रायपुर। छत्तीसगढ़ में स्मार्ट मीटर को लेकर फैल रही अफवाहों और बढ़ते भ्रम के बीच छत्तीसगढ़ स्टेट पावर डिस्ट्रीब्यूशन कंपनी (CSPDCL) ने रायपुर, दुर्ग और बिलासपुर में स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं का विस्तृत अध्ययन कराया है। कंपनी का दावा है कि तीन महीने के विश्लेषण में अधिकांश उपभोक्ताओं की बिजली खपत जुलाई में कम दर्ज की गई है, जिससे यह स्पष्ट होता है कि बिल वास्तविक खपत के आधार पर बन रहे हैं।
जुलाई में 28% तक घटी बिजली खपत
बिजली कंपनी के अनुसार राजधानी रायपुर के 3.11 लाख से अधिक घरेलू स्मार्ट मीटर उपभोक्ताओं के आंकड़ों का विश्लेषण किया गया।
- 1 जून से 26 जून 2026 तक कुल बिजली खपत लगभग 10.85 करोड़ यूनिट रही।
- वहीं 1 जुलाई से 26 जुलाई 2026 के दौरान यह घटकर 7.77 करोड़ यूनिट रह गई।
यानी जुलाई में बिजली खपत में करीब 28 प्रतिशत की कमी दर्ज की गई।
400 यूनिट से ज्यादा खपत वालों में भी कमी
कंपनी के मुताबिक 400 यूनिट से अधिक बिजली उपयोग करने वाले 1.21 लाख से ज्यादा उपभोक्ताओं के बिलों का भी अध्ययन किया गया।
विश्लेषण में पाया गया कि इस वर्ग के उपभोक्ताओं की बिजली खपत में भी करीब 44 प्रतिशत की कमी आई है।
ऊर्जा राहत योजना का मिल सकता है ज्यादा लाभ
बिजली विभाग का कहना है कि जिन उपभोक्ताओं की मासिक खपत 400 यूनिट से अधिक होती है, उन्हें मुख्यमंत्री ऊर्जा राहत जन अभियान योजना का लाभ नहीं मिल पाता।
लेकिन जुलाई में खपत कम होने से ऐसे कई उपभोक्ता अब इस सीमा के भीतर आ सकते हैं, जिससे अगस्त में आने वाले बिजली बिल में राहत मिलने और सरकारी योजना का लाभ मिलने की संभावना बढ़ जाएगी।
स्मार्ट मीटर नहीं, वास्तविक खपत से बनता है बिल
कंपनी ने साफ किया कि बिजली बिल का आधार स्मार्ट मीटर नहीं बल्कि वास्तविक बिजली खपत है।
विभाग का कहना है कि जिन घरों में अभी स्मार्ट मीटर नहीं लगे हैं, वहां भी अप्रैल, मई और जून 2026 में पिछले वर्ष की तुलना में बिजली खपत बढ़ी है। इससे स्पष्ट होता है कि खपत में बदलाव मौसम और उपयोग पर निर्भर करता है, न कि केवल मीटर के प्रकार पर।
उदाहरण देकर समझाया अंतर
बिजली कंपनी ने कुछ उपभोक्ताओं के आंकड़े भी साझा किए, जिनमें 2025 की तुलना में 2026 के अप्रैल, मई और जून महीनों में बिजली खपत अधिक दर्ज की गई। विभाग का कहना है कि इससे यह साबित होता है कि बिजली बिल पूरी तरह वास्तविक उपयोग के आधार पर तैयार किए जाते हैं।