Meta Pixel

गाँव की चौपाल से न्याय की नई शुरुआत: कुथरेल में सामुदायिक मध्यस्थता, मीडिएशन 3.0 एवं विधिक जागरूकता का संगम

Spread the love

दुर्ग, 08 अगस्त 2026 / क्या हर विवाद का समाधान न्यायालय ही है? इसी प्रश्न का व्यवहारिक उत्तर लेकर जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग की टीम ग्राम कुथरेल पहुँची, जहाँ सामुदायिक मध्यस्थता शिविर, विधिक जागरूकता कार्यक्रम एवं जन-जागरूकता रैली का आयोजन किया गया। उद्देश्य स्पष्ट था – “विवाद बढ़ाएँ नहीं, संवाद से समाधान करें।”
कार्यक्रम में सरपंच, उपसरपंच, जनप्रतिनिधियों, पैरालीगल वालेंटियर्स तथा बड़ी संख्या में ग्रामीणों ने सहभागिता की। माननीय प्रधान जिला न्यायाधीश एवं अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण दुर्ग के मार्गदर्शन में स्थायी लोक अदालत की अध्यक्ष श्रीमती सुषमा लकड़ा, मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट श्री भूपेश कुमार बसंत एवं जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव श्री उमेश कुमार भागवतकर ने ग्रामीणों को बताया कि छोटे-छोटे सामाजिक, पारिवारिक एवं स्थानीय विवादों का समाधान न्यायालय पहुँचने से पूर्व सामुदायिक मध्यस्थता के माध्यम से आपसी संवाद, विश्वास और सहमति से किया जा सकता है।
इस अवसर पर मीडिएशन 3.0 की जानकारी देते हुए बताया गया कि मध्यस्थता अब केवल वैकल्पिक विवाद समाधान प्रक्रिया नहीं, बल्कि तकनीक-सक्षम, समयबद्ध एवं नागरिक-केंद्रित न्याय व्यवस्था का महत्वपूर्ण आधार बन रही है। साथ ही प्रशिक्षित सामुदायिक मध्यस्थों की भूमिका एवं ग्राम स्तर पर विवादों के शांतिपूर्ण समाधान के सफल प्रयासों से भी ग्रामीणों को अवगत कराया गया।
शिविर में अपराधमुक्त ग्राम, नशामुक्ति, टोनही प्रथा उन्मूलन, बाल संरक्षण, गुड टच-बैड टच, साइबर एवं डिजिटल सुरक्षा जैसे विषयों पर भी सरल भाषा में जागरूकता प्रदान की गई। बच्चों एवं युवाओं को सुरक्षित डिजिटल व्यवहार, शिक्षा, सकारात्मक जीवनशैली तथा नशे से दूर रहने का संदेश दिया गया।
कार्यक्रम के पश्चात ग्राम पंचायत से बाजार क्षेत्र तक जागरूकता रैली निकाली गई, जिसमें प्रचार वाहन के माध्यम से सामुदायिक मध्यस्थता, मीडिएशन 3.0, विधिक अधिकार, अपराध नियंत्रण एवं सामाजिक समरसता से जुड़े संदेश प्रसारित किए गए। रैली में ग्रामीणों ने उत्साहपूर्वक सहभागिता करते हुए एक स्वर में संदेश दिया – “विवाद बढ़ाएँ नहीं, संवाद से समाधान करें।”
प्रचार वाहन के माध्यम से जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग द्वारा सामुदायिक मध्यस्थता की अवधारणा, उद्देश्य एवं उपयोगिता पर केन्द्रित विशेष रूप से तैयार छत्तीसगढ़ी गीत भी प्रसारित किया गया, जिसके माध्यम से ग्रामीणों को संवाद, सहमति एवं आपसी समझ के जरिए विवादों के सौहार्दपूर्ण समाधान का संदेश दिया गया।
यह आयोजन केवल एक विधिक जागरूकता शिविर नहीं, बल्कि न्याय को चौपाल तक पहुँचाने, समुदाय को न्याय प्रक्रिया का सहभागी बनाने तथा संवाद आधारित, शांतिपूर्ण एवं समरस समाज के निर्माण की दिशा में जिला विधिक सेवा प्राधिकरण, दुर्ग की एक महत्वपूर्ण पहल सिद्ध हुआ। यही प्रयास विकसित भारत के लिए विवाद-मुक्त, जागरूक और न्याय-सशक्त ग्रामीण भारत की मजबूत नींव रखता है।

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *