धमतरी – छत्तीसगढ़ का धमतरी जिला अपनी प्राकृतिक सुंदरता के साथ अब ‘बटरफ्लाई डेस्टिनेशन’ के रूप में नई पहचान बनाने की ओर बढ़ रहा है। जिले के जंगलों में अब तक 90 प्रजातियों की तितलियां दर्ज की जा चुकी हैं। बरसात के मौसम में बांधों, नदी-नालों और घने जंगलों के आसपास रंग-बिरंगी तितलियों की मौजूदगी प्रकृति प्रेमियों को अपनी ओर आकर्षित करती है। इस अनूठी जैव विविधता को देखते हुए जिला प्रशासन अब यहां ‘बटरफ्लाई जोन’ विकसित करने की योजना बना रहा है।
धमतरी जिले से महानदी का उद्गम होता है। इसके अलावा यहां कई छोटी नदियां, जलप्रपात, चार बड़े बांध और विशाल वन क्षेत्र मौजूद हैं। यही प्राकृतिक वातावरण तितलियों के लिए अनुकूल आवास तैयार करता है। विशेषज्ञों के अनुसार, जिले में उपलब्ध विविध वनस्पतियां और जल स्रोत तितलियों के प्रजनन और संरक्षण के लिए आदर्श परिस्थितियां प्रदान करते हैं।
जंगलों और जलाशयों के आसपास उड़ रही रंग-बिरंगी तितलियां
बरसात के दिनों में जंगलों और जलाशयों के आसपास सैकड़ों रंग-बिरंगी तितलियां उड़ती नजर आती हैं। अलग-अलग रंगों और आकर्षक डिजाइनों वाली ये तितलियां पर्यटकों और प्रकृति प्रेमियों के लिए विशेष आकर्षण का केंद्र बनती हैं। इनकी मौजूदगी जंगलों की खूबसूरती को और बढ़ा देती है।
तितलियों का जीवन चक्र प्रकृति का महत्वपूर्ण हिस्सा
विशेषज्ञ बताते हैं कि तितलियों का जीवन चक्र पूरी तरह प्रकृति से जुड़ा होता है। वे पेड़-पौधों की पत्तियों पर अंडे देती हैं, जिनसे लार्वा निकलते हैं। लार्वा पत्तियां खाकर विकसित होते हैं और बाद में तितलियों में बदल जाते हैं। पूर्ण विकसित तितलियां फूलों से रस चूसते हुए परागण की प्रक्रिया को बढ़ावा देती हैं, जिससे वनस्पतियों का संरक्षण और जंगलों का विस्तार होता है।
‘बटरफ्लाई जोन’ बनाने में जुटा प्रशासन
धमतरी जिला प्रशासन भी इस जैव विविधता को पर्यटन से जोड़ने की दिशा में काम करने की तैयारी कर रहा है। प्रशासन का मानना है कि ‘बटरफ्लाई जोन’ विकसित होने से न केवल पर्यावरण संरक्षण को बढ़ावा मिलेगा, बल्कि जिले में इको-टूरिज्म को भी नई पहचान मिलेगी। वहीं, तितली प्रेमियों और पर्यावरणविदों ने भी सरकार से इस अनूठी प्राकृतिक धरोहर को संरक्षित और विकसित करने की मांग की है।