Talabira-II Coal Block Case: सुप्रीम कोर्ट ने तालाबीरा-II कोयला ब्लॉक आवंटन मामले में पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह को बड़ी कानूनी राहत देते हुए ट्रायल कोर्ट के समन आदेश को रद्द कर दिया है। शीर्ष अदालत ने CBI की क्लोजर रिपोर्ट को सही ठहराते हुए कहा कि उपलब्ध रिकॉर्ड में उनके खिलाफ आपराधिक मुकदमा चलाने का पर्याप्त आधार नहीं बनता।
सुप्रीम कोर्ट ने ट्रायल कोर्ट का आदेश किया निरस्त
मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता वाली पीठ ने कहा कि CBI द्वारा दाखिल क्लोजर रिपोर्ट कानून के अनुरूप थी। अदालत के अनुसार, ट्रायल कोर्ट के पास रिपोर्ट को खारिज कर समन जारी करने के लिए पर्याप्त कानूनी आधार नहीं था। इसलिए समन आदेश को निरस्त किया जाता है।
क्या है तालाबीरा-II कोयला ब्लॉक मामला?
यह मामला वर्ष 2005 में ओडिशा के तालाबीरा-II (Talabira-II) कोयला ब्लॉक के आवंटन से जुड़ा है। उस समय डॉ. मनमोहन सिंह प्रधानमंत्री होने के साथ-साथ कोयला मंत्रालय का अतिरिक्त प्रभार भी संभाल रहे थे।
जांच के दौरान CBI ने कहा था कि उपलब्ध साक्ष्यों में किसी आपराधिक साजिश या अपराध का पर्याप्त प्रमाण नहीं मिला। इसी आधार पर एजेंसी ने अदालत में क्लोजर रिपोर्ट दाखिल की थी।
2015 में स्पेशल कोर्ट ने जारी किया था समन
मार्च 2015 में स्पेशल CBI कोर्ट ने CBI की क्लोजर रिपोर्ट स्वीकार नहीं की थी और पूर्व प्रधानमंत्री डॉ. मनमोहन सिंह, उद्योगपति कुमार मंगलम बिड़ला, पूर्व कोयला सचिव पी.सी. पारख समेत अन्य लोगों को आरोपी के रूप में तलब किया था।
इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने उसी वर्ष समन आदेश पर रोक लगा दी थी। अब अंतिम फैसले में शीर्ष अदालत ने उस आदेश को पूरी तरह रद्द कर दिया है।
मामले का कानूनी अंत
सुप्रीम कोर्ट के ताजा फैसले के बाद इस बहुचर्चित मामले में कानूनी प्रक्रिया समाप्त हो गई है। अदालत ने माना कि उपलब्ध साक्ष्यों के आधार पर डॉ. मनमोहन सिंह के खिलाफ आपराधिक मुकदमा चलाने का औचित्य नहीं है। इसके साथ ही CBI की क्लोजर रिपोर्ट को भी न्यायिक मंजूरी मिल गई।