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धमतरी के दो पशुपालकों ने पेश की आत्मनिर्भरता की मिसाल, वैज्ञानिक पशुपालन से बढ़ाई आय

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छत्तीसगढ़ के धमतरी जिले में वैज्ञानिक पशुपालन और सरकारी योजनाओं का लाभ उठाकर ग्रामीण पशुपालक सफलता की नई कहानी लिख रहे हैं। ग्राम सिलघट के धनऊ (भजनाहा) सोनकर और ग्राम भटगांव के अश्वनी ध्रुव ने आधुनिक तकनीकों और पशुपालन विभाग के सहयोग से अपने व्यवसाय को नई दिशा दी है।

75 साल की उम्र में भी पूरी लगन से कर रहे पशुपालन

75 वर्षीय धनऊ (भजनाहा) सोनकर आज भी प्रतिदिन स्वयं खेतों से हरा चारा काटकर साइकिल से घर लाते हैं और अपने पशुओं की देखभाल करते हैं। उन्होंने वर्षों से कृत्रिम गर्भाधान, नस्ल सुधार और समय पर टीकाकरण जैसी वैज्ञानिक पशुपालन पद्धतियों को अपनाया है।

पशुपालन विभाग के अनुसार, वे पिछले कई वर्षों से आधुनिक पशुपालन को बढ़ावा देते हुए अन्य पशुपालकों के लिए प्रेरणास्रोत बने हुए हैं।

अश्वनी ध्रुव ने स्थापित की आधुनिक बकरी पालन इकाई

नेशनल लाइवस्टॉक मिशन (NLM) के तहत अश्वनी ध्रुव ने ग्राम विश्रामपुर में लगभग 20 लाख रुपये की लागत से आधुनिक बकरी पालन इकाई शुरू की है।

इस परियोजना की प्रमुख बातें—

  • 100 उन्नत नस्ल की बकरियां
  • 5 उन्नत नस्ल के बकरे
  • योजना के तहत 10 लाख रुपये का अनुदान
  • पहली किस्त प्राप्त
  • स्वास्थ्य परीक्षण, बीमा, टैगिंग और वैज्ञानिक प्रशिक्षण की सुविधा

आसपास के पशुपालकों को भी मिलेगा लाभ

उन्नत नस्ल के बकरों के माध्यम से क्षेत्र के अन्य पशुपालकों को भी नस्ल सुधार का लाभ मिलने की उम्मीद है। इससे बकरी पालन की गुणवत्ता और ग्रामीण आय दोनों में वृद्धि हो सकती है।

सरकारी योजनाओं से बदल रही ग्रामीण तस्वीर

पशुपालन विभाग का मानना है कि वैज्ञानिक तकनीकों और सरकारी योजनाओं का प्रभावी उपयोग ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार और आय बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकता है।

धनऊ सोनकर और अश्वनी ध्रुव की पहल इस बात का उदाहरण है कि आधुनिक पशुपालन अपनाकर ग्रामीण स्तर पर भी आत्मनिर्भरता की दिशा में मजबूत कदम बढ़ाए जा सकते हैं।

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