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बरसात में गांव बन जाते हैं टापू : कहीं नाव चलती है, कहीं पैसे देकर पार करते हैं रास्ता

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राजनांदगांव – जंगल-पहाड़ या दूरदराज के गांवों की बात छोड़िए। यहां शहर से लगे गांव थोड़ी सी बारिश के बाद टापू बन जाते हैं। इसका सबसे बड़ा उदाहरण है राजनांदगांव का जंगलेशर, जिसकी शहर से दूरी सिर्फ 7 किलोमीटर है, लेकिन भारी बारिश में यहां सड़क पर नाव चलती है। इसी तरह दुर्ग से लगा ग्रामीण विधानसभा क्षेत्र का गांव आलबरस में पुलिया में बाढ़ आने से रास्ता बंद हो जाता है। तीर्थनगरी राजिम में कहीं गांव तलाशने की जरूरत नहीं है, यहां शहर ही बाढ़ के कारण दो भागों में बंट जाता है। एक वार्ड से दूसरे वार्ड में जाने का रास्ता बंद रहता है।

शहर के समीप ही नगर निगम और जिला मुख्यालय से महज 8 किलोमीटर की दूरी पर स्थित ग्राम जंगलेशर के लिए बारिश राहत नहीं बल्कि आफत लेकर आती है। बीते कई वर्षों से इस गांव के लोग बारिश अधिक होने पर टापू में फंस जाते हैं। उनके गांव का संपर्क सभी रास्तों से अन्य गांव से कट जाता है। उनके आवागमन के लिए कोई भी सड़क नहीं बचती है। जब तक रपटे से पानी नीचे नहीं उतरता है तब तक यहां से कोई कहीं नहीं जा सकता हैं, वह गांव के भीतर ही कैद हो जाते हैं। 

बारिश होते ही टापू में तब्दील हो जाता जंगलेश्वर गांव
राजनांदगांव शहर से गुजरने वाली शिवनाथ नदी के समीप ही ग्राम जंगलेश्वर स्थित है, यहां लगभग 5 हजार से अधिक लोग निवास करते हैं। अधिक बारिश होने पर उनका गांव टापू में तब्दील हो जाता है। इस गांव से आवागमन के लिए दे हैं, जहां पक्की सड़क तो बनी हुई है लेकिन अधिक बारिश होने पर सड़क के बीच आने वाला रपटा भर जाता है और सड़क डूब जाती है। इसके बाद गांव का कोई भी व्यक्ति सड़क के रास्ते गांव से बाहर नहीं आ सकता है।

तीन दशक से हो रही पुल की मांग ग्राम जंगलेशर के
लोगों की यह समस्या नई नहीं है। शहर से लगा हुआ गांव होने के बाद भी वर्षों से यहां के लोग वर्षा ऋतु के दौरान बदहाली में जीते आ रहे हैं। यहां के देवल साहू ने बताया कि लगभग 25-30 वर्षों से यहां पर पुल निर्माण की मांग की जा रही है लेकिन अब तक इसकी स्वीकृति नहीं मिली है। जिससे अधिक बारिश और बाढ़ की स्थिति में गांव के लोगों का आवागमन पूरी तरह से ठप हो जाता है।

नाव से होता है आवागमन
अधिक बारिश होने पर ग्राम जंगलेशर का संपर्क सड़क मार्ग से बंद हो जाता है ऐसे में यहां किसी की तबीयत खराब हो तो एम्बुलेंस और आपातकालीन स्थिति में अन्य सुविधाएं भी नहीं पहुंच पाती है। दोनों सड़क के रपटों में पानी भरने के बाद पानी सड़क से उतरने तक लोग यहां फंसे रहते हैं। कई बार आवागमन आवश्यक हो तो नाव बुलानी पड़ती है और सड़क के ऊपर नाव चलाकर लोग उस पार से इस पार तक आते हैं। मरीज को भी नाव के जरिए ही लाया जाता है।

सड़क मार्ग हो जाता है बंद
ग्राम जंगलेशर जाने के लिए जंगलेशर-कान्हापूरी और जंगलेशर – मोहड़ मार्ग है। इन दोनों मार्ग पर ढलान में छोटी पुलिया है। अधिक बारिश होने पर जंगलेसर- मोहड़ मार्ग बंद हो जाता है क्योंकि इस मार्ग के रपटे से शहर के पानी का बहाव होता है। वहीं जंगलेशर – कन्हारपुरी मार्ग के समीप स्थित शिवनाथ नदी में बाढ़ आने के चलते इस मार्ग के रपटे में नदी के बाढ़ का पानी भर जाता है।

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