सुकमा। राज्य सरकार द्वारा हाल ही में जारी पुलिस अधिकारियों की स्थानांतरण सूची में सुकमा के पुलिस अधीक्षक किरण चव्हाण का तबादला बालोद जिले में किया गया है। उनके स्थानांतरण के साथ ही सुकमा में उनके कार्यकाल की उपलब्धियों और जिले में आए सकारात्मक बदलावों की चर्चा तेज हो गई है।
नक्सल विरोधी अभियानों को दी नई धार
कभी नक्सल हिंसा के लिए देशभर में चर्चित रहे सुकमा में एसपी किरण चव्हाण के नेतृत्व में पुलिस ने नक्सल विरोधी अभियानों को नई धार दी। उनके कार्यकाल में कई इनामी नक्सलियों ने आत्मसमर्पण किया, अनेक नक्सली गिरफ्तार हुए तथा बड़ी मात्रा में हथियार और विस्फोटक बरामद किए गए। सुरक्षा बलों और जिला पुलिस के समन्वित अभियान से नक्सल संगठन पर लगातार दबाव बना रहा।
पुलिस के प्रति बढ़ाया विश्वास
एसपी श्री चव्हाण ने केवल नक्सल विरोधी कार्रवाई तक ही अपने दायित्व को सीमित नहीं रखा, बल्कि जनविश्वास बढ़ाने की दिशा में भी उल्लेखनीय प्रयास किए। दूरस्थ गांवों में जनसंपर्क अभियान, युवाओं को मुख्यधारा से जोड़ने की पहल तथा पुलिस-जन संवाद कार्यक्रमों ने ग्रामीणों और पुलिस के बीच विश्वास को मजबूत किया।
शासन की योजनाओं का विस्तार हुआ तेज
बेहतर सुरक्षा माहौल का असर विकास कार्यों पर भी दिखाई दिया। जिन क्षेत्रों में कभी भय का वातावरण था, वहां सड़क, शिक्षा, स्वास्थ्य और शासन की योजनाओं का विस्तार तेज हुआ। कानून-व्यवस्था बनाए रखने और अपराध नियंत्रण में भी सुकमा पुलिस का प्रदर्शन उल्लेखनीय रहा।
बेहतर पुलिसिंग के लिए किया जाएगा याद
बालोद के लिए स्थानांतरित होने के साथ एसपी किरण चव्हाण अपने पीछे एक ऐसा कार्यकाल छोड़कर जा रहे हैं, जिसे नक्सल प्रभावित जिले में प्रभावी नेतृत्व, बेहतर समन्वय और जनकेंद्रित पुलिसिंग के लिए याद किया जाएगा। जिले के नागरिकों और पुलिस अधिकारियों को उम्मीद है कि उनके द्वारा शुरू किए गए प्रयास आगे भी जारी रहेंगे और सुकमा शांति, सुरक्षा एवं विकास के पथ पर लगातार आगे बढ़ता रहेगा।
सबसे लंबे समय तक रहने का रिकार्ड
2018 बैच के आईपीएस अधिकारी किरण चव्हाण के नाम एक नया रिकॉर्ड भी है। 29 मई 2023 को बतौर पुलिस अधीक्षक सुकमा का पदभार संभालते हुए शानदार 3 वर्ष से ज्यादा वक्त तक रहे जो छत्तीसगढ़ पुलिस में ज्यादा समय तक रहने का रिकार्ड बन गया है। हालांकि पुलिस अधीक्षक से पूर्व सुकमा में ही अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक के तौर पर भी वे कार्य कर चुके है।
गलती पर डांट नहीं बल्कि मिलती थी समझाइश : तिलकवार
सुकमा जिले में शानदार 5 वर्ष पूरा कर चुके एसडीओपी परमेश्वर तिलकवार ने कहा कि चव्हाण सर के कार्यकाल में बहुत कुछ समझने व सीखने का अवसर मिला, वे हमेशा एक पालक की भूमिका मे ही रहते थे। चव्हाण सर नक्सल ऑपरेशन के दौरान किसी भी तरह की गलती पर डांटने के बजाय समझाइश देते हुए कार्य को और बेहत्तर बनाने की दिशा में निर्देश देते थे।
कुशल रणनीतिक सोच के धनी थे पुलिस अधीक्षक
सुकमा जिले के वरिष्ठ अधिवक्ता कैलाश जैन ने कहा कि पुलिस अधीक्षक किरण सर का कार्यकाल केवल एक प्रशासनिक दायित्व नहीं, बल्कि साहस, नेतृत्व और जनसेवा का एक प्रेरणादायक अध्याय रहा। श्री जैन ने कहा कि पुलिस अधीक्षक श्री चव्हाण की दृढ़ इच्छाशक्ति, रणनीतिक सोच और अपनी पूरी टीम के साथ मिलकर नक्सल चुनौती से प्रभावी ढंग से मुकाबला किया तथा जिले में शांति और विश्वास का वातावरण स्थापित करने में महत्वपूर्ण योगदान दिया।