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आरटीआई पर सरकार सख्त : नोटिस का जवाब नहीं दिया तो होगी कार्रवाई

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राज्य में सूचना का अधिकार कानून के तहत जानकारी देने में लापरवाही करने वाले अधिकारियों पर अब कार्रवाई होगी। मुख्य सचिव विकास शील ने सभी विभागों को आरटीआई मामलों में समयबद्ध कार्रवाई सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। राज्य सूचना आयोग की आपत्तियों के बाद जारी आदेश में स्पष्ट किया गया है कि आयोग के नोटिस का समय पर जवाब नहीं देना, आदेशों की अनदेखी करना और सुनवाई में अनुपस्थित रहना गंभीरता से लिया जाएगा। ऐसी लापरवाही मिलने पर संबंधित अधिकारी के खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी।

मुख्य सचिव ने सभी विभागों के जन सूचना अधिकारियों, प्रथम अपीलीय अधिकारियों और अन्य संबंधित अधिकारियों को आरटीआई के प्रावधानों का अक्षरशः पालन करने के निर्देश दिए हैं। राज्य सूचना आयोग से प्राप्त सभी नोटिस, आदेश और पत्राचार का समयबद्ध एवं प्रभावी पालन सुनिश्चित किया जाए।

सुनवाई की तारीख पर अधिकारी स्वयं अथवा प्रतिनिधि के माध्यम से जरूरी अभिलेखों के साथ उपस्थित रहेंगे। आरटीआई आवेदन और प्रथम अपील का निपटारा कानून में तय समय-सीमा के भीतर करना होगा। वैधानिक दायित्वों के निर्वहन में किसी तरह की शिथिलता या अनावश्यक देरी नहीं होनी चाहिए।

सरकार ने आरटीआई आवेदन, प्रथम अपील और आयोग से संबंधित मामलों को विभागीय स्तर पर सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए हैं, ताकि समय पर सूचना मिल सके। आयोग ने बलौदाबाजार के एक प्रकरण में 28 नवंबर 2025 को अधिकारियों द्वारा नोटिस और आदेशों का समय पर पालन नहीं करने तथा सुनवाई में अनुपस्थित रहने पर आपत्ति जताई थी।

जानकारी देने में लापरवाही में पंचायत विभाग सबसे आगे

सूचना देने में लापरवाही, जानबूझकर गलत जानकारी देने या सूचना के मार्ग में बाधा उत्पन्न करने वाले अधिकारियों के खिलाफ राज्य सूचना आयोग विभागीय नियमों के तहत अनुशासनात्मक कार्रवाई की अनुशंसा करता है। वर्ष 2024 में आयोग ने कुल 639 अधिकारियों के विरुद्ध ऐसी कार्रवाई की अनुशंसा की।

इनमें सबसे ज्यादा 486 मामले पंचायत एवं ग्रामीण विकास विभाग के अधिकारियों से जुड़े हैं। इनमें 297 अनुशंसाएं द्वितीय अपील और 189 शिकायत प्रकरणों के दौरान की गईं। इसके बाद वन एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के अधिकारियों के खिलाफ 33, राजस्व एवं आपदा प्रबंधन विभाग में 22, नगरीय प्रशासन एवं विकास विभाग में 15 तथा वाणिज्य कर विभाग के अधिकारियों के खिलाफ 14 प्रकरणों में कार्रवाई की अनुशंसा की गई।

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