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धान बुवाई में पकड़ी रफ़्तार : अच्छी बारिश के बाद भी कई जिलों में लक्ष्य से पीछे खेती

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रायपुर। छत्तीसगढ़ में पिछले कुछ दिनों की अच्छी बारिश के बाद खरीफ फसलों की बोनी में तेजी आई है। हालांकि मानसून की शुरुआती सुस्ती का असर अब भी कई जिलों में दिखाई दे रहा है और धान की रोपाई व अन्य खरीफ फसलों की बुवाई लक्ष्य से पीछे चल रही है। राज्य में सर्वाधिक बोनी धान की हो रही है, जबकि मक्का, दलहन और तिलहन की बुवाई भी तेज हुई है।  कृषि विभाग का मानना है कि, अगले एक सप्ताह तक अच्छी बारिश जारी रही, तो बोनी का रकबा तेजी से बढ़ेगा और अधिकतर जिले लक्ष्य के करीब पहुंच जाएंगे।

मानसून की देर और शुरुआती बारिश की कमी के कारण सरगुजा, बलरामपुर, सूरजपुर, जशपुर, कोरिया, मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर, गौरेला-पेंड्रा-मरवाही, कबीरधाम, बेमेतरा, राजनांदगांव तथा खैरागढ़-छुईखदान-गंडई जैसे जिलों में बोनी अपेक्षाकृत पिछड़ी हुई है। इन क्षेत्रों में किसान पर्याप्त वर्षा का इंतजार कर रहे हैं। मौसम में सुधार के बाद राज्य का वर्षा घटकर सामान्य श्रेणी के करीब पहुंच गया है, जिससे कृषि विभाग को उम्मीद है कि जुलाई के दूसरे पखवाड़े में बोनी का रकबा तेजी से बढ़ेगा और खरीफ सीजन की भरपाई हो सकेगी।

अर्ली वेरायटी के किस्मों का चयन करें
कृषि विभाग द्वारा किसानों को कम एवं मध्यम अवधि में पकने वाली फसलों एवं किस्मों का चयन करने की सलाह दी गई है, ताकि वर्षा की अनिश्चितता का प्रभाव कम किया जा सके। धान की खेती में रोपा पद्धति के बजाय धान की सीधी बुवाई को प्राथमिकता देने पर विशेष जोर दिया गया है। इस तकनीक से 20 प्रतिशत पानी की बचत होती है, प्रति एकड़ लगभग 5,000 रुपये की लागत कम आती है तथा फसल 12 से 15 दिन पहले तैयार हो जाती है।

बुवाई से बीज उपचार की सलाह
किसानों को बुवाई से पहले बीज उपचार अनिवार्य रूप से करने की सलाह दी गई है। यदि 15 जुलाई तक अंकुरण नहीं होता है, तो किसानों को पुनः बुवाई करते समय सामान्य बीज दर की तुलना में 10 प्रतिशत अधिक बीज उपयोग करने की सलाह दी गई है। साथ ही जुलाई के अंत तक मूंग एवं उड़द की बुवाई तथा अगस्त में तिल सूरजमुखी एवं मध्यम अवधि वाली अरहर की बुवाई करने का सुझाव दिया गया है।

20 प्रतिशत से अधिक बोनी
प्रदेश में मानसून की दस्तक के साथ ही खेती किसानी का कार्य तेजी के साथ शुरू हो गया है। राज्य में अब तक की स्थिति में लक्ष्य का 20 प्रतिशत से अधिक बोनी हो चुकी है। इस खरीफ सीजन में 48.69 लाख हेक्टेयर क्षेत्र में बोनी का लक्ष्य निधारित किया गया है।

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