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कीमती लकड़ी तस्करी का बड़ा खेल : एआई से बनाई फर्जी टीपी, ओडिशा से ले आया 50 टन खैर की लकड़ी

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रायपुर – वन विभाग की उड़नदस्ता टीम ने एक तस्कर के गोदाम में छापे की कार्रवाई करते हुए 50 टन के करीब खैर लकड़ी के गोले जब्त किए हैं। तस्कर ने लकड़ी के गोले ओडिशा से तस्करी कर अपने यार्ड में डंप कर रखे थे। वन विभाग की उड़नदस्ता टीम को जैसे ही खैर लकड़ी के बारे में जानकारी मिली, मंगलवार तड़के पांच बजे यार्ड में छापा मारकर खैर लकड़ियों का लॉट अपने कब्जे में ले लिया। मुख्य तस्कर फरार है, उससे जुड़े मुंशी सहित तीन लोगों को वन विभाग के अफसर अपनी कस्टडी में लेकर पूछताछ कर रहे हैं। 

राज्य उड़नदस्ता के संदीप सिंह राजपूत तथ रायपुर रेंज के रेंजर दीपक तिवारी ने बताया कि खैर लकड़ी को सारंगढ़-बिलाईगढ़, सरसीवां निवासी मनीष अग्रवाल ने ओडिशा से तस्करी कर मंगाया था। लकड़ी को दो ट्रकों में लोड कर डंप किया गया था। वन अफसरों के अनुसार तस्कर ने फर्जी टीपी बनाकर खैर लकड़ी को तस्करी कर ओडिशा से रायपुर लाया था। रेंजर ने अपने वरिष्ठ अधिकारियों के माध्यम से वनबल प्रमुख अरुण पाण्डेय को तस्करी की सूचना दी। इसके बाद वनबल प्रमुख के निर्देश पर संदीप सिंह, दीपक तिवारी तथा डिप्टी रेंजर संतोष सामंतराय के संयुक्त नेतृत्व में टीम गठित कर छापे की कार्रवाई की गई।

पूर्व में तस्करी के आरोप में जेल जा चुका है
मनीष अग्रवाल आदतन वन अपराधी है, उसके कब्जे से वर्ष 2021 में बड़ी खेप में खैर लकड़ी जब्त की गई थी, जिसे उसने खरोरा के यार्ड में छिपाकर रखा था। इसके पूर्व वर्ष 2019-20 में तेंदुआ खाल बेचने के आरोप में पकड़ा जा चुका है। बताया जा रहा है, तस्कर के खिलाफ लकड़ी तस्करी का प्रकरण अब भी कोर्ट में लंबित है।

बहुपयोगी है खैर लकड़ी
खैर की लकड़ी कत्था बनाने के काम आने के साथ औषधि बनाने के काम आती है। इसके साथ ही इस लकड़ी का कई अन्य तरह का उपयोग किया जाता है। खैर के तने को उबालकर कत्था निकाला जाता है। इसके साथ, पुराने पेड़ों की छाल में से सफेद रवेदार पदार्थ निकलता है जिसे ‘खैरसाल’ कहते हैं, जो काफी महंगी औषधि है।

तस्कर एआई की लेता था मदद
वन विभाग की टीम ने मनीष के मुंशी तथा अन्य के कब्जे से मोबाइल जब्त किया है। मोबाइल की पड़ताल करने पर उन्हें पता चला है कि लकड़ी तस्कर एआई की मदद से ओडिशा, छत्तीसगढ़, हरियाणा तथा उत्तरप्रदेश वन विभाग का फर्जी टीपी बनाकर अपने साथियों को देता था। जब्त खैर लकड़ी भी एआई तकनीक से तैयार टीपी की मदद से लायी गयी थी।

दूसरे राज्य के रास्ते दूसरे देशों में बेचता था
विभागीय अधिकारियों को जो जानकारी मिली है, उसके मुताबिक मनीष अग्रवाल खैर लकड़ी को रायपुर मंगाने के बाद यहां से उस लकड़ी को हरियाणा, उत्तरप्रदेश के रास्ते नेपाल भेजता था। इसके बाद अन्य देशों में खैर लकड़ी का अवैध कारोबार करता था। खैर लकड़ी का ओडिशा में सबसे ज्यादा उत्पादन सोनेपुर, बलांगीर, मयूरभंज के जंगलों में होता है। छत्तीसगढ़ के बलरामपुर तथा सरगुजा में खैर लकड़ी पायी जाती है।

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