रायपुर। छत्तीसगढ़ में अलग-अलग जाति समुदाय लोगों के अधिकारों के हनन, भूमि अधिकारों के उल्लंघन, अत्याचार या भेदभाव से जुड़ी विशिष्ट शिकायतों की जांच कर उन्हें न्याय दिलाने के उद्देश्य से कई आयोगों का गठन किया है। इनमें से एक आयोग का कोर्ट सालभर से सूना पड़ा हुआ है। इस आयोग में शिकायतें तो आती हैं, लेकिन सुनवाई नहीं होती। वजह… आयोग में सदस्यों की नियुक्ति नहीं हुई है। आवेदन आते हैं लेकिन उन्हें विभाग के पास भेज दिया जाता है।
जांच करने संबंधित विभागों को भेजा जा रहा
श्री छाबड़ा ने बताया कि, कोर्ट में सुनवाई नहीं करने के बाद भी प्राप्त आवेदनों से संबंधित प्रकरणों के निराकरण किए जा रहे हैं। इसके लिए प्रकरणों को संबंधित विभागों को भेजकर जांच प्रतिवेदन मांगे जाते हैं। इन जांच प्रतिवेदनों पर शिकायकर्ताओं से उनका अभिमत मांगा जाता है। इसके बाद ही प्रकरणों का निराकरण किया जाता है। उन्होंने बताया कि सालभर में लगभग 20 शिकायतें आई हैं, इन सभी शिकायतों को जांच के लिए भेजा गया है, जिनमें कुछ में जांच प्रतिवेदन भी आ चुके हैं।
अल्पसंख्यक आयोग का कोर्ट सालभर से सूना
छत्तीसगढ़ राज्य अल्पसंख्यक आयोग के गठन का उद्देश्य मुस्लिम, ईसाई, सिख, बौद्ध, पारसी और जैन समुदायों के अल्पसंख्यक हितों की रक्षा, संरक्षण करने के साथ उनके अधिकारों के हनन और उनके साथ भेदभाव सहित अन्य मामलों की जांच कर उन्हें न्याय दिलाना है। राजधानी रायपुर के पुराना मंत्रालय भवन के पास स्थित अल्पसंख्यक आयोग का मुख्य दफ्तर भी है, जहां आवेदकों की शिकायतों से संबंधित प्रकरणों की सुनवाई के लिए कोर्ट भी बना हुआ है, लेकिन पिछले सालभर से इस कोर्ट का दरवाजा तक खोला नहीं गया है। इसका कारण आयोग में सदस्यों की नियुक्ति नहीं किया जाना बताया गया है। आयोग के अध्यक्ष अमरजीत सिंह छाबड़ा ने बताया कि जब से उन्होंने आयोग के अध्यक्ष की जिम्मेदारी संभाली है, तब से सदस्यों की नियुक्ति नहीं हुई है। इसके कारण वे कोर्ट में सुनवाई भी नहीं कर पा रहे हैं।
सदस्यों की नियुक्ति नहीं होने से सुनवाई प्रभावित
अल्पसंख्यक आयोग के अध्यक्ष अमरजीत सिंह छाबड़ा ने बताया कि, मैंने जब से अध्यक्ष का पदभार संभाला है, फरियादियों को व्याय दिलाने का प्रयास कर रहा हूं। सदस्यों की नियुक्ति नहीं होने की वजह से प्रकरणों की सुनवाई आयोग में नहीं हो रही। लेकिन शिकायतों को परीक्षण के बाद कार्रवाई के लिए विभाग के पास भेजा जा रहा है।