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NEET पेपर लीक केस: जरूरी दस्तावेज नहीं देने पर टली सुनवाई, CBI को 3 दिन में रिकॉर्ड जमा करने का आदेश

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नई दिल्ली। देशभर में सुर्खियों में रहे NEET पेपर लीक मामले की सुनवाई फिलहाल आगे नहीं बढ़ सकी। फास्ट ट्रैक कोर्ट ने सीबीआई द्वारा सभी आवश्यक दस्तावेज और गवाहों की पूरी सूची पेश नहीं किए जाने पर सुनवाई 3 अगस्त 2026 तक स्थगित कर दी है। अदालत ने जांच एजेंसी को तीन दिनों के भीतर लंबित रिकॉर्ड जमा करने का निर्देश दिया है।

CBI को अदालत का सख्त निर्देश

विशेष न्यायाधीश अनु गोयल बलीगा ने सीबीआई से कहा है कि अगली सुनवाई से पहले सभी जरूरी दस्तावेज, गवाहों के बयान और अन्य लंबित रिकॉर्ड अदालत में प्रस्तुत किए जाएं, ताकि मुकदमे की प्रक्रिया बिना किसी बाधा के आगे बढ़ सके।

20 हजार पन्नों की चार्जशीट, फिर भी अधूरे दस्तावेज

सीबीआई इस मामले में करीब 20 हजार पन्नों की चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। हालांकि, आरोपपत्र से जुड़े कुछ अहम दस्तावेज, गवाहों के बयान और अन्य रिकॉर्ड अभी तक अदालत में पेश नहीं किए गए हैं। इसी कारण सुनवाई आगे नहीं बढ़ सकी।

चार्जशीट में राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी (NTA) के किसी अधिकारी या अन्य सरकारी कर्मचारी को आरोपी नहीं बनाया गया है।

जांच में 360 गवाह, 422 दस्तावेज और 43 साक्ष्य

सीबीआई का दावा है कि उसने पेपर लीक की पूरी साजिश का खुलासा कर लिया है। जांच के दौरान प्रश्नपत्र तैयार करने वाले विशेषज्ञों, बिचौलियों और कथित लाभार्थी अभ्यर्थियों तक पूरी कड़ी का पता लगाया गया है।

जांच एजेंसी के अनुसार—

    • 360 गवाहों के बयान दर्ज किए गए।
    • 422 दस्तावेज जांच का हिस्सा बनाए गए।
    • 43 भौतिक साक्ष्य एकत्र किए गए।
    • मामले के सभी आरोपी फिलहाल न्यायिक हिरासत में हैं।

72 अधिकारियों की टीम ने की जांच

सीबीआई ने बताया कि इस हाई-प्रोफाइल मामले की जांच के लिए 72 अधिकारियों और कर्मचारियों की विशेष टीम गठित की गई थी। इसके अलावा 8 साइबर फॉरेंसिक विशेषज्ञों को भी जांच में शामिल किया गया।

जांच के दौरान दिल्ली, महाराष्ट्र, राजस्थान, हरियाणा सहित कई राज्यों में 92 स्थानों पर छापेमारी की गई। कार्रवाई के दौरान डिजिटल डिवाइस, महत्वपूर्ण दस्तावेज जब्त किए गए, जबकि आरोपियों से जुड़े कई बैंक खाते, लॉकर और एक डीमैट खाता भी फ्रीज किया गया।

3 अगस्त को होगी अगली सुनवाई

अब इस मामले की अगली सुनवाई 3 अगस्त 2026 को फास्ट ट्रैक कोर्ट में होगी। यदि सीबीआई तय समय के भीतर सभी लंबित दस्तावेज अदालत में प्रस्तुत कर देती है, तो आरोप तय करने और आगे की न्यायिक प्रक्रिया शुरू होने की संभावना है।

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