Dabur FSSAI Controversy: FMCG कंपनी डाबर ने अपने कुछ खाद्य उत्पादों पर ‘100%’ जैसे दावों को लेकर खाद्य नियामक FSSAI की कार्रवाई को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी है। कंपनी ने आरोप लगाया है कि FSSAI की कार्रवाई से उसके कारोबारी हित प्रभावित हुए और दूसरे निर्माताओं को फायदा पहुंच सकता है।
डाबर के मुताबिक, नियामक के आदेश से करीब ₹150 करोड़ की इन्वेंट्री पर संकट खड़ा हो गया था। कंपनी ने अदालत में दायर याचिका में कार्रवाई को एकतरफा बताते हुए कहा कि उसे अपना पक्ष रखने का पर्याप्त अवसर नहीं दिया गया।
हाईकोर्ट ने FSSAI के आदेश पर लगाई रोक
मामले की सुनवाई के दौरान दिल्ली हाईकोर्ट ने डाबर को अंतरिम राहत दी और FSSAI के संबंधित आदेश पर 24 अगस्त तक रोक लगा दी। अदालत ने प्रथम दृष्टया माना कि इस तरह का निषेधात्मक आदेश जारी करने से पहले कंपनी को अपना पक्ष रखने का अवसर दिया जाना चाहिए था।
इस अंतरिम आदेश का मतलब यह नहीं है कि विवाद का अंतिम फैसला डाबर के पक्ष में हो गया है। फिलहाल अदालत मामले के कानूनी और नियामकीय पहलुओं पर आगे सुनवाई करेगी।
क्या है ‘100%’ दावे को लेकर विवाद?
FSSAI ने खाद्य उत्पादों के लेबल और विज्ञापनों में ‘100% Pure’, ‘100% Natural’, ‘100% Organic’ जैसे दावों को लेकर आपत्ति जताई है। नियामक का कहना है कि इस तरह की शब्दावली उपभोक्ताओं के मन में किसी उत्पाद की पूर्ण शुद्धता या श्रेष्ठता को लेकर गलत धारणा पैदा कर सकती है।
FSSAI के अनुसार, ‘100 per cent’ शब्द खाद्य नियमों में इस तरह परिभाषित नहीं है और ऐसे दावों को सत्य, स्पष्ट और गैर-भ्रामक होना चाहिए।
डाबर ने लगाए भेदभाव के आरोप
डाबर का तर्क है कि ‘100%’ का इस्तेमाल उसके उत्पादों में किसी दूसरे निर्माता या ब्रांड को नीचा दिखाने के लिए नहीं किया गया। कंपनी ने आरोप लगाया कि FSSAI की कार्रवाई से प्रतिस्पर्धी कंपनियों के व्यावसायिक हितों को फायदा पहुंच सकता है।
कंपनी का यह भी कहना है कि नियामक ने सीधे प्रतिबंधात्मक आदेश जारी कर दिया, जबकि उसे पहले अपना पक्ष रखने या लेबल में सुधार करने का मौका दिया जाना चाहिए था।
11 प्रमुख उत्पादों पर पड़ा असर
डाबर के अनुसार, FSSAI की कार्रवाई से उसके करीब 11 प्रमुख उत्पाद प्रभावित हुए। इनमें डाबर हनी, डाबर वर्जिन कोकोनट ऑयल और RÉAL Activ Coconut Water जैसे उत्पाद शामिल बताए गए हैं।
कंपनी ने यह भी दावा किया कि कुछ उत्पादों के लेबल पर ‘100%’ का दावा था ही नहीं, फिर भी उन्हें कार्रवाई के दायरे में शामिल किया गया। डाबर के अनुसार इससे उसकी बड़ी मात्रा में तैयार इन्वेंट्री के नष्ट होने का जोखिम पैदा हुआ।
रिटेल और क्विक-कॉमर्स सप्लाई पर भी असर
FSSAI के आदेश की जानकारी सार्वजनिक होने के बाद डाबर के प्रभावित उत्पादों की सप्लाई पर भी असर पड़ा। रिपोर्टों के मुताबिक कुछ रिटेल और ऑनलाइन प्लेटफॉर्म ने ऐसे उत्पादों की बिक्री को लेकर सावधानी बरती।
डाबर का कहना है कि इससे उसकी सामान्य सप्लाई चेन प्रभावित हुई और बाजार में उसके उत्पादों को लेकर अनिश्चितता पैदा हुई।
लेबल बदलने की प्रक्रिया पहले ही शुरू कर चुकी थी कंपनी
डाबर ने यह भी कहा कि वह FSSAI की आपत्तियों के बाद संबंधित उत्पादों के लेबल और मार्केटिंग सामग्री में बदलाव की प्रक्रिया पहले ही शुरू कर चुकी थी। कंपनी के मुताबिक, कई उत्पादों के लेबल और विज्ञापन नए दावों के अनुरूप बदले जा चुके हैं या बदलाव की प्रक्रिया में हैं।
‘100%’ दावे पर FSSAI का क्या कहना है?
FSSAI का रुख यह है कि खाद्य उत्पादों पर इस्तेमाल होने वाले दावे उपभोक्ताओं को भ्रमित नहीं करने चाहिए। नियामक के अनुसार, विज्ञापन और लेबलिंग में किए गए दावे सच्चे, स्पष्ट, अर्थपूर्ण और गैर-भ्रामक होने चाहिए।
वहीं डाबर का कहना है कि उसके उत्पादों में इस्तेमाल किया गया ‘100%’ दावा उद्योग में प्रचलित शब्दावली का हिस्सा है और इसे किसी प्रतिस्पर्धी कंपनी के संदर्भ में इस्तेमाल नहीं किया गया।
अब 24 अगस्त की सुनवाई पर नजर
फिलहाल दिल्ली हाईकोर्ट की अंतरिम राहत के बाद डाबर को अस्थायी राहत मिली है। लेकिन ‘100%’ दावों की वैधता, FSSAI की कार्रवाई की प्रक्रिया और कंपनी के आरोपों पर अंतिम स्थिति आगे की सुनवाई में स्पष्ट होगी।
इस मामले में अगली महत्वपूर्ण तारीख 24 अगस्त 2026 है, जब अदालत इस विवाद पर आगे सुनवाई करेगी।