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Delimitation Bill 2026: शरद पवार ने विपक्ष को दिया बड़ा झटका, परिसीमन बिल को समर्थन देगी NCP

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महाराष्ट्र के कद्दावर राजनेता और राष्ट्रवादी कांग्रेस पार्टी (एसपी) के प्रमुख शरद पवार ने विपक्षी खेमे को एक बहुत बड़ा और अप्रत्याशित झटका दे दिया है। दिल्ली और महाराष्ट्र के राजनीतिक गलियारों से आ रही पुख्ता खबरों के अनुसार, एनसीपी (एसपी) ने संसद में पेश होने वाले आगामी परिसीमन बिल को अपना पूर्ण समर्थन देने का एक बेहद महत्वपूर्ण और रणनीतिक फैसला किया है।

सूत्रों के मुताबिक, शरद पवार की पार्टी इस कानून के पक्ष में मतदान करने या इसके समर्थन में अपनी बात रखने की पूरी तैयारी कर चुकी है। चूंकि एनसीपी (एसपी) वर्तमान में विपक्षी इंडिया गठबंधन की सबसे प्रमुख और मजबूत क्षेत्रीय पार्टियों में से एक है, इसलिए शरद पवार के इस बदले हुए रुख को विपक्ष के लिए एक बड़े झटके और केंद्र की मोदी सरकार के लिए एक सकारात्मक संकेत के रूप में देखा जा रहा है।

अप्रैल के विशेष सत्र में गिर गया था विधेयक, जरूरी बहुमत न मिलने से 54 वोटों से चूक गई थी मोदी सरकार
इस साल अप्रैल महीने के दौरान संसद के एक विशेष सत्र में केंद्र सरकार की ओर से महिला आरक्षण और निर्वाचन क्षेत्रों के परिसीमन से जुड़ा एक अत्यंत महत्वपूर्ण संवैधानिक संशोधन विधेयक पेश किया गया था। उस समय पूरे विपक्ष ने एकजुटता दिखाते हुए इस बिल का जोरदार विरोध किया था, जिसके चलते सदन में पर्याप्त संख्या बल होने के बावजूद सरकार जरूरी दो-तिहाई विशेष बहुमत हासिल करने में विफल रही थी।

उस ऐतिहासिक वोटिंग के दौरान बिल के पक्ष में 298 वोट पड़े थे, जबकि विरोध में 230 सांसदों ने मतदान किया था। सदन में कुल 528 सांसदों की मौजूदगी के कारण यह बिल पारित होने के आंकड़े से महज 54 वोट पीछे रह गया था और गिर गया था। इस पराजय के बाद प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने संसद में साफ कहा था कि केवल नंबर गेम कम होने का मतलब यह नहीं है कि वे हार मान चुके हैं, और सरकार पूरे होमवर्क के साथ इस राष्ट्रीय महत्व के बिल को दोबारा सदन के पटल पर लेकर आएगी।

लोकसभा और विधानसभा सीटों की सीमाओं का दोबारा होगा निर्धारण, जनगणना के आधार पर बदलेगा देश का राजनीतिक नक्शा
परिसीमन बिल असल में पूरे देश के भीतर लोकसभा और विभिन्न राज्यों के विधानसभा निर्वाचन क्षेत्रों की भौगोलिक सीमाओं को नए सिरे से निर्धारित करने की एक वैधानिक और संवैधानिक प्रक्रिया है। यह पूरी कवायद देश की नवीनतम जनगणना के आधिकारिक आंकड़ों के आधार पर संपन्न की जाती है, ताकि बढ़ती हुई आबादी के अनुपात में सभी क्षेत्रों को संसद और विधानसभाओं में उचित और समान प्रतिनिधित्व मिल सके।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि शरद पवार की पार्टी का यह सकारात्मक कदम बेहद सोची-समझी रणनीति का हिस्सा है। इस फैसले के बाद अब संसद के आगामी सत्रों में मोदी सरकार के लिए इस अटके हुए बड़े संवैधानिक सुधार कानून को पास कराना काफी आसान हो जाएगा, जिससे देश के चुनावी और प्रशासनिक ढांचे में एक बहुत बड़ा और ऐतिहासिक बदलाव देखने को मिलेगा।

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