राज्य में नए स्थापित हो रहे शासकीय मेडिकल कॉलेजों में संकाय सदस्यों (फैकल्टी) की तैनाती को लेकर स्वास्थ्य विभाग की सीधी भर्ती योजना का फार्मूला सफल नहीं हो रहा है। इस संकट से निपटने के लिए अब प्रशासनिक स्तर पर पुराने स्थापित मेडिकल कॉलेजों के डॉक्टरों को प्रमोशन देकर ट्रांसफर का फॉर्मूला लागू किया जा रहा है।
पहले 64 एसोसिएट प्रोफेसरों को प्रोफेसर पद पर पदोन्नत कर नए कॉलेजों में पदस्थ किया गया था। अब इसी कड़ी में 70 से अधिक असिस्टेंट प्रोफेसरों को एसोसिएट प्रोफेसर बनाकर नए मेडिकल कॉलेजों के रिक्त पदों पर पदस्थ करने की तैयारी है। हालांकि पुराने कॉलेजों से डाक्टरों का थोक में ट्रांसफर किए जाने से पुराने कॉलेजों की पीजी सीटें कम होने का खतरा पैदा हो गया है।
फिलहाल प्रदेश के सभी 10 पुराने शासकीय मेडिकल कॉलेजों की एकीकृत वरिष्ठता सूची (सीनियरिटी लिस्ट) के आधार पर विभागीय पदोन्नति समिति (डीपीसी) की प्रक्रिया की जा चुकी है। विभागीय सूत्रों के अनुसार अगले सप्ताह पदोन्नति आदेश के साथ स्थानांतरण सूची भी जारी कर दी जाएगी।
उल्लेखनीय है कि इससे पूर्व शासन द्वारा नए कॉलेजों के लिए प्रोफेसरों के 35 पदों पर सीधी भर्ती हेतु विज्ञापन जारी किया गया था, लेकिन केवल 7 अभ्यर्थियों ने ही रुचि दिखाई। सीधी भर्ती से पर्याप्त संकाय सदस्य न मिलने के कारण अब पुराने संस्थानों से कैडर शिफ्टिंग के जरिए खाली जगहें भरने का रणनीतिक कदम उठाया गया है।
पीजी सीटों में ऐसे होगी कमी, गणित समझें
फोरेंसिक मेडिसिन का प्रोफेसर पद होगा शून्य
पंडित जवाहरलाल नेहरू स्मृति चिकित्सा महाविद्यालय (रायपुर) के फोरेंसिक मेडिसिन विभाग में वर्तमान में केवल एक प्रोफेसर कार्यरत हैं। प्रस्तावित स्थानांतरण प्रक्रिया में इनका तबादला नए मेडिकल कॉलेज में तय किया गया है। उनके कार्यमुक्त होते ही रायपुर में फोरेंसिक मेडिसिन विभाग में प्रोफेसर का पद पूरी तरह रिक्त हो जाएगा। एनएमसी के नियमों के तहत 1 प्रोफेसर के आधार पर आबंटित पीजी की 3 सीटें स्वतः निरस्त या कम हो जाएंगी।
मेडिसिन विभाग की पीजी सीटों में कटौती
रायपुर मेडिकल कॉलेज के मेडिसिन विभाग में वर्तमान में पीजी की 15 सीटें स्वीकृत हैं। चालू शैक्षणिक सत्र के लिए 5 अतिरिक्त सीटों की मांग एनएमसी से की गई थी। हालांकि, इसी विभाग से 3 प्रोफेसरों का स्थानांतरण नए कॉलेजों में किए जाने के कारण अब अतिरिक्त सीटें मिलना तो दूर, वर्तमान स्वीकृत 15 सीटों को बरकरार रखना भी प्रशासनिक रूप से मुश्किल हो गया है। विशेषज्ञों के अनुसार, यही स्थिति प्रदेश के सभी 10 पुराने मेडिकल कॉलेजों के लगभग सभी प्रमुख विभागों में बनेगी।
मप्र में स्थायी नियुक्ति का फार्मूला सीनियर डाक्टरों ने बताया कि मप्र में मेडिकल कॉलेजों में स्थायी नियुक्ति का फार्मूला लागू किया गया है। वहां डाक्टरों की स्थायी नियुक्ति एक ही कॉलेज के लिए होती है। वहां संविदा नियुक्ति का सिस्टम भी कम है। एक ही कॉलेज में स्थायी नियुक्त और सैलरी स्ट्रक्चर बेहतर होने के कारण वहां कॉलेजों में डाक्टरों की कमी यहां की तुलना में कम है।
यहां स्थिति लगभग उलट है। डाक्टरों का ट्रांसफर करने के साथ संविदा नियुक्ति दी जाती है, जिसमें कई तरह की सुविधाएं और जॉब सिक्योरिटी न होने के कारण डाक्टर सरकारी नौकरी में आने को ज्यादा इच्छुक नहीं रहते हैं।