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CWG 2026: किसान की बेटी साक्षी चौधरी ने गोल्ड मेडल देश को किया समर्पित, अब एशियन गेम्स और ओलिंपिक पर नजर

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भिवानी। हरियाणा के भिवानी जिले के धनाना गांव की रहने वाली और कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 की स्वर्ण पदक विजेता मुक्केबाज साक्षी चौधरी ने अपनी ऐतिहासिक जीत पूरे देश को समर्पित की है। सोशल मीडिया पर जारी वीडियो संदेश में उन्होंने देशवासियों का आभार जताते हुए कहा कि उन्हें मिल रहा प्यार और आशीर्वाद आगे बेहतर प्रदर्शन की प्रेरणा देता है। अब उनका अगला लक्ष्य एशियन गेम्स और ओलिंपिक में भारत के लिए स्वर्ण पदक जीतना है।

देशवासियों को समर्पित किया गोल्ड मेडल

साक्षी चौधरी ने कहा कि कॉमनवेल्थ गेम्स में गोल्ड जीतना उनके जीवन का सबसे गर्व का क्षण है। उन्होंने कहा कि यह सफलता केवल उनकी नहीं, बल्कि पूरे देश की है।

उन्होंने कहा, “मैं अपना गोल्ड मेडल पूरे भारत को समर्पित करती हूं। देशवासियों का प्यार और शुभकामनाएं मुझे आगे भी बेहतर प्रदर्शन के लिए प्रेरित करती रहेंगी। अब मेरा लक्ष्य एशियन गेम्स और ओलिंपिक में भी भारत के लिए स्वर्ण पदक जीतना है।”

सभी सहयोगियों का जताया आभार

साक्षी ने अपनी उपलब्धि का श्रेय अपने परिवार, कोच, भारतीय बॉक्सिंग महासंघ (BFI), भारतीय खेल प्राधिकरण (SAI), भारतीय सेना और सपोर्ट स्टाफ को दिया। उन्होंने कहा कि सभी के सहयोग, मार्गदर्शन और भरोसे की वजह से ही वह इस मुकाम तक पहुंच सकी हैं।

फाइनल में 5-0 से दर्ज की शानदार जीत

कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 के फाइनल मुकाबले में साक्षी चौधरी ने कनाडा की मुक्केबाज एंबर जाने वाल को 5-0 के यूनानिमस डिसीजन से हराकर स्वर्ण पदक अपने नाम किया। पूरे मुकाबले में उन्होंने आक्रामक खेल और सटीक पंचों के दम पर शुरुआत से अंत तक दबदबा बनाए रखा।

साधारण किसान परिवार से निकलकर बनीं चैंपियन

साक्षी चौधरी हरियाणा के भिवानी जिले के धनाना गांव की रहने वाली हैं। उनके पिता मनोज कुमार किसान हैं, जबकि माता शीला देवी गृहिणी हैं। उनका एक भाई भारतीय सेना में सेवा दे रहा है।

साक्षी ने वर्ष 2012 में बॉक्सिंग की शुरुआत की थी। वह एमए की पढ़ाई पूरी कर चुकी हैं और वर्तमान में एमबीए की छात्रा हैं। खेल और शिक्षा दोनों क्षेत्रों में उनकी उपलब्धियां युवाओं के लिए प्रेरणा बन रही हैं।

हरियाणा में खुशी की लहर

साक्षी की इस ऐतिहासिक जीत के बाद पूरे भिवानी और हरियाणा में खुशी का माहौल है। खेल प्रेमियों और स्थानीय लोगों ने इसे प्रदेश और देश के लिए गर्व का क्षण बताया है। उनकी सफलता ने एक बार फिर साबित किया है कि मेहनत, लगन और सही मार्गदर्शन के दम पर सीमित संसाधनों से भी विश्व स्तर पर पहचान बनाई जा सकती है।

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