नई दिल्ली: देश में तेजी से बढ़ रहे एविएशन सेक्टर और प्रशिक्षित पायलटों की बढ़ती जरूरत को देखते हुए एयरपोर्ट अथॉरिटी ऑफ इंडिया (AAI) ने बड़ा कदम उठाया है। प्राधिकरण ने 7 एयरपोर्ट्स पर 11 नए फ्लाइंग ट्रेनिंग ऑर्गनाइजेशन (FTO) स्थापित करने की टेंडर प्रक्रिया पूरी कर ली है। इस पहल का उद्देश्य देश में पायलट प्रशिक्षण की क्षमता बढ़ाना, विदेशी फ्लाइंग स्कूलों पर निर्भरता कम करना और क्षेत्रीय हवाई अड्डों का बेहतर उपयोग सुनिश्चित करना है।
7 एयरपोर्ट्स पर स्थापित होंगे नए फ्लाइंग ट्रेनिंग सेंटर
AAI ने फरवरी 2026 में इन फ्लाइंग ट्रेनिंग ऑर्गनाइजेशन के लिए ई-टेंडर जारी किए थे। तकनीकी बोलियां 30 अप्रैल 2026 को और वित्तीय बोलियां 22 मई 2026 को खोली गईं। प्राधिकरण के अनुसार सभी सातों एयरपोर्ट्स के लिए निविदा प्रक्रिया सफलतापूर्वक पूरी हो चुकी है।
इन नए प्रशिक्षण केंद्रों के शुरू होने से देश में ही आधुनिक फ्लाइंग ट्रेनिंग की सुविधाएं उपलब्ध होंगी, जिससे पायलट बनने के इच्छुक छात्रों को विदेश जाकर प्रशिक्षण लेने की आवश्यकता कम होगी।
अगले 10 वर्षों में 31 हजार से ज्यादा पायलटों की जरूरत
नागरिक उड्डयन मंत्रालय के अनुमान के अनुसार, भारत को अगले एक दशक में करीब 30,000 से 31,800 अतिरिक्त पायलटों की आवश्यकता होगी।
इसकी प्रमुख वजहें हैं—
- भारतीय विमानन क्षेत्र का तेज विस्तार
- अगले पांच वर्षों में एयरलाइंस के बेड़े में लगभग 500 नए विमान शामिल होने की संभावना
- देशभर में 50 नए एयरपोर्ट विकसित करने की योजना
बढ़ते विमानन नेटवर्क को देखते हुए प्रशिक्षित पायलटों की मांग लगातार बढ़ने की उम्मीद है।
अभी सीमित है प्रशिक्षण क्षमता
अप्रैल 2026 तक भारत में केवल 41 DGCA-स्वीकृत फ्लाइंग ट्रेनिंग ऑर्गनाइजेशन संचालित हो रहे थे, जो 63 फ्लाइंग बेस से प्रशिक्षण दे रहे हैं।
AAI का मानना है कि यदि समय रहते प्रशिक्षण क्षमता नहीं बढ़ाई गई, तो आने वाले वर्षों में पायलटों की मांग और उपलब्धता के बीच बड़ा अंतर पैदा हो सकता है। इसी चुनौती को ध्यान में रखते हुए नए FTO स्थापित करने की योजना बनाई गई है।
आधुनिक विमान और सिमुलेटर से होगी ट्रेनिंग
AAI के अनुसार, नए फ्लाइंग ट्रेनिंग ऑर्गनाइजेशन शुरू होने के शुरुआती चरण में 60 से 70 प्रशिक्षण विमान उपलब्ध कराए जाएंगे।
जब सभी संस्थान पूरी क्षमता से संचालित होंगे, तब यह संख्या बढ़कर 110 से 120 प्रशिक्षण विमानों तक पहुंच जाएगी।
इसके अलावा प्रशिक्षण को अधिक प्रभावी बनाने के लिए आधुनिक फ्लाइट सिमुलेटर भी स्थापित किए जाएंगे।
हर साल हजारों छात्रों को मिलेगा लाभ
शुरुआती चरण में इन संस्थानों के माध्यम से प्रतिवर्ष 400 से 500 प्रशिक्षुओं को प्रशिक्षण दिया जा सकेगा।
पूरी क्षमता विकसित होने के बाद यह संख्या बढ़कर करीब 1,500 प्रशिक्षुओं प्रति वर्ष तक पहुंचने की संभावना है। इनमें लगभग 700 से 750 कैडेट पायलट शामिल होंगे।
क्या होगा फायदा?
इस पहल से—
- देश में पायलट प्रशिक्षण क्षमता बढ़ेगी।
- विदेशी फ्लाइंग स्कूलों पर निर्भरता कम होगी।
- प्रशिक्षण की लागत कम होने की संभावना है।
- क्षेत्रीय एयरपोर्ट्स का बेहतर उपयोग होगा।
- तेजी से बढ़ रहे भारतीय एविएशन सेक्टर को प्रशिक्षित पायलट उपलब्ध हो सकेंगे।
विशेषज्ञों का मानना है कि आने वाले वर्षों में भारत दुनिया के सबसे तेजी से बढ़ते विमानन बाजारों में शामिल रहेगा। ऐसे में प्रशिक्षण ढांचे का विस्तार भविष्य की जरूरतों को पूरा करने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।