नई दिल्ली। राष्ट्रीय चिकित्सा आयोग (NMC) ने मेडिकल शिक्षा को अधिक समावेशी बनाने की दिशा में बड़ा कदम उठाया है। आयोग ने देश के सभी मेडिकल कॉलेजों और संस्थानों को Benchmark Disabilities (PwBD) श्रेणी के छात्रों के लिए Enabling Unit स्थापित करने का निर्देश दिया है। इसका उद्देश्य दिव्यांग विद्यार्थियों को पढ़ाई, क्लिनिकल ट्रेनिंग और इंटर्नशिप के दौरान आवश्यक सहयोग और बाधारहित शैक्षणिक माहौल उपलब्ध कराना है।
क्या होगी Enabling Unit की जिम्मेदारी?
NMC के निर्देशों के अनुसार, प्रत्येक मेडिकल कॉलेज में बनने वाली Enabling Unit दिव्यांग छात्रों के लिए Single Point of Contact के रूप में कार्य करेगी। यह यूनिट—
- पढ़ाई के दौरान आवश्यक शैक्षणिक सहायता उपलब्ध कराएगी।
- क्लासरूम, क्लिनिकल ट्रेनिंग और इंटर्नशिप से जुड़ी विशेष जरूरतों में सहयोग करेगी।
- कॉलेज परिसर को अधिक सुगम (Accessible) बनाने में मदद करेगी।
- दिव्यांग छात्रों की शिकायतों और समस्याओं का समाधान सुनिश्चित करेगी।
एडमिशन के समय दी जाएगी पूरी जानकारी
आयोग ने निर्देश दिया है कि प्रवेश प्रक्रिया के दौरान सभी छात्रों को Enabling Unit की जानकारी दी जाए। साथ ही इसकी भूमिका, जिम्मेदारियां और संपर्क विवरण कॉलेज की आधिकारिक वेबसाइट तथा नोटिस बोर्ड पर स्पष्ट रूप से प्रदर्शित किए जाएं, ताकि जरूरत पड़ने पर छात्र आसानी से सहायता प्राप्त कर सकें।
Disability Assessment Board के साथ करेगी काम
यह यूनिट कॉलेज के Disability Assessment Board, फैकल्टी, अस्पताल प्रशासन और अन्य संबंधित अधिकारियों के साथ समन्वय बनाकर काम करेगी। इसका उद्देश्य Rights of Persons with Disabilities (RPwD) Act, 2016 और NMC की गाइडलाइंस के अनुरूप दिव्यांग छात्रों को समय पर सभी आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध कराना होगा।
गोपनीयता और समान अवसर पर विशेष जोर
NMC ने मेडिकल कॉलेजों को यह भी निर्देश दिया है कि सहायता मांगने वाले छात्रों का रिकॉर्ड सुरक्षित रखा जाए और उनकी व्यक्तिगत जानकारी पूरी तरह गोपनीय रखी जाए। साथ ही यह सुनिश्चित किया जाए कि किसी भी छात्र के साथ उसकी दिव्यांगता के आधार पर किसी प्रकार का भेदभाव न हो।
समावेशी मेडिकल शिक्षा की ओर बड़ा कदम
आयोग ने सभी मेडिकल संस्थानों से जल्द से जल्द Enabling Unit को पूरी तरह कार्यशील बनाने और इसकी जानकारी अधिक से अधिक छात्रों तक पहुंचाने को कहा है। माना जा रहा है कि इस पहल से दिव्यांग छात्रों के लिए मेडिकल शिक्षा का वातावरण अधिक सुरक्षित, सुविधाजनक और समान अवसरों वाला बनेगा।