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645 करोड़ बैंक घोटाला: CBI की जांच तेज, IAS अधिकारी साकेत कुमार भी जांच के दायरे में

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हरियाणा के चर्चित 645 करोड़ रुपये के कथित बैंक घोटाले की जांच अब और तेज हो गई है। केंद्रीय अन्वेषण ब्यूरो (CBI) सरकारी विभागों के बैंक खातों, करोड़ों रुपये के वित्तीय लेन-देन और संदिग्ध धन हस्तांतरण की गहन जांच कर रही है। इस मामले में हरियाणा कैडर के वरिष्ठ IAS अधिकारी साकेत कुमार भी जांच के दायरे में हैं।

हालांकि, अब तक उनके खिलाफ किसी अपराध का आरोप तय नहीं किया गया है और जांच जारी है।

सरकारी खातों से लेन-देन की जांच

जांच एजेंसियों के अनुसार हरियाणा सरकार के कई विभागों के खाते IDFC First Bank और AU Small Finance Bank में खोले गए थे।

आरोप है कि इन खातों के माध्यम से सरकारी धन को कथित तौर पर संदिग्ध और शेल कंपनियों सहित अन्य खातों में ट्रांसफर किया गया। इन्हीं लेन-देन की जांच CBI कर रही है।

आठ IAS अधिकारियों की जांच को मंजूरी

हरियाणा सरकार ने भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम की धारा 17A के तहत आठ IAS अधिकारियों के खिलाफ जांच की अनुमति दी है। इन अधिकारियों में साकेत कुमार का नाम भी शामिल है।

जांच एजेंसियां उनकी प्रशासनिक भूमिका और संबंधित वित्तीय प्रक्रियाओं की पड़ताल कर रही हैं।

साकेत कुमार की क्या भूमिका रही?

CBI के अनुसार, साकेत कुमार उस अवधि में विकास एवं पंचायत विभाग में आयुक्त एवं सचिव के पद पर कार्यरत थे, जब विभाग के बैंक खाते खोले गए और उनसे वित्तीय लेन-देन हुए।

फिलहाल एजेंसी यह जांच कर रही है कि उस समय की प्रशासनिक प्रक्रियाओं में उनकी क्या भूमिका रही। अब तक उनके खिलाफ किसी प्रकार की आपराधिक जिम्मेदारी तय नहीं की गई है।

CBI की कई राज्यों में छापेमारी

इस मामले में CBI पहले ही चंडीगढ़, पंचकूला और दिल्ली-एनसीआर के कई ठिकानों पर छापेमारी कर चुकी है।

छापेमारी के दौरान एजेंसी ने—

  • डिजिटल उपकरण
  • वित्तीय दस्तावेज
  • संपत्ति संबंधी रिकॉर्ड

जब्त किए हैं, जिनकी जांच जारी है।

क्या है पूरा मामला?

मामला हरियाणा सरकार और चंडीगढ़ प्रशासन के कुछ विभागों के बैंक खातों से जुड़े कथित संदिग्ध वित्तीय लेन-देन का है।

शुरुआत में इसकी जांच राज्य सतर्कता एवं भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो ने की थी, लेकिन बाद में मामले की गंभीरता को देखते हुए जांच CBI को सौंप दी गई।

CBI के अनुसार, मामले का दायरा बढ़ने पर कथित अनियमितताओं की राशि 661 करोड़ रुपये तक पहुंच सकती है, जबकि प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने करीब 645 करोड़ रुपये के कथित गबन की आशंका जताई है।

नोट: इस मामले में जांच अभी जारी है। एजेंसियों द्वारा लगाए गए आरोपों की न्यायिक पुष्टि होना बाकी है और संबंधित पक्षों की कानूनी प्रक्रिया जारी है।

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