अंतरराष्ट्रीय बाजार में कच्चे तेल की कीमतों में फिर तेजी देखने को मिल रही है। अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच ब्रेंट क्रूड ऑयल 90 डॉलर प्रति बैरल के स्तर को पार कर गया। विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यह तेजी लंबे समय तक बनी रहती है, तो भारत में महंगाई, आयात लागत और रुपये पर दबाव बढ़ सकता है।
एक सप्ताह में कच्चे तेल की कीमतों में तेज उछाल
बाजार के आंकड़ों के अनुसार, ब्रेंट क्रूड फ्यूचर्स में हाल के दिनों में उल्लेखनीय बढ़ोतरी दर्ज की गई है। रिपोर्ट्स के मुताबिक, पिछले एक सप्ताह में इसकी कीमत में करीब 16% की तेजी आई है, जो हाल के महीनों की बड़ी साप्ताहिक बढ़ोतरी में शामिल है।
भारत पर क्या हो सकता है असर?
भारत अपनी ऊर्जा जरूरतों का बड़ा हिस्सा आयातित कच्चे तेल से पूरा करता है। ऐसे में अंतरराष्ट्रीय बाजार में तेल महंगा होने से—
- पेट्रोलियम आयात बिल बढ़ सकता है।
- महंगाई पर दबाव बढ़ने की आशंका रहती है।
- भारतीय रुपये पर दबाव आ सकता है।
- विदेशी पोर्टफोलियो निवेश (FPI) के प्रवाह पर असर पड़ सकता है।
हालांकि, इन प्रभावों की तीव्रता आगे तेल की कीमतों और वैश्विक परिस्थितियों पर निर्भर करेगी।
तेल कंपनियों के मार्जिन पर दबाव
विश्लेषकों के अनुसार, कच्चे तेल की कीमत बढ़ने से सार्वजनिक क्षेत्र की ऑयल मार्केटिंग कंपनियों के रिटेल मार्जिन पर दबाव बढ़ा है। विशेष रूप से डीजल की बिक्री पर कंपनियों के मार्जिन प्रभावित होने की बात कही जा रही है।
वहीं, रिफाइनिंग कारोबार से मिलने वाले बेहतर मार्जिन के कारण कंपनियों के कुल प्रदर्शन को कुछ हद तक सहारा मिल रहा है।
ब्याज दरों और बाजार पर भी नजर
आर्थिक विशेषज्ञों का कहना है कि यदि ऊर्जा कीमतें ऊंचे स्तर पर बनी रहती हैं, तो वैश्विक महंगाई की चिंता फिर बढ़ सकती है। इससे अमेरिका समेत अन्य देशों के केंद्रीय बैंकों की मौद्रिक नीति पर भी असर पड़ सकता है।
अमेरिका-ईरान तनाव बना चिंता का कारण
रिपोर्ट्स के अनुसार, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव से वैश्विक तेल आपूर्ति को लेकर अनिश्चितता बनी हुई है। बाजार इस बात पर नजर रखे हुए हैं कि आने वाले दिनों में पश्चिम एशिया की स्थिति किस दिशा में जाती है, क्योंकि इसका सीधा असर कच्चे तेल की कीमतों पर पड़ सकता है।
क्रैक स्प्रेड और इंटीग्रेटेड मार्जिन क्या हैं?
क्रैक स्प्रेड वह अंतर होता है जो कच्चे तेल की कीमत और उससे बनने वाले उत्पादों (जैसे पेट्रोल और डीजल) की बिक्री कीमत के बीच होता है। इससे रिफाइनिंग कंपनियों की संभावित कमाई का अनुमान लगाया जाता है।
इंटीग्रेटेड मार्जिन रिफाइनिंग और ईंधन विपणन (मार्केटिंग) से होने वाले संयुक्त लाभ या नुकसान का संकेतक होता है, जिससे तेल कंपनियों के समग्र प्रदर्शन का आकलन किया जाता है।