देश के तीन अलग-अलग राज्यों—बिहार की बांकीपुर, मध्य प्रदेश की दतिया और गुजरात की मांजलपुर विधानसभा सीटों पर उपचुनाव के लिए मतदान प्रक्रिया गुरुवार को शांतिपूर्ण ढंग से संपन्न हो गई। इसके साथ ही तीनों ही हाई-प्रोफाइल सीटों पर मैदान में उतरे तमाम दिग्गजों और प्रत्याशियों की सियासी किस्मत ईवीएम (EVM) में बंद हो गई है। मतगणना और अंतिम नतीजे 3 अगस्त को घोषित किए जाएंगे।
हालांकि, मतदान के जो अंतिम आंकड़े सामने आए हैं, वे बेहद चौंकाने वाले हैं। तीनों ही सीटों पर पिछले आम विधानसभा चुनावों की तुलना में वोटिंग प्रतिशत गिरा है। बांकीपुर में करीब 7%, दतिया में 10% और मांजलपुर में सबसे ज्यादा 22% से अधिक की गिरावट दर्ज की गई है। कम मतदान के इस ट्रेंड ने राजनीतिक दलों की धड़कनों को बढ़ा दिया है।
बांकीपुर (बिहार): 34.30% मतदान से बढ़ी टेंशन, त्रिकोणीय हुआ मुकाबला
बिहार की राजधानी पटना के तहत आने वाली बांकीपुर विधानसभा सीट भाजपा का अभेद्य किला मानी जाती रही है, जहाँ 1995 से लगातार पार्टी जीतती आ रही है। पूर्व विधायक व बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के राज्यसभा जाने के बाद खाली हुई इस सीट पर मात्र 34.30% मतदान दर्ज हुआ, जो पिछली बार से करीब 7% कम है।
इस सीट पर कुल 26 उम्मीदवार मैदान में थे, लेकिन मुख्य मुकाबला भाजपा के नीरज कुमार सिन्हा, जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर और राजद की रेखा गुप्ता के बीच देखा जा रहा है।
- सियासी समीकरण: बांकीपुर एक पूरी तरह शहरी (अर्बन) सीट है, जहाँ कायस्थ, भूमिहार, ब्राह्मण, राजपूत और वैश्य वर्ग की अच्छी आबादी है, जो पारंपरिक रूप से बीजेपी का कोर वोटर माना जाता है।
- असर: शहरी मतदाताओं की उदासीनता और कम मतदान के कारण अगर कैडर वोटर बूथ तक नहीं पहुंचा, तो प्रशांत किशोर की मौजूदगी और आरजेडी द्वारा सवर्ण-मुस्लिम-यादव गोलबंदी से बीजेपी की जीत का अंतर (लीड) घट सकता है।
दतिया (मध्य प्रदेश): 70% बंपर वोटिंग से बढ़ा रोमांच, कड़ा मुकाबला
मध्य प्रदेश की दतिया सीट पर कांग्रेस विधायक राजेंद्र भारती की कोर्ट से सजा मिलने के बाद अयोग्यता के कारण उपचुनाव हुआ। ग्रामीण और अर्ध-शहरी बहुल इस सीट पर मतदाताओं ने भारी उत्साह दिखाया और यहाँ लगभग 70% मतदान हुआ। हालांकि, यह 2023 के चुनाव से करीब 10% कम है, फिर भी तीनों सीटों की तुलना में सबसे ज्यादा है।
- मुख्य प्रत्याशी: बीजेपी से आशुतोष तिवारी, कांग्रेस से कुंवर घनश्याम सिंह और आजाद समाज पार्टी (कांशीराम) से दामोदर सिंह यादव मैदान में हैं।
- सियासी समीकरण: दतिया में पूर्व गृह मंत्री नरोत्तम मिश्रा का टिकट कटने या चुनाव न लड़ने का असर बीजेपी के नए उम्मीदवार पर देखने को मिल सकता है। लेकिन नरोत्तम मिश्रा ने पूरी ताकत लगाकर बीजेपी प्रत्याशी का प्रचार किया है। 70% वोटिंग दर्शाती है कि यहाँ जनता पूरी तरह से बंटी हुई है और मुकाबला बेहद आक्रामक व कांटे का है।
मांजलपुर (गुजरात): 22.65% गिरा मतदान, कैडर वोटों पर टिकी उम्मीद
वडोदरा जिले की मांजलपुर सीट पर 8 बार के दिग्गज बीजेपी विधायक योगेश पटेल के निधन के बाद उपचुनाव हुआ। पाटीदार बहुल मानी जाने वाली इस सीट पर मात्र 37.50% मतदान हुआ, जो 2022 के विधानसभा चुनाव (60.15%) के मुकाबले 22.65% कम है।
- मुख्य प्रत्याशी: निर्दलीयों का पर्चा खारिज होने के बाद यहाँ बीजेपी के सतीश पटेल और कांग्रेस के अनुभवी नेता भीखाभाई रबारी के बीच सीधा मुकाबला है।
- सियासी समीकरण: परंपरागत रूप से माना जाता है कि शहरी सीटों पर कम मतदान सत्ताधारी दल के वफादार कैडर वोटरों के ध्रुवीकरण की ओर इशारा करता है। हालांकि, कांग्रेस इस सुस्त वोटिंग का फायदा उठाकर बीजेपी के गढ़ में सेंध लगाने का दावा कर रही है।
वोटिंग ट्रेंड के सियासी मायने: किसे फायदा और किसे नुकसान?
राजनीतिक विश्लेषकों के अनुसार, जब शहरी क्षेत्रों में वोटिंग गिरती है तो इसका सीधा मतलब होता है कि न्यूट्रल या आम मतदाता घर से बाहर नहीं निकला। ऐसे में नतीजे पूरी तरह इस बात पर निर्भर करते हैं कि किस राजनीतिक दल का बूथ-लेवल मैनेजमेंट मजबूत रहा और उसने अपने पक्के समर्थकों को पोलिंग बूथ तक पहुँचाया। 3 अगस्त को ईवीएम खुलने के बाद ही साफ होगा कि कम वोटिंग का यह साइलेंट ट्रेंड सत्ताधारी बीजेपी के पक्ष में जाता है या विपक्ष बाजी मारता है।