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एनालॉग पनीर का प्रोडक्शन बंद : मक्खन- दही भी बैन, असली की कीमत बढ़ने के आसार

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रायपुर – मिल्क पावडर और पाम ऑयल से बनने वाले एनालॉग पर प्रतिबंध का आर्डर आने से पहले ही फैक्ट्रयों में प्रोडक्शन बंद कर दिया गया था। शासन ने पनीर के अलावा इस तरीके से बनने वाले मक्खन और दही पर भी बैन किया है। नकली पनीर की बिक्री बंद होने के बाद असली की कीमत दोगुनी होने के आसार हैं। इधर आदेश का पालन कर भौतिक सत्यापन के लिए एफडीए की टीम निरीक्षण के लिए निकली। 

संचालकों को चेताया गया है कि,  नियम तोड़ने पर कड़ी कार्रवाई की जाएगी। सूत्रों के अनुसार एनालॉग पनीर के साथ असली दुग्ध उत्पादों का भ्रम पैदा करने वाले खाद्य पदार्थों पर खाद्य सुरक्षा और मानक अधिनियम के तहत एक साल का प्रतिबंध लगाया गया है। अधिकारिक सूत्रों का कहना है कि आवश्यकता होने पर आदेश का एक्सटेंशन किया जाएगा। एनालॉग पनीर के अलावा डिमांड की वजह से मक्खन, क्रीम और दही का निर्माण भी मिल्क पावडर और पाम ऑयल से किया जाता है जिसके भी निर्माण और प्रतिबंध के दायरे में लाया गया है। 

एनालॉग पनीर के उत्पादन पर प्रतिबंध और खाद्य विभाग की कार्रवाई
एनालॉग पर प्रतिबंध की जानकारी पहले ही कारोबारियों तक पहुंच चुकी थी इसलिए पिछले तीन-चार दिनों से इन फैक्ट्रयों में उत्पादन बंद किया जा चुका है। रायपुर जिले समेत प्रदेश में करीब डेढ़ दर्जन स्थानों पर एनालॉग पनीर का निर्माण किया जाता है। खाद्य सुरक्षा अधिकारियों को निर्देशित किया गया है कि वे आदेश के पालन का भौतिक सत्यापन करें और नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई करें। माना जा रहा है कि एनालॉग पनीर सहित अन्य नकली दुग्ध उत्पादों का निर्माण बंद होने के बाद असली के दामों में आने वाले दिनों में बढ़ोतरी होने के आसार बन रहे हैं।

चार फैक्ट्रियों में पहुंची टीम
रायपुर जिले के खाद्य सुरक्षा अधिकारियों की टीम शनिवार को भाठागांव के फर्म मेसर्स केएलपी, निमोरा स्थित एसजे डेयरी प्रोडक्ट्स, बीरगांव स्थित मेसर्स कांशी एग्रो एवं श्री सावरिया सेठ मिल्क प्रोडक्ट्स का निरीक्षण किया। जांच में सभी फर्मों में एनालॉग या अन्य कोई खाद्य पदार्थ का विनिर्माण/संग्रहण या विक्रय होना नहीं पाया गया है। सभी निर्माताओं को स्पष्ट निर्देश दिया गया कि राज्य में एनालॉग के प्रतिषेध आदेश का पूर्णतः पालन करे अन्यथा खाद्य सुरक्षा एवं मानक अधिनियम 2006 के अतर्गत कड़ी वैधानिक कार्यवाही की जायेगी। साथ ही जिन निर्माता फर्मों के लाइसेंस में ऐसे प्रतिषेध उत्पाद अंकित हैं, उन्हें आवश्यक संशोधन कराते हुए नियमानुसार अनुपालन करने के निर्देश दिए गए हैं।

जमाखोरी की आशंका भी
एनालॉग पर प्रतिबंध की खबर पहले ही लीक होने की वजह से इस सस्ते पनीर की जमाखोरी की आशंका भी है। जानकारों का कहना है कि बड़ी मात्रा में पनीर की खपत करने वाले होटलों और रेस्टोरेंट में इसका स्टॉक सुरक्षित किया जा चुका है। विभागीय अधिकारियों का तर्क है कि इस संदेह के आधार पर आने वाले दिनों में ऐसे संस्थानों को जांच के दायरे में लाया जा सकता है। राजधानी समेत प्रदेश में पिछले कुछ सालों से स्ट्रीट फूड का चलन बढ़ा है। इसमें पावभाजी का व्यापार भी फल फूल रहा है जो अपने ग्राहकों को जमकर मक्खन परोस रहे हैं। इन सब बिंदुओं को ध्यान में रखते हुए दुग्ध उत्पाद होने का अहसास कराने वाले मिल्क पॉवडर और पाम ऑयल से बनने वाले उत्पादों को प्रतिबंधित किया गया है।

कड़ी कार्रवाई होगी
खाद्य एवं औषधि प्रशासन के नियंत्रक दीपक अग्रवाल ने बताया कि, प्रतिबंधित वस्तुओं का अगर निर्माण करते कोई पकड़ा जाता है तो उसके खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी। मैदानी अमले को इस बात की सख्त हिदायत दी गई है कि इनका निर्माण और बिक्री पर नजर रखे।

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