दुर्ग समाचार: राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण (NALSA) की “Community Mediation Towards a Litigation-Free Rural India” पहल के तहत जिला विधिक सेवा प्राधिकरण (DLSA), दुर्ग द्वारा आयोजित पांच दिवसीय सामुदायिक मध्यस्थता प्रशिक्षण कार्यक्रम का सफलतापूर्वक समापन हो गया। 25 से 29 जुलाई 2026 तक आयोजित इस प्रशिक्षण का समापन प्रधान जिला एवं सत्र न्यायालय, दुर्ग के नवीन सभागार में हुआ।
यह प्रशिक्षण कार्यक्रम ग्रामीण स्तर पर छोटे-छोटे विवादों का न्यायालय जाने से पहले आपसी सहमति और संवाद के माध्यम से समाधान निकालने की दिशा में एक महत्वपूर्ण पहल माना जा रहा है।
NALSA की SOP के तहत आयोजित हुआ प्रशिक्षण
कार्यक्रम का आयोजन NALSA द्वारा जारी “Community Mediation Towards a Litigation-Free Rural India” SOP-2026 के तहत किया गया। इसका उद्देश्य गांवों में विवादों का शांतिपूर्ण समाधान कर मुकदमेबाजी को कम करना और सामाजिक सौहार्द को बढ़ावा देना है।
न्यायपालिका के मार्गदर्शन में हुआ आयोजन
प्रशिक्षण कार्यक्रम को सर्वोच्च न्यायालय, छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय और छत्तीसगढ़ राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के मार्गदर्शन में आयोजित किया गया। इस पहल को सामाजिक परिवर्तन और वाद-मुक्त ग्रामीण भारत की दिशा में एक महत्वपूर्ण प्रयास बताया गया।
पांच गांवों के कम्युनिटी मीडियेटर्स को मिला प्रशिक्षण
इस प्रशिक्षण में दुर्ग जिले के घुघसीडीह, ननकट्ठी, अरसनारा, निकुम और कुथरेल गांवों से चयनित कम्युनिटी मीडियेटर्स ने भाग लिया।
प्रतिभागियों को निम्न विषयों पर व्यवहारिक प्रशिक्षण दिया गया—
- सामुदायिक मध्यस्थता की अवधारणा
- विवाद समाधान की तकनीक
- प्रभावी संवाद कौशल
- सक्रिय श्रवण (Active Listening)
- नैतिक मूल्यों का पालन
- ग्राम स्तर पर सौहार्दपूर्ण विवाद निपटारा
प्रशिक्षण के दौरान रोल प्ले, समूह चर्चा और व्यवहारिक अभ्यास भी कराए गए, ताकि प्रतिभागी वास्तविक परिस्थितियों में मध्यस्थता की प्रक्रिया को समझ सकें।
गांवों में निभाएंगे अहम भूमिका
जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग के सचिव उमेश कुमार भागवतकर ने बताया कि प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले कम्युनिटी मीडियेटर्स अब अपने-अपने गांवों में पारिवारिक, सामाजिक और सामुदायिक विवादों का आपसी संवाद के माध्यम से समाधान कराने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाएंगे।
प्रतिभागियों को दिए गए प्रमाण-पत्र
समापन समारोह में प्रशिक्षण पूरा करने वाले सभी प्रतिभागियों को स्थायी एवं निरंतर लोक अदालत की अध्यक्षा श्रीमती सुषमा लकड़ा तथा जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव उमेश कुमार भागवतकर ने प्रमाण-पत्र प्रदान कर सम्मानित किया।
अधिकारियों ने कहा कि यह प्रमाण-पत्र केवल प्रशिक्षण पूर्ण होने का प्रमाण नहीं, बल्कि समाज में शांति, संवाद और सामाजिक समरसता स्थापित करने की जिम्मेदारी का प्रतीक भी है।
समन्वय समिति ने निभाई महत्वपूर्ण भूमिका
कार्यक्रम के सफल संचालन के लिए गठित समन्वय समिति में शामिल थे—
- श्रीमती सुषमा लकड़ा
- श्री भूपेश कुमार बसंत
- श्री उमेश कुमार भागवतकर
- सुश्री मुस्कान शर्मा
- श्री पंकज शर्मा
समिति ने प्रशिक्षण कार्यक्रम के संचालन, समन्वय और प्रभावी क्रियान्वयन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
मल्टी-सेक्टोरियल सहयोग से बनी सफल पहल
इस पहल को सफल बनाने के लिए जिला विधिक सेवा प्राधिकरण ने मल्टी-सेक्टोरियल एप्रोच अपनाई। इसमें विभिन्न विभागों, विधि महाविद्यालयों, पैरालीगल वालंटियर्स, स्थानीय जनप्रतिनिधियों, सामाजिक कार्यकर्ताओं और जिला अधिवक्ता संघ का सहयोग लिया गया।
अधिकारियों का मानना है कि यह पहल भविष्य में गांवों में विवादों के वैकल्पिक समाधान को बढ़ावा देने और न्यायालयों पर मुकदमों का बोझ कम करने में सहायक सिद्ध होगी।