत एवं बचाव कार्य शुरू कराया। रायपुर से विशेष गोताखोर दल को बुलाया गया, जिसने देर रात तक नदी में लगातार खोजबीन की, लेकिन अंधेरा होने और पानी की स्थिति प्रतिकूल होने के कारण सफलता नहीं मिल सकी।
कड़ी मशक्कत के बाद मिला प्रदीप का शव
रविवार सुबह होते ही गोताखोरों ने दोबारा खोज अभियान शुरू किया। कई घंटों की मशक्कत के बाद आखिरकार प्रदीप कश्यप का शव महानदी से बरामद कर लिया गया। शव मिलते ही मौके पर मौजूद परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल हो गया। पूरे क्षेत्र में मातम पसर गया और हर किसी की जुबान पर प्रदीप के साहस और त्याग की चर्चा होने लगी।
निस्वार्थ सेवा की मिसाल बन गई उसकी कुर्बानी
स्थानीय नागरिकों का कहना है कि, प्रदीप ने जिस बहादुरी और निस्वार्थ भाव से दो मासूमों की जान बचाई, वह हमेशा याद रखा जाएगा। उसने यह साबित कर दिया कि मानवता सबसे बड़ा धर्म है। हालांकि उसकी असमय मृत्यु ने परिवार ही नहीं, पूरे नवापारा शहर को गमगीन कर दिया है।
महानदी घाटों की सुरक्षा पर उठे सवाल
इस हृदयविदारक घटना ने एक बार फिर महानदी में सुरक्षा व्यवस्था, खतरनाक घाटों पर चेतावनी बोर्ड, बैरिकेडिंग तथा प्रशिक्षित लाइफगार्ड की आवश्यकता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बरसात के मौसम में नदी का जलस्तर और बहाव तेजी से बदलता है, ऐसे में प्रशासन द्वारा अतिरिक्त सुरक्षा उपाय किए जाना समय की मांग है, ताकि भविष्य में ऐसी दुखद घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो।