बिलासपुर। फर्जी सर्पदंश के मामले में पुलिस को बड़ा गिरोह पकड़ने में सफलता मिली है। पुलिस ने फर्जी दस्तावेज व पोस्टमार्टम रिपोर्ट बनाने वाले वकील, तहसीलदार के ड्राइवर, बैंककर्मी सहित 4 लोगों को गिरफ्तार कर पुलिस रिमांड में पूछताछ करने के बाद दस्तावेज जब्त कर कोर्ट में पेश किया, जहां से सभी को जेल भेज दिया गया है।
विधानसभा में सवाल उठने के बाद जिला प्रशासन से नायब नाजिर के द्वारा जिले के सिविल लाइन, सरकण्डा, कोनी, कोतवाली, तोरवा, सिरगिट्टी में फर्जी सर्पदंश से मौत के 15 मामलों में एफआईआर दर्ज कराई गई थी। एसएसपी रजनेश सिंह के निर्देश पर एडीशनल एसपी पंकज पटेल के नेतृत्व में उक्त सभी प्रकरणों की पुराने फाइल खुलवाकर मामले की समीक्षा की जा रही थी।
बैंककर्मी और ड्राइवर समेत 4 आरोपी पुलिस रिमांड पर
समीक्षा के बाद सरकण्डा थाना के पांच प्रकरणों में शामिल वकील हीराप्रसाद खाण्डेकर मंगला आकाश विहार, कुशकुमार गुप्ता राजकिशोरनगर बैंककर्मी, महेन्द्र कुमार अशोकनगर तथाकथित वकील, गोविंद विश्वकर्मा दैनिक वेतन भोगी तहसीदार के ड्राइवर को गिरफ्तार कर कोर्ट में पेश करने के बाद पुलिस रिमांड में लेकर पूछताछ करने में लगी हुई थी। पूछताछ में बड़ा फर्जीवाड़ा उजागर हुआ है। उनके कब्जे से फर्जी दस्तावेज बरामद किए गए हैं।
सरकण्डा पुलिस ने 4 आरोपियों को भेजा जेल
16 जुलाई को पुलिस रिमांड समाप्त होने पर सरकण्डा पुलिस ने चारों आरोपियों को कोर्ट में पेश किया, जहां से उन्हें जेल भेज दिया गया है। कोनी थाना के एक मामले में भी आरोपी जांच के दौरान चारों आरोपी कोनी थाना के एक सर्पदंश के मामले में शामिल है। चारों ने उक्त मृतक के आश्रित परिजन को फर्जी दस्तावेज तैयार कर शासन की योजना का 4 लाख रुपए दिलाया स्वीकार किया है। कोनी पुलिस बाद आरोपियों को प्रोडेक्शन रिमांड में लेकर पूछताछ करने के बाद गिरफ्तारी करेगी।
पूर्व में वकील सहित तीन लोग गए जेल
सिविल लाइन थाना के दो फर्जी सर्पदंश के मामले में पुलिस ने पूर्व में वकील कांता साहू, आश्रित परिजन तालापारा शिवकुमारी यादव, गवाह उसकी बहन दामिनी यादव को गिरफ्तार कर जेल भेजा जा चुका है।
पूर्व सिम्स चौकी प्रभारी से पूछताछ
पूर्व सिम्स चौकी प्रभारी एएसआई गुलाब सोनवानी जांच के रडार में आ गए हैं। विगत 5 साल में उनकी सिम्स चौकी में दूसरी पोस्टिंग थी। उन्होंने अपने दोनों कार्यकाल में सिम्स में मृत्यु होने वाले लगभग 800 से अधिक मर्ग का पोस्टमार्टम कराया है। इसमें करीब 267 सर्पदंश से मृत्यु होने की पुष्टि की गई है। पुलिस जांच टीम श्री सोनवानी को प्रतिदिन तलब कर उसके लगातार सर्पदंश से मृत्यु की प्रकरणों के संबंध में पूछताछ कर बयान दर्ज कर रही है। इस तरह दर्ज 15 मामले में विवेचक पुलिस अधिकारियों से भी पूछताछ कर बयान दर्ज किया जा रहा है।
ऐसे होता था फर्जीवाड़ा
मास्टर माइंड वकील हीराप्रसाद खाण्डेकर ने अपने गिरोह में बैंककर्मी कुशकुमार गुप्ता, तहसीदार के ड्राइवर गोविंद विश्वकर्मा व तथाकथित वकील महेन्द्र कुमार मनहर को शामिल किया था। किसी भी वजह से लोगों की मृत्यु होने के बाद वकील अपने सहयोगी के साथ मृतक के घर जाकर आश्रित परिजन से मिलकर सर्पदंश में मृत्यु के दस्तावेज बनवाकर शासन की योजना के तहत 4 लाख रुपए सहायता राशि दिलाने का सौदा तय करता था। उसके बाद आश्रित परिजन से सर्पदंश से मृत्यु होने का फर्जी शपत्र बनवाकर फर्जी पोस्टमार्टम रिपोर्ट तैयार कर तहसीलदार के ड्राइवर को दस्तावेज देता था। ड्राइवर के द्वारा तहसील आफिस से काम कराने को ठेका लेकर तहसील आफिस का पूरा काम कराया जाता था। इसी तरह वह बैंककर्मी कुश कुमार गुप्ता से आश्रित परिजन का बैंक खाता खुलवाता था।