भारत सरकार ने वित्त वर्ष 2025-26 में प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) से जुड़े 63 प्रस्तावों को मंजूरी दी, जिनके जरिए 10,292.67 करोड़ रुपये का निवेश स्वीकृत हुआ। इनमें चीन से सिर्फ एक करोड़ रुपये के एक निवेश प्रस्ताव को मंजूरी मिली, जबकि हांगकांग से आए 13 प्रस्तावों के तहत 610.42 करोड़ रुपये के निवेश को स्वीकृति दी गई।
चीन से सिर्फ एक प्रस्ताव मंजूर
उद्योग एवं आंतरिक व्यापार संवर्धन विभाग (DPIIT) के आंकड़ों के अनुसार, पूरे वित्त वर्ष 2025-26 में चीन से केवल एक एफडीआई प्रस्ताव को मंजूरी मिली, जिसकी कुल राशि 1 करोड़ रुपये थी।
पिछले वित्त वर्ष 2024-25 में भी चीन से केवल 28.71 करोड़ रुपये के एक निवेश प्रस्ताव को मंजूरी दी गई थी।
सिंगापुर बना सबसे बड़ा निवेशक
स्वीकृत निवेश प्रस्तावों में सिंगापुर सबसे बड़ा निवेशक रहा।
- 5 प्रस्ताव मंजूर
- कुल निवेश: 3,259.88 करोड़ रुपये
यह कुल स्वीकृत निवेश में सबसे बड़ी हिस्सेदारी है।
हांगकांग से 13 प्रस्तावों को मिली मंजूरी
हांगकांग से आए 13 निवेश प्रस्तावों को सरकार ने मंजूरी दी, जिनकी कुल राशि 610.42 करोड़ रुपये रही।
भारत में चीन की FDI हिस्सेदारी कितनी?
सरकारी आंकड़ों के मुताबिक, अप्रैल 2000 से मार्च 2026 के बीच भारत में आए कुल प्रत्यक्ष विदेशी निवेश में चीन की हिस्सेदारी मात्र 0.32% रही।
इस अवधि में—
- कुल चीनी निवेश: 2.51 अरब डॉलर
- भारतीय एफडीआई सूची में स्थान: 23वां
वहीं, हांगकांग से इस अवधि में करीब 4.91 अरब डॉलर का निवेश आया, जिससे उसकी हिस्सेदारी लगभग 0.62% रही और वह 15वें स्थान पर रहा।
2020 के बाद क्यों कड़े हुए नियम?
साल 2020 में गलवां घाटी में भारत-चीन सैन्य संघर्ष के बाद केंद्र सरकार ने प्रेस नोट-3 के तहत सीमावर्ती देशों से आने वाले निवेश पर कड़े नियम लागू किए।
इन नियमों के तहत—
- चीन
- पाकिस्तान
- बांग्लादेश
- नेपाल
- भूटान
- म्यांमार
- अफगानिस्तान
से आने वाले किसी भी प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) के लिए केंद्र सरकार की पूर्व मंजूरी अनिवार्य कर दी गई।
सरकार ने क्यों उठाया यह कदम?
सरकार का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना था कि महामारी के दौरान आर्थिक दबाव झेल रही भारतीय कंपनियों का विदेशी संस्थाओं द्वारा कम कीमत पर अधिग्रहण न हो सके और राष्ट्रीय सुरक्षा से जुड़े हित सुरक्षित रहें।
क्या है FDI?
प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (Foreign Direct Investment – FDI) वह निवेश होता है जिसमें कोई विदेशी कंपनी या निवेशक भारत में किसी कंपनी, उद्योग या परियोजना में सीधे निवेश करता है। इससे रोजगार, तकनीक और पूंजी निवेश बढ़ाने में मदद मिलती है।